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बंदी ने चम्मच से गला काटकर आत्महत्या का प्रयास किया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 06 Apr 2022 08:12 PM IST
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Prisoner attempted suicide by slitting his throat with a spoon
मथुरा। जेल में पॉक्सो और जानलेवा हमले के आरोप में निरुद्ध बंदी ने खाने के लिए मिलने वाली चम्मच को हथियार बना हाथ और गले की नस काट लीं। जेल के बाथरूम में वह लहूलुहान हालत में पड़ा मिला। जेल प्रशासन ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। घटना को लेकर जेल में अफरातफरी का माहौल रहा।
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बुधवार की सुबह जेल के सफाई कर्मचारी बाथरूम की सफाई करने पहुंचे तो उन्हें बाथरूम में जितेंद्र उर्फ जीतू पुत्र प्रभाती निवासी इंद्रपुरी अमर कॉलोनी थाना हाईवे लहूलुहान हालत में पड़ा मिला। जेल के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। बंदी के हाथ और गले से खून बह रहा था।
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आनन-फानन घायल जीतू को जिला अस्पताल भेजा गया। जेल में खाने के लिए मिलने वाली चम्मच को घिसकर बनाई गई कट्टन घायल जीतू के पास पड़ी मिली। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि जीतू ने चम्मच से बनाई कट्टन (धारदार) से अपने हाथ और गले पर वार कर खुद को घायल किया है। उसकी हालत खतरे से बाहर है।
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जेल में राइटर का काम करता है बंदी
जिस बंदी ने जेल के बाथरूम में जाकर सुबह कट्टन से अपने शरीर पर प्रहार किए हैं, वह बंदी जेल में राइटर का काम करता है। जेल की गुड बुक में उसका नाम है। उसके अच्छे व्यवहार के कारण जेल के अधिकारी उस पर विश्वास भी करते थे। यही कारण रहा कि सुरक्षाकर्मियों की निगरानी कम हो गई थी। उसी का फायदा उठाकर पहले चम्मच चोरी की, फिर पत्थर से घिसकर धारदार बनाया और खुद को खत्म करने का प्रयास किया।
खुद को निर्दोष बताया
बुधवार की सुबह बंदियों की गिनती के बाद अचानक वह बाथरूम में चला गया। घटना के बाद जेल के अधिकारी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि उसने ऐसा क्यों किया। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि जीतू ने मंगलवार को परिजन से फोन पर अपनी जमानत के लिए बातचीत की थी। बताया था कि जेल में वह बहुत खुश है। परिवार वालों ने जब यह कहा कि जिन लोगों ने मुकदमा दर्ज कराया है, उनसे समझौता के लिए भी बात करेंगे, इस पर बंदी ने मना कर दिया था और कहा था कि जब हमने कुछ किया ही नहीं तो समझौता किस बात का।
वर्ष 2019 में आया था जेल
हाईवे थाने की पुलिस ने जीतू को जानलेवा हमले और पॉक्सो एक्ट के मुकदमे में 16 जनवरी 2019 को जेल में भेजा था। जिस समय वह जेल में दाखिल किया गया था, उसकी उम्र 18 वर्ष से कम थी। तब उसे जेल की किशोर बैरक में रखा गया था। 18 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद उसे वयस्क बैरक में शिफ्ट किया गया।

सुरक्षा में लापरवाही हुई
जेल में प्रत्येक बंदी की निगरानी २४ घंटे होती है लेकिन जीतू के व्यवहार के कारण वह अधिकारियों से लेकर सुरक्षा कर्मचारियों की नजर में अच्छा बन गया। अच्छे व्यवहार के कारण ही २४ घंटे की निगरानी खत्म कर दी गई है। सीसीटीवी कैमरों से भी उसकी किसी हरकत को पकड़ा नहीं जा सका।
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