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वृंदावन की कुंज गलियों में गूंजा राधे-श्याम
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Fri, 13 Nov 2015 06:31 PM IST
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श्रीराधा रानी ब्रजचौरासी कोस ब्रजयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने शुक्रवार को धर्मनगरी के मंदिरों के दर्शन कर पूजा अर्चना की। ब्रजयात्रा में शामिल नगर की कुंज गलियों में श्रद्धालु श्रीराधा नाम के संकीर्तन पर नृत्य करते चल रहे थे। इससे समूचा वातावरण राधामय हो गया।
ब्रजयात्रियों का दल शुक्रवार सुबह जगन्नाथ घाट से वृंदावन के प्राचीन मंदिरों के दर्शनों के लिए निकल पड़ा। परिक्रमा मार्ग होते हुए संकीर्तन की धुन पर वंशीवट, गोपेश्वर मंदिर, राधारमण मंदिर, राधादामोदर मंदिर, राधाश्याम सुंदर मंदिर, राधावल्लभ, बांकेबिहारी मंदिर के साथ-साथ निधिवनराज और सेवाकुंज के भी दर्शन किए।
इस अवसर पर ब्रजयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को मुख्य व्यवस्थापक राधाकांत शास्त्री ने मंदिरों के पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताया। शाम को यात्रा मंदिरों के दर्शन कर अपने पड़ाव पर वापस आ गई। इसके बाद कुंभ मेला पड़ाव स्थल पर श्रीवृंदावन धाम का महत्व बताते हुए संत रमेश बाबा ने कहा कि यहां रहने वाले ब्रजवासी धन्य हैं। ब्रज की रज चिन्मय और अलौकिक है। ब्रज और वृंदावन की रज को मस्तक पर धारण करने से अनमोल फल प्राप्त होता है।
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ब्रजयात्रियों का दल शुक्रवार सुबह जगन्नाथ घाट से वृंदावन के प्राचीन मंदिरों के दर्शनों के लिए निकल पड़ा। परिक्रमा मार्ग होते हुए संकीर्तन की धुन पर वंशीवट, गोपेश्वर मंदिर, राधारमण मंदिर, राधादामोदर मंदिर, राधाश्याम सुंदर मंदिर, राधावल्लभ, बांकेबिहारी मंदिर के साथ-साथ निधिवनराज और सेवाकुंज के भी दर्शन किए।
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इस अवसर पर ब्रजयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को मुख्य व्यवस्थापक राधाकांत शास्त्री ने मंदिरों के पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताया। शाम को यात्रा मंदिरों के दर्शन कर अपने पड़ाव पर वापस आ गई। इसके बाद कुंभ मेला पड़ाव स्थल पर श्रीवृंदावन धाम का महत्व बताते हुए संत रमेश बाबा ने कहा कि यहां रहने वाले ब्रजवासी धन्य हैं। ब्रज की रज चिन्मय और अलौकिक है। ब्रज और वृंदावन की रज को मस्तक पर धारण करने से अनमोल फल प्राप्त होता है।
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