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‘सुख और दुख जीवन के पहलू’
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 20 May 2015 11:59 PM IST
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हाईवे स्थित जयगुरुदेव आश्रम में चल रहे वार्षिक भंडारा सत्संग-मेला में पूजन के दिन पंकज महाराज ने श्रद्धालुओं को कई बातें बताईं। मेले में 18 जोड़ों का विवाह भी कराया गया।
आयोजन के दौरान पंकज महाराज ने कहा कि एक तस्वीर के दो पहलू होते हैं। एक तरफ शीशा चमकता है तो दूसरी तरफ कील और दफ्ती होती है। ठीक इसी प्रकार मानव के जीवन के दो पहलू हैं। गरीब तो दुखी है लेकिन सेठ-साहूकारों को देखकर दुनिया के लोग सोचते हैं कि ये सब सुखी हैं। लेकिन, इन लोगों को चिंता खाए जा रही है।
उन्होंने कहा कि जिनको सुरत-शब्द का भेद मिला और रूहानी अभ्यास किया वे अपने ख्याल को नौ दरवाजों से निकाल दसवें द्वार पर पहुंचा कर इस देहरुपी जेल खाने से आजाद हो गये हैं। संतों ने इस दुनिया को सुख-दुख की नगरी बताया। ये समस्याएं हमें पाप-पुण्य के कर्मों के परिणाम स्वरूप मिलती हैं। ये क्रम से आते रहते हैं। ये न कभी किसी से हल हुईं और न होगी।
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जिस प्रकार छोटा बच्चा पिता की अंगुली को पकड़कर मेला में जाता है तो वह सामानों को देखकर खुश होता है। लेकिन जब पिता की अंगुली छूट जाती है, तो वह उन सामानों के बीच रहते हुए भी रोने-चिल्लाने लगता है। मेले से श्रद्धालु अपने घरों को लौटने लगे हैं। मेले में भी विवाह बिना दहेज के कराए गए।
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आयोजन के दौरान पंकज महाराज ने कहा कि एक तस्वीर के दो पहलू होते हैं। एक तरफ शीशा चमकता है तो दूसरी तरफ कील और दफ्ती होती है। ठीक इसी प्रकार मानव के जीवन के दो पहलू हैं। गरीब तो दुखी है लेकिन सेठ-साहूकारों को देखकर दुनिया के लोग सोचते हैं कि ये सब सुखी हैं। लेकिन, इन लोगों को चिंता खाए जा रही है।
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उन्होंने कहा कि जिनको सुरत-शब्द का भेद मिला और रूहानी अभ्यास किया वे अपने ख्याल को नौ दरवाजों से निकाल दसवें द्वार पर पहुंचा कर इस देहरुपी जेल खाने से आजाद हो गये हैं। संतों ने इस दुनिया को सुख-दुख की नगरी बताया। ये समस्याएं हमें पाप-पुण्य के कर्मों के परिणाम स्वरूप मिलती हैं। ये क्रम से आते रहते हैं। ये न कभी किसी से हल हुईं और न होगी।
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जिस प्रकार छोटा बच्चा पिता की अंगुली को पकड़कर मेला में जाता है तो वह सामानों को देखकर खुश होता है। लेकिन जब पिता की अंगुली छूट जाती है, तो वह उन सामानों के बीच रहते हुए भी रोने-चिल्लाने लगता है। मेले से श्रद्धालु अपने घरों को लौटने लगे हैं। मेले में भी विवाह बिना दहेज के कराए गए।