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Mathura News: मथुरा मंडी में बारिश से भीगा धान
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कृषि उत्पादन मंडी में बारिश से भीगे अपने धान के दानों को देखता किसान।
मथुरा। बृहस्पतिवार को हुई बारिश ने नवीन कृषि एवं फल-सब्जी मंडी में धान लेकर पहुंचे किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मंडी में बिक्री के लिए लाया गया धान भीगने से उसमें नमी बढ़ गई है। इसके चलते व्यापारी धान खरीदने से कतरा रहे हैं और दाम 900 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं।
बारिश से पहले मंडी में धान 3500 से 4200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था। अब इसके दाम घटकर 3200 से 3300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंडी में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2441 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। मंडी में धान की आवक लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025 में कुल 6 लाख 20 हजार क्विंटल धान आया था। इस बार अब तक 7 लाख 13 हजार क्विंटल धान की आवक हो चुकी है। मथुरा के अलावा अलीगढ़, एटा और मैनपुरी के किसान भी यहां धान बेचने पहुंच रहे हैं। बारिश के बाद किसानों के सामने उपज को सुरक्षित रखने और उचित दाम पर बेचने की चुनौती खड़ी हो गई है।
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किसानों की बढ़ी चिंता
जलेसर के किसान पुष्पेंद्र ने बताया कि बारिश में धान भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई है। व्यापारी अब पहले के मुकाबले कम दाम लगा रहे हैं। इससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। दौलतपुर फरह के किसान किशन सिंह ने कहा कि वे धान बेचने के लिए मंडी आए थे, लेकिन बारिश ने परेशानी बढ़ा दी है। कई व्यापारी भीगा धान खरीदने से मना कर रहे हैं, जिससे मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचनी पड़ सकती है।
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मंडी में खरीद पर असर
नवीन कृषि एवं फल-सब्जी मंडी में कई व्यापारी अधिक भीगा धान खरीदने से साफ इन्कार कर रहे हैं। धान में नमी बढ़ने से उसकी गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ा है। किसानों को अपनी उपज को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं। उचित दाम न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
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बारिश से पहले मंडी में धान 3500 से 4200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था। अब इसके दाम घटकर 3200 से 3300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंडी में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2441 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। मंडी में धान की आवक लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025 में कुल 6 लाख 20 हजार क्विंटल धान आया था। इस बार अब तक 7 लाख 13 हजार क्विंटल धान की आवक हो चुकी है। मथुरा के अलावा अलीगढ़, एटा और मैनपुरी के किसान भी यहां धान बेचने पहुंच रहे हैं। बारिश के बाद किसानों के सामने उपज को सुरक्षित रखने और उचित दाम पर बेचने की चुनौती खड़ी हो गई है।
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किसानों की बढ़ी चिंता
जलेसर के किसान पुष्पेंद्र ने बताया कि बारिश में धान भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई है। व्यापारी अब पहले के मुकाबले कम दाम लगा रहे हैं। इससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। दौलतपुर फरह के किसान किशन सिंह ने कहा कि वे धान बेचने के लिए मंडी आए थे, लेकिन बारिश ने परेशानी बढ़ा दी है। कई व्यापारी भीगा धान खरीदने से मना कर रहे हैं, जिससे मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचनी पड़ सकती है।
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मंडी में खरीद पर असर
नवीन कृषि एवं फल-सब्जी मंडी में कई व्यापारी अधिक भीगा धान खरीदने से साफ इन्कार कर रहे हैं। धान में नमी बढ़ने से उसकी गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ा है। किसानों को अपनी उपज को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं। उचित दाम न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।