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सात्विक वीणा के स्वरों से झंकृत हुआ जीएलए
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 24 Feb 2016 11:44 PM IST
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छात्रों के व्यक्तित्व विकास, भारतीय सभ्यता और संस्कृति से इन्हें जोड़े रखने के लिए जीएलए विश्वविद्यालय में संचालित निनाद ग्रुप ने अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों को आमंत्रित कर ‘सात्विक वीणा वादन’ और कालबेलिया नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें सात्विक वीणा के आविष्कारक पंडित सलिल भट्ट ने वीणा वादन किया और ‘कोटला खान समूह’ ने नृत्य की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ जीएलए विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. प्रदीप मिश्रा, शिक्षा संकाय की प्राचार्य डा. जया द्विवेदी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कर्नल वाईपी लूंबा और डा. विवेक मेहरोत्रा ने मां सरस्वती और गणेशीलाल अग्रवाल के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया था। इसके बाद विवेक मेहरोत्रा ने सलिल भट्ट का परिचय कराते हुए बताया कि वह पद्मश्री पंडित विश्वमोहन भट्ट के पुत्र हैं।
सलिल भट्ट पहले ऐसे संगीतकार है, जिन्हें ताइवान सरकार ने संगीत कला में वृद्धि के लिए आमंत्रित कर सम्मानित किया। जर्मनी कीसंसद में प्रस्तुति देने वाले वे पहले भारतीय संगीतकार हैं।
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कार्यक्रम के अंतर्गत रागदेस, अहीर भैरव, हेलू और राजस्थानी लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोहा। राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत कोटला खान ने करताल बजाकर और उनके समूह ने कालबेलिया नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के निदेशक प्रो. प्रदीप मिश्रा ने विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक कार्यक्रम कमेटी ‘निनाद’ का आभार प्रकट किया।
उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि ‘ग्रैमी अवार्ड’ से नवाजे गए सलिल भट्ट की वीणा को सुनने का अवसर मिला। उन्होंने छात्रों को विभिन्न रागों की बारीकियों से अवगत भी कराया। संचालन छात्रा तनुश्री मंडल ने किया। इस अवसर पर डा. विजय द्विवेदी, डा. पूजा पाठक, रिचा दुबे, अनुजा मिश्रा, प्रीति गुप्ता, राम बसंत और छात्र उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ जीएलए विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. प्रदीप मिश्रा, शिक्षा संकाय की प्राचार्य डा. जया द्विवेदी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कर्नल वाईपी लूंबा और डा. विवेक मेहरोत्रा ने मां सरस्वती और गणेशीलाल अग्रवाल के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया था। इसके बाद विवेक मेहरोत्रा ने सलिल भट्ट का परिचय कराते हुए बताया कि वह पद्मश्री पंडित विश्वमोहन भट्ट के पुत्र हैं।
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सलिल भट्ट पहले ऐसे संगीतकार है, जिन्हें ताइवान सरकार ने संगीत कला में वृद्धि के लिए आमंत्रित कर सम्मानित किया। जर्मनी कीसंसद में प्रस्तुति देने वाले वे पहले भारतीय संगीतकार हैं।
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कार्यक्रम के अंतर्गत रागदेस, अहीर भैरव, हेलू और राजस्थानी लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोहा। राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत कोटला खान ने करताल बजाकर और उनके समूह ने कालबेलिया नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के निदेशक प्रो. प्रदीप मिश्रा ने विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक कार्यक्रम कमेटी ‘निनाद’ का आभार प्रकट किया।
उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि ‘ग्रैमी अवार्ड’ से नवाजे गए सलिल भट्ट की वीणा को सुनने का अवसर मिला। उन्होंने छात्रों को विभिन्न रागों की बारीकियों से अवगत भी कराया। संचालन छात्रा तनुश्री मंडल ने किया। इस अवसर पर डा. विजय द्विवेदी, डा. पूजा पाठक, रिचा दुबे, अनुजा मिश्रा, प्रीति गुप्ता, राम बसंत और छात्र उपस्थित रहे।