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‘भारत पर राज करने के लिए चाहिए मां जैसा दिल’

Wed, 04 Nov 2015 07:39 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा Updated Wed, 04 Nov 2015 07:39 PM IST
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PV rajgopal about intolerance in india
जल, जंगल और जमीन आंदोलन के नायक पीवी राजगोपाल ने देश भर में बहस का मुद्दा बनी असहिष्णुता पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि बहुभाषी, विभिन्न संस्कृतियों को समेटे भारत पर वही राज कर सकता है जो अपने सीने में एक मां के जैसा दिल रखता हो। उन्होंने पुरस्कार लौटाने वाले साहित्यकारों का तिरस्कार करने के बजाय उनकी तकलीफ को समझने की राय दी। 
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राजगोपाल कृष्ण नगर स्थित अग्रवाल धर्मशाला में ग्लोबल नैतिक शिक्षा केंद्र द्वारा आयोजित पर्यावरण और युवा पीढ़ी विषयक संगोष्ठी में शामिल होने आए थे। यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जो साहित्यकार, कवि अपना सम्मान लौटा रहे हैं, उनको बुलाकर उनकी तकलीफ समझनी चाहिए।
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उन्होंने कई ऐसे देशों का उदाहरण दिया जो केवल दो भाषी होने के चलते ही विखंडित हो गए। भारत में कई भाषा, धर्म, संस्कृति होने के बाद भी देश की एकता को अनूठा बताया। उन्होंने कहा कि इस देश पर राज करने वाले का दिल मां के दिल जैसा होना चाहिए। मां अपने सभी बच्चों से समान प्रेम करती है और उनकी उन्नति के लिए प्रयासरत रहती है।
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एक सवाल के जवाब में पीवी राजगोपाल ने कहा प्रधानमंत्री को राज्य विशेष के चुनाव में हार जीत की चिंता छोड़कर पूरे देश के बारे में समानता से सोचना चाहिए। उनके आंदोलन के बाद भूमि अधिग्रहण कानून में जो संशोधन हुए उन्हें फिर से हटाया जा रहा है। ऐसे में आंदोलन ही एक मात्र रास्ता है। भारत एक कृषि प्रधान देश है उसका विकास मॉडल स्मार्ट सिटी, एक्सप्रेसवे नहीं हो सकते। इस अवसर पर उनके साथ स्वामी नारायण दास भी थे।
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