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पीएसएलवी प्रक्षेपण करने वाली टीम में ब्रज का लाल भी
अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 14 Feb 2017 10:55 PM IST
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पूरन सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) एक साथ 104 पोलर सेटेलाइट लॉच व्हीकल (पीएसएलवी) का सफल प्रक्षेपण कर विश्व में इतिहास रचने की ओर अग्रसर है। देश की इस ऐतिहासिक उपलब्धि में मथुरा का एक लाल भी अहम भूमिका निभा रहा है।
जिले की महावन तहसील के गांव शाहपुर निवासी पूरन सिंह इसरो में वैज्ञानिक हैं। अमर उजाला से फोन पर वार्ता में पूरन सिंह ने बताया कि इसरो में उनके बीते डेढ़ माह के कार्यकाल में ही उनके समक्ष यह गौरवमयी क्षण आ गया है।
पहली बार 104 पीएसएलवी को प्रक्षेपित करने की तैयारी में जुटी 200 वैज्ञानिकों की टीम में वह भी हैं। बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान एक साथ 104 सैटेलाइट प्रक्षेपित करने जा रहा है। पूरे विश्व में यह रिकार्ड है। अब तक सबसे ज्यादा 37 प्रक्षेपास्त्र केवल रूस ने ही एक साथ प्रक्षेपित किए हैं।
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कभी टेंट हाउस में किया काम, आज बने ब्रज की शान
1992 में मथुरा की महावन तहसील के गांव शाहपुर में लोकेंद्र सिंह के घर जन्मे पूरन गुदड़ी के लाल हैं। एक समय वो भी जब घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण उन्होंने मथुरा के टेंट हाउस में भी काम करके गुजारा किया। लेकिन उनकी लगन और आगे बढ़ने का जुनून ही था कि कभी परिस्थितियों से हार नहीं मानी। पूरन ने वर्ष 2007 में मथुरा के क्लैंसी इंटर कालेज से 72 प्रतिशत अंकों के साथ हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की।
लैंप की रोशनी में पढ़ने वाले पूरन ने 2008 में यूपी जेईईसी की प्रवेश परीक्षा पास कर कैमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश लिया। गवर्नमेंट पालीटेक्निक कानपुर से 2011 में कैमिकल इंजीनियरिंग ब्रांच टॉप कर उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। इसके बाद दो वर्ष तक गुजरात के भरूच में एस्सार ऑयल में नौकरी भी की। 2014 में उनका चयन विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर तिरुवनंतपुरम केरल में टेक्निकल सहायक के रूप में हुआ। विभागीय अनुमति के बाद कोलकता के इंजीनियरिंग संस्थान से 2015 में उन्होंने आईईआई परीक्षा उत्तीर्ण की। इंजीनियरिंग स्नातक के बाद जनवरी 2017 में वे इसरो में वैज्ञानिक के पद पर चयनित हुए।
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जिले की महावन तहसील के गांव शाहपुर निवासी पूरन सिंह इसरो में वैज्ञानिक हैं। अमर उजाला से फोन पर वार्ता में पूरन सिंह ने बताया कि इसरो में उनके बीते डेढ़ माह के कार्यकाल में ही उनके समक्ष यह गौरवमयी क्षण आ गया है।
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पहली बार 104 पीएसएलवी को प्रक्षेपित करने की तैयारी में जुटी 200 वैज्ञानिकों की टीम में वह भी हैं। बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान एक साथ 104 सैटेलाइट प्रक्षेपित करने जा रहा है। पूरे विश्व में यह रिकार्ड है। अब तक सबसे ज्यादा 37 प्रक्षेपास्त्र केवल रूस ने ही एक साथ प्रक्षेपित किए हैं।
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कभी टेंट हाउस में किया काम, आज बने ब्रज की शान
1992 में मथुरा की महावन तहसील के गांव शाहपुर में लोकेंद्र सिंह के घर जन्मे पूरन गुदड़ी के लाल हैं। एक समय वो भी जब घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण उन्होंने मथुरा के टेंट हाउस में भी काम करके गुजारा किया। लेकिन उनकी लगन और आगे बढ़ने का जुनून ही था कि कभी परिस्थितियों से हार नहीं मानी। पूरन ने वर्ष 2007 में मथुरा के क्लैंसी इंटर कालेज से 72 प्रतिशत अंकों के साथ हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की।
लैंप की रोशनी में पढ़ने वाले पूरन ने 2008 में यूपी जेईईसी की प्रवेश परीक्षा पास कर कैमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश लिया। गवर्नमेंट पालीटेक्निक कानपुर से 2011 में कैमिकल इंजीनियरिंग ब्रांच टॉप कर उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। इसके बाद दो वर्ष तक गुजरात के भरूच में एस्सार ऑयल में नौकरी भी की। 2014 में उनका चयन विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर तिरुवनंतपुरम केरल में टेक्निकल सहायक के रूप में हुआ। विभागीय अनुमति के बाद कोलकता के इंजीनियरिंग संस्थान से 2015 में उन्होंने आईईआई परीक्षा उत्तीर्ण की। इंजीनियरिंग स्नातक के बाद जनवरी 2017 में वे इसरो में वैज्ञानिक के पद पर चयनित हुए।