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Mathura News: प्राचार्य पर वित्तीय अनियमितता के आरोप

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 01 Dec 2025 01:39 AM IST
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Principal accused of financial irregularities
पत्रकारों से वार्ता करते पदा​धिकारी। 
मथुरा। शहर के 70 वर्ष पुराने बीएसए कॉलेज में फिर विवाद शुरू हो गया है। कॉलेज के प्रबंध तंत्र ने प्राचार्य ललित मोहन शर्मा पर एकाधिकार स्थापित करने और वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि प्राचार्य ने कॉलेज के खाते से दो करोड़ रुपये एक बैंक से निकालकर दूसरी बैंक में स्थानांतरित कर दिए हैं। इसकी जानकारी समय पर प्रबंधन व संबंधित पक्षों को नहीं दी गई।
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कॉलेज वर्ष 2017 से एकल संचालन की स्थिति में चल रहा है। इसी अवधि में फर्जीवाड़े और प्रक्रियागत गलतियों को लेकर विश्वविद्यालय ने कॉलेज का अनुमोदन भी निरस्त किया था। इसके बाद से संस्थान लगातार विवादों में घिरा हुआ है। श्री अग्रवाल शिक्षा मंडल के सचिव धीरेंद्र अग्रवाल ने कहा है कि डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने उनकी संस्था श्री अग्रवाल शिक्षा मंडल को अनुमोदन दिया है। इसके साथ ही कॉलेज प्राचार्य को सिर्फ एकेडमिक अधिकार हैं, लेकिन वे प्रबंध तंत्र के कार्यों में दखल दे रहे हैं। प्राचार्य द्वारा वित्तीय निर्णय एकतरफा तरीके से लिए जा रहे हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं कॉलेज प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर 14.5 एकड़ भूमि को खुर्द-बुर्द करने और कॉलेज परिसर की 26 दुकानों पर कब्जे का आरोप लगाया गया है।
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बीएसए कॉलेज की 14.5 एकड़ भूमि पर फर्जी पत्र से कब्जे का आरोप



मथुरा। बीएसए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ललित मोहन शर्मा ने प्रबंत्र तंत्र पर आरोप लगाए हैं कि कॉलेज की 14.5 एकड़ भूमि को अवैध रूप से अलग कर इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम पर उपयोग किया है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी दो आधिकारिक पत्रों से इस मामले का खुलासा हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस सरकारी पत्र (28.10.1999) का हवाला देकर भूमि अलग की गई थी। वह पत्र विभाग से जारी ही नहीं हुआ था। संयुक्त निदेशक से मिली आरटीआई के जवाब में इसे फर्जी बताया है। वास्तविक पत्रों के अनुसार बीएसए कॉलेज को केवल फैकल्टी के रूप में इंजीनियरिंग कॉलेज चलाने की अनुमति थी। भूमि अलग करने या स्वतंत्र संस्थान बनाने की कोई अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद फर्जी पत्र दिखाकर जमीन को अलग परिसर के रूप में दर्ज कराया गया और इंजीनियरिंग कॉलेज को स्वतंत्र इकाई की तरह संचालित किया गया। उन्होंने शासन से एसआईटी/एसटीएफ जांच के लिए भूमि की पुनर्स्थापना और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
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