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Mathura News: जेईई एडवांस्ड में सबल अग्रवाल और सौरव का रहा जलवा
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मथुरा। सबल अग्रवाल अपने मात-पिता और शिक्षकों के साथ।
- फोटो : mathura
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मथुरा। सोमवार को जारी हुए जेईई एडवांस्ड के परिणाम में भी मथुरा की मेधा ने अपना परचम लहराया। सबल अग्रवाल ने जहां 272वीं रैंक हासिल कर अपना और जिले का नाम रोशन किया तो वहीं सौरव चौधरी ने 343वीं रैंक हासिल कर मथुरा को गौरवान्वित किया। अन्य छात्रों ने भी जेईई एडवांस्ड में बेहतर प्रदर्शन किया।
शहर निवासी व्यापारी मनीष अग्रवाल और सपना अग्रवाल के बेटे सबल ने पहले ही प्रयास में यह सफलता हासिल की है। पिता मनीष बताते हैं कि बचपन से ही सबल का सपना इंजीनियर बनने का है। जेईई एडवांस्ड के परिणाम ने यह साबित कर दिया है कि उसका यह सपना अब पूरा होकर रहेगा। सबल ने 12वीं की परीक्षा में 91.8 प्रतिशत, जेईई मेंस में 801वीं रैंक हासिल की थी।
सबल ने बताया कि उसकी प्राथमिकता आईआईटी रुड़की या खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस या फिर आईआईटी मुंबई से इलेक्ट्रीकल्स में इंजीनियरिंग करना है। उन्होंने बताया कि इस सफलता में उनके माता-पिता और शिक्षकों को विशेष सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि अगर लक्ष्य बनाकर प्रयास किया जाए तो सफलता जरूरी मिलती है।
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वहीं 343वीं रैंक हासिल करने वाले सौरव शिक्षक दंपती के बेटे हैं। पिता हरीश चौधरी बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं तो वहीं मां सुनीता चौधरी माध्यमिक में शिक्षक हैं। वह मूल रूप से नौहझील क्षेत्र के गांव चांदपुर खुर्द और वर्तमान में शहर की केशव कुंज कॉलोनी निवासी हैं। सौरव ने भी पहले ही प्रयास में यह सफलता हासिल की है। उन्होंने जेईई मेंस में 12वीं रैंक हासिल करने के साथ ही 100 परसेंटाइल हासिल किया था। उन्होंने बताया कि दो साल की कड़ी मेहनत से उन्होंने यह सफलता पाई है। 12वीं की परीक्षा में उन्होंने 96.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और कोचिंग के शिक्षकों को देते हैं।
गोविंद गुप्ता की जेईई एडवांस्ड में 404वीं रैंक
वृंदावन निवासी आलोक कुमार गुप्ता और अर्चना गुप्ता के बेटे गोविंद गुप्ता ने दूसरे प्रयास में 404वीं रैंक हासिल की है। इससे पूर्व में जेईई मेंस में परसेंटाइल कम होने से रह गए थे। 2024 में गोविंद ने 12वीं की परीक्षा पास की थी, इसमें 98 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। उन्होंने बताया कि नियमित छह घंटे के अध्ययन से उन्होंने यह सफलता हासिल की। इसके लिए कोचिंग लेने के साथ ही ऑनलाइन क्लासेज का भी सहारा लिया। वह एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देना चाहते हैं।
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शहर निवासी व्यापारी मनीष अग्रवाल और सपना अग्रवाल के बेटे सबल ने पहले ही प्रयास में यह सफलता हासिल की है। पिता मनीष बताते हैं कि बचपन से ही सबल का सपना इंजीनियर बनने का है। जेईई एडवांस्ड के परिणाम ने यह साबित कर दिया है कि उसका यह सपना अब पूरा होकर रहेगा। सबल ने 12वीं की परीक्षा में 91.8 प्रतिशत, जेईई मेंस में 801वीं रैंक हासिल की थी।
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सबल ने बताया कि उसकी प्राथमिकता आईआईटी रुड़की या खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस या फिर आईआईटी मुंबई से इलेक्ट्रीकल्स में इंजीनियरिंग करना है। उन्होंने बताया कि इस सफलता में उनके माता-पिता और शिक्षकों को विशेष सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि अगर लक्ष्य बनाकर प्रयास किया जाए तो सफलता जरूरी मिलती है।
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वहीं 343वीं रैंक हासिल करने वाले सौरव शिक्षक दंपती के बेटे हैं। पिता हरीश चौधरी बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं तो वहीं मां सुनीता चौधरी माध्यमिक में शिक्षक हैं। वह मूल रूप से नौहझील क्षेत्र के गांव चांदपुर खुर्द और वर्तमान में शहर की केशव कुंज कॉलोनी निवासी हैं। सौरव ने भी पहले ही प्रयास में यह सफलता हासिल की है। उन्होंने जेईई मेंस में 12वीं रैंक हासिल करने के साथ ही 100 परसेंटाइल हासिल किया था। उन्होंने बताया कि दो साल की कड़ी मेहनत से उन्होंने यह सफलता पाई है। 12वीं की परीक्षा में उन्होंने 96.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और कोचिंग के शिक्षकों को देते हैं।
गोविंद गुप्ता की जेईई एडवांस्ड में 404वीं रैंक
वृंदावन निवासी आलोक कुमार गुप्ता और अर्चना गुप्ता के बेटे गोविंद गुप्ता ने दूसरे प्रयास में 404वीं रैंक हासिल की है। इससे पूर्व में जेईई मेंस में परसेंटाइल कम होने से रह गए थे। 2024 में गोविंद ने 12वीं की परीक्षा पास की थी, इसमें 98 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। उन्होंने बताया कि नियमित छह घंटे के अध्ययन से उन्होंने यह सफलता हासिल की। इसके लिए कोचिंग लेने के साथ ही ऑनलाइन क्लासेज का भी सहारा लिया। वह एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देना चाहते हैं।