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‘आद्य शंकराचार्य ने की विश्व में धर्म की स्थापना’
अमर उजाला वृंदावन
Updated Wed, 11 May 2016 11:58 PM IST
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नगर में आद्य शंकराचार्य की 2523वीं जयंती पर निकाली गई शोभायात्रा
- फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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विरक्त सन्यासी परिषद् के तत्वावधान में आद्य शंकराचार्य की 2523वीं जयंती बुधवार को नगर के विभिन्न क्षेत्रों में श्रद्धाभाव से मनाई गई। इस दौरान भव्य शोभायात्रा प्राचीन गोपेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होती हुई वृंदावन गार्डन पहुंची। यहां आयोजित धर्मसभा में संत-विद्वतजनों ने आद्य शंकराचार्य के जीवन पर प्रकाश डाला।
सभा में महामंडलेश्वर स्वामी नारायणानंद महाराज ने कहा कि धर्म और समाज को व्यवस्थित करने के लिए आशुतोष शिव का आगमन दक्षिण भारत के कालडी गांव में वेदपाठी ब्राह्मण के यहां हुआ था। पंडित रामगोपाल गोस्वामी ने कहा कि शंकराचार्य ने विश्व में धर्म की स्थापना की। आद्य शंकराचार्य भगवान शंकर के ही अवतार थे।
आचार्य बद्रीश और स्वामी सुरेशानंद महाराज ने कहा कि लोक संग्रह के लिए आचार्य शंकर ने अध्यात्म की चरम स्थिति में किसी तरह के बंधन को स्वीकार नहीं किया। महंत हरिबोल बाबा और प्रह्लाद दास ने कहा कि शंकराचार्य का अवतार वेदों की रक्षा करने के लिए हुआ।
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बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि भारत में सनातन धर्म की ध्वजा चहुंओर फहराने में शंकराचार्य का बहुत योगदान है। इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष मुकेश गौतम, रामकिशन अग्रवाल, डा. मनोज मोहन शास्त्री, राजू द्विवेदी, देवंद्र शर्मा, डा. स्वामी शंकरानंद, डा. विनोद बनर्जी आदि उपस्थित थे।
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सभा में महामंडलेश्वर स्वामी नारायणानंद महाराज ने कहा कि धर्म और समाज को व्यवस्थित करने के लिए आशुतोष शिव का आगमन दक्षिण भारत के कालडी गांव में वेदपाठी ब्राह्मण के यहां हुआ था। पंडित रामगोपाल गोस्वामी ने कहा कि शंकराचार्य ने विश्व में धर्म की स्थापना की। आद्य शंकराचार्य भगवान शंकर के ही अवतार थे।
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आचार्य बद्रीश और स्वामी सुरेशानंद महाराज ने कहा कि लोक संग्रह के लिए आचार्य शंकर ने अध्यात्म की चरम स्थिति में किसी तरह के बंधन को स्वीकार नहीं किया। महंत हरिबोल बाबा और प्रह्लाद दास ने कहा कि शंकराचार्य का अवतार वेदों की रक्षा करने के लिए हुआ।
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बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि भारत में सनातन धर्म की ध्वजा चहुंओर फहराने में शंकराचार्य का बहुत योगदान है। इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष मुकेश गौतम, रामकिशन अग्रवाल, डा. मनोज मोहन शास्त्री, राजू द्विवेदी, देवंद्र शर्मा, डा. स्वामी शंकरानंद, डा. विनोद बनर्जी आदि उपस्थित थे।