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राधिका बल्लभ का श्वते श्रृंगार
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 27 Mar 2015 11:32 PM IST
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जुगल घाट स्थित यमुना तट पर श्रीहित हरिवंश महाप्रभु नगर में चल रहे संत किशोरीशरण अलि महाराज के जन्म शताब्दी समारोह में शुक्रवार को विविध धार्मिक कार्यक्रम हुए। अष्टयाम सेवा सत्र में सांध्य विलास दर्शन में शरद ऋतु कालीन सेवान्तर्गत सांझी और रासोत्सव का आयोजन किया गया।
रस भारती संस्थान की ओर से आयोजन के अष्टयाम सेवा सत्र में यमुना पुलिन तट पर विराजे ठाकुर राधिकावल्लभ लाल महाराज को शरद ऋतु के अंतर्गत श्वेत पोशाक, मुकुट, माला और ठाकुरजी के पूर्णरूपेण श्वेत शृंगार किया गया। श्रीजी को चमकदार सितार के किनारों की श्वेत साड़ी और श्वेत आभूषण धारण कराए गए। श्रीजी की साड़ी में लगी किनारी में सितारे ऐसे लग रहे थे कि मानो असंख्य चंद्रमा अपनी सेवा श्रीजी के चरणों में अर्पित कर रहे हैं।
शरद ऋतु के अंतर्गत ठाकुर जी का विशेष तौर पर केसर और मेवायुक्त खीर का भोग लगाया गया। ब्रज के रसिक संतों ने वन की लीला लालहिं भावै..., फलनि बीननि हौं गई जहां..., जमुना-फूल द्रुमनि की भीर... आदि पद गाए।
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महंत लाडिलीशरण, श्रीहित कमलदास, श्रीहित जसअलिशरण, महंत गौरांगीशरण दास, महंत गोवर्धन दास, महंत हितशरण, दानबिहारी खण्डेलवाल, राकेश मुखिया, हरिवंश खंडेलवाल, हितेश खंडेलवाल, प्रमेश खंडेलवाल आदि उपस्थित रहे।
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रस भारती संस्थान की ओर से आयोजन के अष्टयाम सेवा सत्र में यमुना पुलिन तट पर विराजे ठाकुर राधिकावल्लभ लाल महाराज को शरद ऋतु के अंतर्गत श्वेत पोशाक, मुकुट, माला और ठाकुरजी के पूर्णरूपेण श्वेत शृंगार किया गया। श्रीजी को चमकदार सितार के किनारों की श्वेत साड़ी और श्वेत आभूषण धारण कराए गए। श्रीजी की साड़ी में लगी किनारी में सितारे ऐसे लग रहे थे कि मानो असंख्य चंद्रमा अपनी सेवा श्रीजी के चरणों में अर्पित कर रहे हैं।
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शरद ऋतु के अंतर्गत ठाकुर जी का विशेष तौर पर केसर और मेवायुक्त खीर का भोग लगाया गया। ब्रज के रसिक संतों ने वन की लीला लालहिं भावै..., फलनि बीननि हौं गई जहां..., जमुना-फूल द्रुमनि की भीर... आदि पद गाए।
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महंत लाडिलीशरण, श्रीहित कमलदास, श्रीहित जसअलिशरण, महंत गौरांगीशरण दास, महंत गोवर्धन दास, महंत हितशरण, दानबिहारी खण्डेलवाल, राकेश मुखिया, हरिवंश खंडेलवाल, हितेश खंडेलवाल, प्रमेश खंडेलवाल आदि उपस्थित रहे।