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लॉक डाउन में सड़क किनारे सजीं मिट्टी के बर्तनों की दुकानें
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फोटो16 बाजार में बिक्री के लिए रखे मिटथ्टी के बर्तन
- फोटो : MATHURA
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मथुरा। लॉकडाउन में भले ही अभी बाजार बंद हैं, लेकिन सड़क किनारे गरीबों के फ्रिज कहे जाने वाले मिट्टी के बर्तनों की खूब बिक्री हो रही है। आवश्यक कार्य से बाजार आ रहे लोग गर्मी में पानी ठंडा रखने लिए मिट्टी के बर्तन खरीद कर ले जा रहे हैं। हालांकि इन बर्तनों पर महंगाई का असर है। पिछले साल से मिट्टी के बर्तन 20 से 30 प्रतिशत महंगे हो गए हैं।
पिछले एक हफ्ते के दौरान गर्मी में तेजी से इजाफ हुआ है। तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। यह इस मौसम का सबसे अधिक तापमान है। इससे लोग व्याकुल हैं। खासकर गरीब और निम्न मध्यम वर्ग इससे बेचैन है। रोजी-रोटी के संकट के बीच गर्मी के इस प्रभाव से बचने के लिए मिट्टी के बर्तन की तलाश कर रहे लोगों को सड़क किनारे इन्हें देख राहत मिल गई है। गौड़ीय मठ के निकट मिट्टी के बर्तन की बिक्री की जा रही है।
हालांकि पिछले साल की तुलना में इस बार 20-25 रुपये का अंतर आ रहा है। प्लास्टिक टोंटी लगा बड़ा मटका 90-100 रुपये तक में बिक रहा है। बगैर टोंटी के इसकी कीमत 50-60 रुपये है, जो न्यूनतम 30 रुपये तक मिल रहा है। आरओ पानी की बोलत के हिसाब से बने मटके की कीमत 150 रुपये के करीब है। मिट्टी के बर्तन बेचने वाले कैलाश का कहना है कि इस बार मिट्टी की भी समस्या रही है। इसके कारण लागत अधिक आने पर बर्तन थोड़े महंगे हैं। लॉकडाउन के चलते खरीदार भी नहीं हैं।
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पिछले एक हफ्ते के दौरान गर्मी में तेजी से इजाफ हुआ है। तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। यह इस मौसम का सबसे अधिक तापमान है। इससे लोग व्याकुल हैं। खासकर गरीब और निम्न मध्यम वर्ग इससे बेचैन है। रोजी-रोटी के संकट के बीच गर्मी के इस प्रभाव से बचने के लिए मिट्टी के बर्तन की तलाश कर रहे लोगों को सड़क किनारे इन्हें देख राहत मिल गई है। गौड़ीय मठ के निकट मिट्टी के बर्तन की बिक्री की जा रही है।
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हालांकि पिछले साल की तुलना में इस बार 20-25 रुपये का अंतर आ रहा है। प्लास्टिक टोंटी लगा बड़ा मटका 90-100 रुपये तक में बिक रहा है। बगैर टोंटी के इसकी कीमत 50-60 रुपये है, जो न्यूनतम 30 रुपये तक मिल रहा है। आरओ पानी की बोलत के हिसाब से बने मटके की कीमत 150 रुपये के करीब है। मिट्टी के बर्तन बेचने वाले कैलाश का कहना है कि इस बार मिट्टी की भी समस्या रही है। इसके कारण लागत अधिक आने पर बर्तन थोड़े महंगे हैं। लॉकडाउन के चलते खरीदार भी नहीं हैं।
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