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‘आज भी खून में उबाल ले आती हैं वो जंग’

Sun, 09 Aug 2015 11:26 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा Updated Sun, 09 Aug 2015 11:26 PM IST
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retired soilders were memorizing the Indo-pak war 1965
1965 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान पर फतेह करने वाले जवानों की भुजाऐं आज भी उन लम्हों को याद कर फड़क उठती हैं। रविवार को जब पूर्व सैनिकों ने स्ट्राइक वन कोर के स्वर्ण जयंती अवसर पर आयोजित रैली में अपने संस्मरण सुनाए तो हर खून उबाल लेने लगा। इस दौरान सैनिकों ने जीत के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के संग युद्ध क्षेत्र में बिताए पलों को भी याद किया।  
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पूर्व सैनिकों की रैली में पहुंचे थ्री जाट के कैप्टन नबाब सिंह ने बताया कि भारतीय सेना 1965 की लड़ाई में लाहौर से 11 किलोमीटर दूर डोगराई शहर तक पहुंच गई थी। उस दल में वे भी थे। 21 सितंबर 1965 को कर्नल ईडी हैड के नेतृत्व में लड़ी गई लड़ाई में हमारे 83 जवान शहीद और 238 जवान घायल हुए थे। उनकी रेजीमेंट के तीन जवानों को महावीर चक्र, पांच को वीर चक्र और 11 को सेना मेडल दिया गया।
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65 के युद्ध में शामिल रहे मोतीकुंज निवासी एसवीएस चौहान, मयूर विहार निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल दलीप सिंह, कैप्टन ब्रजलाल, ईशापुर यमुनापार निवासी रामजीलाल ने बताया डोगराई में सुबह चार बजे पाक सैनिकों ने 65 टैंकों संग भारतीय सेना पर हमला कर दिया था। भारत की ओर से मेजर वर्मा लड़ाई का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने आर्टिलरी फायर मांगा। आदेश मिलते ही हमारे जवानों ने पाक के सभी टैंक नष्ट कर दिए और इच्छोगिल कैनाल को पार कर डोगराई पहुंच गए। वहां से पाक के डिवीजनल कमांडर को बंधक बनाकर भारत ले आए। पूर्व सैनिकों ने बताया कि जीत के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जवानों के बीच डोगराई पहुंचे।
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उन्होंने वहां जवानों और अफसरों के साथ ही खाना खाया और जवानों के मग में ही चाय पी। संस्मरण सुनाते हुए कैप्टन नवाब ने कहा कि जीत के बाद शास्त्रीजी का पहला वाक्य था कि ‘जवानों के खून से जीती हुई एक इंच जमीन वापस नहीं करेंगे।’ लेकिन ताशकंद समझौते के बाद वह जमीन पाक को दे दी गई। अब पाक रहमत पर मिली जमीन से हमें आंख दिखा रहा है।



एक किमी दूर से भागे पाकिस्तानी विमान
कार्यक्रम में आए रिटायर्ड विंग कमांडर शशिशेखर शुक्ला ने बताया कि 1965 की लड़ाई में वे दिल्ली की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा में राडार ड्यूटी पर थे। सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली के आसपास मिसाइल तैनात की गई थीं। अचानक लोकेशन मिली कि पाकिस्तानी विमान आगरा की ओर मूव कर गए। इसके बाद उनका पीछा किया गया और यह देखकर एक किमी दूर से ही पाकिस्तानी मैदान छोड़कर भाग गए।
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