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श्रीराधारानी ब्रजयात्रा में बरस रहा भक्ति रस
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Sun, 22 Nov 2015 11:40 PM IST
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श्रीमान मंदिर बरसाना की ओर से ब्रज चौरासी कोस यात्रा (श्रीराधारानी ब्रजयात्रा) में भक्ति का रस बरस रहा है। भजन संकीर्तन की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते ब्रज की यात्रा में सुधबुध भुला बैठे हैं। हरिनाम संकीर्तन के इस आनंद से हर कोई आनंदित हो रहा है।
यात्रा में शास्त्रीय संगीत पर संकीर्तन में ब्रजबालाओं का नृत्य सहित दर्शन, श्रवण बरबस सबका मन मोह लेता है। ब्रजयात्रा शांतनु नगरी सतोह में शांतनु बिहारी और शांतनु कुंड के दर्शन करते हुए बकासुर की स्मृतियों को तरोताजा करते हुए बाकलपुर पहुंची।
पूतना (जो आकाशचारिणी थी) के गांव फैंचरी और इसके पूर्व गंधर्व-गंधर्वियों के नृत्य गान का स्थल हैय के दर्शन कर अपने पड़ाव स्थल वाटी पहुंची। जहां बहुला गाय की बाल कृष्ण ने सिंह से रक्षा की थी। यात्रा के संचालक रमेश बाबा ने ब्रजवासियों से ब्रज के समस्त लीला स्थलों के संरक्षण संवर्धन का आह्वान किया, साथ ही यमुना महारानी के पुनरागमन हेतु किसी भी संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा।
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उन्होंने कहा कि हमारा जीवन यमुना से ज्यादा कीमती नहीं है। इस अवसर पर डा. रामजी लाल शास्त्री, यमुना मुक्तिकरण अभियान के संयोजक राधाकांत शास्त्री, सह संयोजक सुनील सिंह, पंकज चतुर्वेदी, श्याम चतुर्वेदी, हरीश ठेनुआं आदि उपस्थित रहे।
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यात्रा में शास्त्रीय संगीत पर संकीर्तन में ब्रजबालाओं का नृत्य सहित दर्शन, श्रवण बरबस सबका मन मोह लेता है। ब्रजयात्रा शांतनु नगरी सतोह में शांतनु बिहारी और शांतनु कुंड के दर्शन करते हुए बकासुर की स्मृतियों को तरोताजा करते हुए बाकलपुर पहुंची।
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पूतना (जो आकाशचारिणी थी) के गांव फैंचरी और इसके पूर्व गंधर्व-गंधर्वियों के नृत्य गान का स्थल हैय के दर्शन कर अपने पड़ाव स्थल वाटी पहुंची। जहां बहुला गाय की बाल कृष्ण ने सिंह से रक्षा की थी। यात्रा के संचालक रमेश बाबा ने ब्रजवासियों से ब्रज के समस्त लीला स्थलों के संरक्षण संवर्धन का आह्वान किया, साथ ही यमुना महारानी के पुनरागमन हेतु किसी भी संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा।
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उन्होंने कहा कि हमारा जीवन यमुना से ज्यादा कीमती नहीं है। इस अवसर पर डा. रामजी लाल शास्त्री, यमुना मुक्तिकरण अभियान के संयोजक राधाकांत शास्त्री, सह संयोजक सुनील सिंह, पंकज चतुर्वेदी, श्याम चतुर्वेदी, हरीश ठेनुआं आदि उपस्थित रहे।