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भगवान श्रीराधागोपीनाथ का हुआ महाभिषेक
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श्रीराधागोपी नाथ मंदिर में ठाकुर जी का किया गया अभिषेक
- फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन (मथुरा)। माघ शुक्ल पूर्णिमा को भगवान श्रीराधागोपीनाथ मंदिर का प्राकट्य महोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दौरान विभिन्न विभिन्न धार्मिक आयोजन किए गए।
रविवार को प्राकट्य महोत्सव के उपलक्ष्य में भगवान राधागोपीनाथ का पंचामृत दूध, दही, घृत, शहद और शक्कर से मंत्रोच्चारण के मध्य महाभिषेक किया गया। इसके पश्चात ठाकुर जी का विशेष शृंगार हुआ। ठाकुर जी को नवीन पोशाक धारण कराई गई। महाभिषेक के बाद विशेष शृंगार में ठाकुर जी की छवि देखते ही बन रही थी। इस दौरान भक्तों ने ठाकुरजी की जयजयकार की।
तदोपरांत मंदिर में समाज गायन और हरिनाम संकीर्तन किया हुआ। इसके बाद साधु और वैष्णव सेवा हुई। शाम के वक्त मंदिर परिसर स्थित मधु पंडित जी की समाधि पर पुष्पार्चन किया गया।
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मंदिर के सेवायत राजा गोस्वामी ने बताया भगवान राधागोपीनाथ का प्राकट्य लगभग 1536 ईसवीं में माघ शुक्ल पूर्णिमा तिथि को हुआ था। परंपरागत यह आयोजन रविवार को भक्तिभाव के साथ मनाया गया।
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रविवार को प्राकट्य महोत्सव के उपलक्ष्य में भगवान राधागोपीनाथ का पंचामृत दूध, दही, घृत, शहद और शक्कर से मंत्रोच्चारण के मध्य महाभिषेक किया गया। इसके पश्चात ठाकुर जी का विशेष शृंगार हुआ। ठाकुर जी को नवीन पोशाक धारण कराई गई। महाभिषेक के बाद विशेष शृंगार में ठाकुर जी की छवि देखते ही बन रही थी। इस दौरान भक्तों ने ठाकुरजी की जयजयकार की।
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तदोपरांत मंदिर में समाज गायन और हरिनाम संकीर्तन किया हुआ। इसके बाद साधु और वैष्णव सेवा हुई। शाम के वक्त मंदिर परिसर स्थित मधु पंडित जी की समाधि पर पुष्पार्चन किया गया।
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मंदिर के सेवायत राजा गोस्वामी ने बताया भगवान राधागोपीनाथ का प्राकट्य लगभग 1536 ईसवीं में माघ शुक्ल पूर्णिमा तिथि को हुआ था। परंपरागत यह आयोजन रविवार को भक्तिभाव के साथ मनाया गया।