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Mathura News: दिनेश फलाहारी को सनातन रत्न
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वृंदावन। ब्रजभूमि कल्याण परिषद ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि पक्षकार दिनेश फलाहारी को सनातन रत्न से सम्मानित किया। परिषद ने संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य की संदिग्ध मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पदाधिकारियों ने कहा कि दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
ब्रजभूमि कल्याण परिषद ने बृहस्पतिवार को श्रीअन्नपूर्णा मंदिर में एक बैठक की। इसकी अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहारी लाल वशिष्ठ ने की। उन्होंने कहा कि दिनेश फलाहारी ब्रजभूमि में पीढ़ियों से रह रहे हैं और श्रीकृष्ण जन्मभूमि की लड़ाई लड़ रहे हैं। वशिष्ठ ने सोशल प्लेटफॉर्म पर फलाहारी को संत समाज से बहिष्कृत करने की बात को गलत बताया। उन्होंने कहा कि किसी एक का महिमामंडन और दूसरे की त्याग तपस्या की आलोचना उचित नहीं है। इस संबंध में 11 अक्तूबर को एक और बैठक कर गंभीर चिंतन किया जाएगा। ब्रज धर्माचार्य परिषद के अध्यक्ष हरि सुरेशाचार्य ने संत प्रेमानंद महाराज से कोई बैर न होने की बात कही। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनके कुछ अनुयायी ब्रजवासियों से दुर्व्यवहार कर रहे हैं, जिसे सहन नहीं किया जाएगा। सुरेशाचार्य ने स्वीकार किया कि प्रेमानंद ने भक्ति पथ पर एक आयाम स्थापित किया है। उन्होंने जोर दिया कि शिष्य की मौत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, चाहे वह आत्महत्या हो या हत्या।
खादर की जमीन और आगामी बैठक
हरि सुरेशाचार्य ने खादर की जमीन बेचने वालों की भी जांच की मांग की। उन्होंने बताया कि ब्रज के सभी संप्रदाय के आचार्यों को 11 सितंबर को बैठक में आमंत्रित किया गया है। दिनेश फलाहारी ने कहा कि उन्होंने सदैव संतों का सम्मान किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनके सनातनी कार्यों से नाखुश होकर कुचक्र रचते रहते हैं। इस अवसर पर अनिल कृष्ण शास्त्री, जय राम शर्मा और महंत राधा नंद गिरि, भगवान दास वशिष्ठ, बाबा सुखराम दास, कमल दास और रामदास, कृष्ण कृपाल देवाचार्य, महेशानंद गिरि और कृष्ण कौशिक उपस्थित रहे।
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ब्रजभूमि कल्याण परिषद ने बृहस्पतिवार को श्रीअन्नपूर्णा मंदिर में एक बैठक की। इसकी अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहारी लाल वशिष्ठ ने की। उन्होंने कहा कि दिनेश फलाहारी ब्रजभूमि में पीढ़ियों से रह रहे हैं और श्रीकृष्ण जन्मभूमि की लड़ाई लड़ रहे हैं। वशिष्ठ ने सोशल प्लेटफॉर्म पर फलाहारी को संत समाज से बहिष्कृत करने की बात को गलत बताया। उन्होंने कहा कि किसी एक का महिमामंडन और दूसरे की त्याग तपस्या की आलोचना उचित नहीं है। इस संबंध में 11 अक्तूबर को एक और बैठक कर गंभीर चिंतन किया जाएगा। ब्रज धर्माचार्य परिषद के अध्यक्ष हरि सुरेशाचार्य ने संत प्रेमानंद महाराज से कोई बैर न होने की बात कही। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनके कुछ अनुयायी ब्रजवासियों से दुर्व्यवहार कर रहे हैं, जिसे सहन नहीं किया जाएगा। सुरेशाचार्य ने स्वीकार किया कि प्रेमानंद ने भक्ति पथ पर एक आयाम स्थापित किया है। उन्होंने जोर दिया कि शिष्य की मौत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, चाहे वह आत्महत्या हो या हत्या।
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खादर की जमीन और आगामी बैठक
हरि सुरेशाचार्य ने खादर की जमीन बेचने वालों की भी जांच की मांग की। उन्होंने बताया कि ब्रज के सभी संप्रदाय के आचार्यों को 11 सितंबर को बैठक में आमंत्रित किया गया है। दिनेश फलाहारी ने कहा कि उन्होंने सदैव संतों का सम्मान किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनके सनातनी कार्यों से नाखुश होकर कुचक्र रचते रहते हैं। इस अवसर पर अनिल कृष्ण शास्त्री, जय राम शर्मा और महंत राधा नंद गिरि, भगवान दास वशिष्ठ, बाबा सुखराम दास, कमल दास और रामदास, कृष्ण कृपाल देवाचार्य, महेशानंद गिरि और कृष्ण कौशिक उपस्थित रहे।
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