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63 जोड़ों ने एक दूसरे का हाथ थामा, सात फेरे लिए
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कोकिलावन में सामूहिक विवाह समारोह में सजे दुल्हा-दुल्हन। संवाद
- फोटो : KOSI
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कोसीकलां। ब्रज प्रभात सेवा संस्थान एवं कोकिलावन धाम सेवासमिति के तत्वाधान में बृहस्पतिवार को कोकिलावन में 63 जोड़े की शादी कराई गई। सजे धजे मंडप में जोड़ों ने एक दूसरे का हाथ थामा।
दुल्हा-दुल्हन ने एक दूसरे को वरमाला पहनाकर वैवाहिक रीति रिवाज से सात फेरे लिए। सभी को घरेलू सामान दिया गया। इससे पहले चेयरमैन नरेंद्र कुमार, जीएलए के नीरज अग्रवाल, तरुण सेठ, रिंकू चौधरी, चौधरी हवा सिंह, रोहतास गोयल, नरदेव चौधरी, सीमा सेठ आदि ने वर वधू को आशीर्वाद दिया।
इस मौके पर मुख्य अतिथि कोकिलावन के श्रीमहंत प्रेमदास महाराज ने कहा कि वह व्यक्ति सौभाग्यशाली होता है जिसे कन्यादान करने का अवसर मिलता है। जीवन में सबसे बड़ा दान कन्यादान है। जब बेटी ही नहीं होगी तो कन्यादान किसका करोगे, लेकिन आज बेटी तो कोई चाहता नहीं है। कन्यादान करना सब चाहते हैं और बेटी के घर रहना व भोजन करना चाहते हैं।
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कुश्ती संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष कमल किशोर वार्ष्णेय ने कहा आज मनुष्य तो इससे बढ़कर कन्या की गर्भ में ही हत्या कर रहा है। इससे उसे नर्क में भी जगह नहीं मिलेगी। हमें बालिकाओं की पढ़ाई, लिखाई के साथ अच्छे संस्कार व शिक्षा देने की आवश्यकता है। कहैन्यालाल गोयल, पंकज भार्गव, पंकज बिशंभरिया, नितिन, बिहारीलाल, महेंद्र मंगला, पंकज, योगेश धानौतिया, सौरभ वार्ष्णेय, कैलाशचंद, महेश अग्रवाल, मनोज शर्मा आदि रहे।
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दुल्हा-दुल्हन ने एक दूसरे को वरमाला पहनाकर वैवाहिक रीति रिवाज से सात फेरे लिए। सभी को घरेलू सामान दिया गया। इससे पहले चेयरमैन नरेंद्र कुमार, जीएलए के नीरज अग्रवाल, तरुण सेठ, रिंकू चौधरी, चौधरी हवा सिंह, रोहतास गोयल, नरदेव चौधरी, सीमा सेठ आदि ने वर वधू को आशीर्वाद दिया।
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इस मौके पर मुख्य अतिथि कोकिलावन के श्रीमहंत प्रेमदास महाराज ने कहा कि वह व्यक्ति सौभाग्यशाली होता है जिसे कन्यादान करने का अवसर मिलता है। जीवन में सबसे बड़ा दान कन्यादान है। जब बेटी ही नहीं होगी तो कन्यादान किसका करोगे, लेकिन आज बेटी तो कोई चाहता नहीं है। कन्यादान करना सब चाहते हैं और बेटी के घर रहना व भोजन करना चाहते हैं।
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कुश्ती संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष कमल किशोर वार्ष्णेय ने कहा आज मनुष्य तो इससे बढ़कर कन्या की गर्भ में ही हत्या कर रहा है। इससे उसे नर्क में भी जगह नहीं मिलेगी। हमें बालिकाओं की पढ़ाई, लिखाई के साथ अच्छे संस्कार व शिक्षा देने की आवश्यकता है। कहैन्यालाल गोयल, पंकज भार्गव, पंकज बिशंभरिया, नितिन, बिहारीलाल, महेंद्र मंगला, पंकज, योगेश धानौतिया, सौरभ वार्ष्णेय, कैलाशचंद, महेश अग्रवाल, मनोज शर्मा आदि रहे।