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Mathura News: रंगबिरंगी सांझियों से चमक उठी रसखान समाधि
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संवाद न्यूज एजेंसी
महावन। उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद, पर्यटन विभाग और जीएलए विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में रसखान समाधि स्थल पर मंगलवार से सांझी महोत्सव प्रारंभ हो गया। चित्रकारों ने पहले दिन रंग-बिरंगी अनेक सांझी बनाईं। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन संध्या हुई।
महोत्सव का शुभारंभ जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. अनूप गुप्ता, डिप्टी सीईओ जेपी पांडेय, जिला पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा, तकनीकी सलाहकार आरके जायसवाल ने संयुक्त रूप से किया। पहले दिन चित्रकार शशांक गोस्वामी, चित्रांग गोस्वामी, पुष्पांग गोस्वामी ने रंग-बिरंगी सूखे रंगों की सांझी तैयार की। यह अष्टकोण की वेदी पर तैयार की गईं है। यह देवालय सांझी है जो मंदिरों में बनाई जाती है। इसे साझी बनाया। खजानी इंस्टीट्यूट की सचिव शिप्रा राठी, रिंकी चौधरी के निर्देशन में छात्रा भावना दीक्षित, मुस्कान प्रजापति, यामिनी मिश्र, प्राची मिश्रा, गायत्री ने सूखे रंगों से कैनवास पर रासलीला का चित्रण किया। श्रीकृष्ण इंटर कालेज के कला शिक्षक अनिल सोनी ने सैंड कलर से रखखान का चित्रांकन किया। चित्रकार खुशबू उपाध्याय सोनी ने लड्डू गोपाल का चित्रण किया। ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डाॅ. उमेश चंद्र शर्मा, सहायक अभियंता आरपी सिंह यादव व दूधनाथ सिंह, गीता शोध संस्थान के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार मौजूद रहे।
गुजरात के तीर्थ यात्री गदगद
सांझी महोत्सव में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं और गुजरात के तीर्थ यात्रियों ने भ्रमण किया। सभी सांझी को निहारते नजर आए। ये तीर्थ यात्री रमणरेती में दर्शन करने आए थे। गुजरात के सौराष्ट्र से आए अवकाश प्राप्त शिक्षक भीखू मरजानी ने बताया कि अष्टछाप के मंदिरों में सांझी के चित्र बने हुए हैं। हमें यह देखकर प्रसन्नता हुई है कि कृष्ण भगवान के मंदिरों की परंपरा को जो कि चित्र परंपरा है, को ब्रज में जीवित रखने के लिए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद प्रयास कर रहा है।
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महावन। उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद, पर्यटन विभाग और जीएलए विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में रसखान समाधि स्थल पर मंगलवार से सांझी महोत्सव प्रारंभ हो गया। चित्रकारों ने पहले दिन रंग-बिरंगी अनेक सांझी बनाईं। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन संध्या हुई।
महोत्सव का शुभारंभ जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. अनूप गुप्ता, डिप्टी सीईओ जेपी पांडेय, जिला पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा, तकनीकी सलाहकार आरके जायसवाल ने संयुक्त रूप से किया। पहले दिन चित्रकार शशांक गोस्वामी, चित्रांग गोस्वामी, पुष्पांग गोस्वामी ने रंग-बिरंगी सूखे रंगों की सांझी तैयार की। यह अष्टकोण की वेदी पर तैयार की गईं है। यह देवालय सांझी है जो मंदिरों में बनाई जाती है। इसे साझी बनाया। खजानी इंस्टीट्यूट की सचिव शिप्रा राठी, रिंकी चौधरी के निर्देशन में छात्रा भावना दीक्षित, मुस्कान प्रजापति, यामिनी मिश्र, प्राची मिश्रा, गायत्री ने सूखे रंगों से कैनवास पर रासलीला का चित्रण किया। श्रीकृष्ण इंटर कालेज के कला शिक्षक अनिल सोनी ने सैंड कलर से रखखान का चित्रांकन किया। चित्रकार खुशबू उपाध्याय सोनी ने लड्डू गोपाल का चित्रण किया। ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डाॅ. उमेश चंद्र शर्मा, सहायक अभियंता आरपी सिंह यादव व दूधनाथ सिंह, गीता शोध संस्थान के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार मौजूद रहे।
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गुजरात के तीर्थ यात्री गदगद
सांझी महोत्सव में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं और गुजरात के तीर्थ यात्रियों ने भ्रमण किया। सभी सांझी को निहारते नजर आए। ये तीर्थ यात्री रमणरेती में दर्शन करने आए थे। गुजरात के सौराष्ट्र से आए अवकाश प्राप्त शिक्षक भीखू मरजानी ने बताया कि अष्टछाप के मंदिरों में सांझी के चित्र बने हुए हैं। हमें यह देखकर प्रसन्नता हुई है कि कृष्ण भगवान के मंदिरों की परंपरा को जो कि चित्र परंपरा है, को ब्रज में जीवित रखने के लिए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद प्रयास कर रहा है।
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