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स्वेता शर्मा में शिक्षा सेवा रत्न
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मथुरा। ग्रेच्युटी के भुगतान से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक को भारी पड़ गई। कोर्ट की नाराजगी को देख कठघरे में खड़े वित्त एवं लेखाधिकारी के पैरों तले जमीन खिसक गई। किसी तरह अधिवक्ताओं ने मामला संभाला और लिखित में भुगतान करने का आश्वासन देने के बाद ही कोर्ट ने वित्त एवं अधिकारी को जाने की अनुमति मिल सकी।
बताया जाता है कि नौहझील विकासखंड के आजनौंठ विद्यालय में कार्यरत हरेकृष्णा की सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। उनके द्वारा अपने जीवित रहते 60 वर्ष में सेवानिवृत्ति का विकल्प पत्र नहीं भरा था। इस पर उनकी पत्नी ने ग्रेच्युटी लेने के लिए आवेदन किया तो विभाग ने विकल्प पत्र न भरने की स्थिति में ग्रेच्युटी देने से इनकार कर दिया। इस आदेश के विरोध में मृतक की पत्नी मुनेश देवी हाईकोर्ट इलाहाबाद की शरण ली। उच्च न्यायालय ने मुनेश देवी के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए बेसिक शिक्षा विभाग को ग्रेच्युटी का भुगतान करने का आदेश दिया। इसके बावजूद भी विभाग द्वारा पीड़ित पक्ष को भुगतान नहीं किया गया।
इस पर पीड़ित ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। इस याचिका पर 8 अक्तूूबर को सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट में पेश हुए मथुरा के वित्त एवं लेखाधिकारी राहुल यादव ने विभागीय आदेश का हवाला देते हुए ग्रेच्युटी का भुगतान करने में असमर्थता जाहिर कर दी। इस पर कोर्ट नाराज हो गई। कोर्ट के तेवरों ने वित्त एवं लेखाधिकारी के पैरों तले जमीन खिसका दी। आखिरकार तीन घंटे की मशक्कत के बाद वित्त एवं लेखाधिकारी राहुल यादव ने कोर्ट में अपने अधिवक्ता के माध्यम से लिखित मामले का निस्तारण करते हुए पत्रावली संयुक्त निदेशक कोषागार एवं पेंशन आगरा को भेजने का आश्वासन दिया। इसके बाद ही उन्हें कोर्ट से राहत मिल सकी।
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बताया जाता है कि नौहझील विकासखंड के आजनौंठ विद्यालय में कार्यरत हरेकृष्णा की सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। उनके द्वारा अपने जीवित रहते 60 वर्ष में सेवानिवृत्ति का विकल्प पत्र नहीं भरा था। इस पर उनकी पत्नी ने ग्रेच्युटी लेने के लिए आवेदन किया तो विभाग ने विकल्प पत्र न भरने की स्थिति में ग्रेच्युटी देने से इनकार कर दिया। इस आदेश के विरोध में मृतक की पत्नी मुनेश देवी हाईकोर्ट इलाहाबाद की शरण ली। उच्च न्यायालय ने मुनेश देवी के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए बेसिक शिक्षा विभाग को ग्रेच्युटी का भुगतान करने का आदेश दिया। इसके बावजूद भी विभाग द्वारा पीड़ित पक्ष को भुगतान नहीं किया गया।
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इस पर पीड़ित ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। इस याचिका पर 8 अक्तूूबर को सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट में पेश हुए मथुरा के वित्त एवं लेखाधिकारी राहुल यादव ने विभागीय आदेश का हवाला देते हुए ग्रेच्युटी का भुगतान करने में असमर्थता जाहिर कर दी। इस पर कोर्ट नाराज हो गई। कोर्ट के तेवरों ने वित्त एवं लेखाधिकारी के पैरों तले जमीन खिसका दी। आखिरकार तीन घंटे की मशक्कत के बाद वित्त एवं लेखाधिकारी राहुल यादव ने कोर्ट में अपने अधिवक्ता के माध्यम से लिखित मामले का निस्तारण करते हुए पत्रावली संयुक्त निदेशक कोषागार एवं पेंशन आगरा को भेजने का आश्वासन दिया। इसके बाद ही उन्हें कोर्ट से राहत मिल सकी।
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