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ब्रज कमेटी ने डुबोई जिला भाजपा नैया
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Thu, 05 Nov 2015 08:04 PM IST
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जिला पंचायत के चुनाव में जिला भाजपा को ब्रज क्षेत्र कमेटी ने ही झटका दिया है। जिलास्तर से प्रस्तावित उम्मीदवारों की सूची से जो नाम आगरा में बदले गए, उनमें से एक को छोड़ सभी चारों खाने चित हो गए हैं।
दो दशक बाद भाजपा जिला पंचायत के चुनाव मैदान में उतरी। इस लंबे अंतराल के बाद भाजपा को जिला पंचायत की 38 में से सिर्फ आठ सीटों पर कामयाबी मिली है। 1995 के चुनाव में भाजपा ने 12 वार्डाें में जीत हासिल की थी। उस वक्त जिला पंचायत में 29 वार्ड हुआ करते थे।
सांसद हेमामालिनी के प्रचार के बाद इस कामयाबी पर भी जिला इकाई संतोष व्यक्त कर रही है। फिर भी स्थानीय नेता दबी जुबान से कह रहे हैं कि जिले में पार्टी की इस स्थिति के लिए ब्रजक्षेत्र पदाधिकारी जिम्मेदार हैं। चुनाव से पहले जिन उम्मीदवारों की सूची जिला इकाई ने आगरा ब्रज क्षेत्र कमेटी को प्रस्तावित की थी, उसमें से नौ उम्मीदवार बदल दिए गए।
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इसमें ये अब सिर्फ वार्ड 18 की उम्मीदवार को ही कामयाबी मिली, बाकी हार गए हैं। इसमें भी वार्ड 10 की उम्मीदवारी को लेकर जमकर खींचातानी हुई थी। जिला इकाई ही दो हिस्सों में बंट गई थीं। छाता विधानसभा क्षेत्र के पदाधिकारियों ने खुलेआम विद्रोह कर दिया था। अब आए नतीजों ने सभी को अपनी जमीन दिखा दी है।
यही नहीं, भाजपा के उन दिग्गज नेताओं के क्षेत्रों में भी पार्टी उम्मीदवारों को करारी हार मिली है, जो सांसद और विधायक के लिए उम्मीदवारी तो करते हैं, लेकिन क्षेत्रीय जनता में उनकी पकड़ कतई नहीं है। पार्टी के कार्यकर्ता ऐसे नेताओं को अब नाम बड़े और दर्शन छोटे के रूप में देख रहे हैं।
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दो दशक बाद भाजपा जिला पंचायत के चुनाव मैदान में उतरी। इस लंबे अंतराल के बाद भाजपा को जिला पंचायत की 38 में से सिर्फ आठ सीटों पर कामयाबी मिली है। 1995 के चुनाव में भाजपा ने 12 वार्डाें में जीत हासिल की थी। उस वक्त जिला पंचायत में 29 वार्ड हुआ करते थे।
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सांसद हेमामालिनी के प्रचार के बाद इस कामयाबी पर भी जिला इकाई संतोष व्यक्त कर रही है। फिर भी स्थानीय नेता दबी जुबान से कह रहे हैं कि जिले में पार्टी की इस स्थिति के लिए ब्रजक्षेत्र पदाधिकारी जिम्मेदार हैं। चुनाव से पहले जिन उम्मीदवारों की सूची जिला इकाई ने आगरा ब्रज क्षेत्र कमेटी को प्रस्तावित की थी, उसमें से नौ उम्मीदवार बदल दिए गए।
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इसमें ये अब सिर्फ वार्ड 18 की उम्मीदवार को ही कामयाबी मिली, बाकी हार गए हैं। इसमें भी वार्ड 10 की उम्मीदवारी को लेकर जमकर खींचातानी हुई थी। जिला इकाई ही दो हिस्सों में बंट गई थीं। छाता विधानसभा क्षेत्र के पदाधिकारियों ने खुलेआम विद्रोह कर दिया था। अब आए नतीजों ने सभी को अपनी जमीन दिखा दी है।
यही नहीं, भाजपा के उन दिग्गज नेताओं के क्षेत्रों में भी पार्टी उम्मीदवारों को करारी हार मिली है, जो सांसद और विधायक के लिए उम्मीदवारी तो करते हैं, लेकिन क्षेत्रीय जनता में उनकी पकड़ कतई नहीं है। पार्टी के कार्यकर्ता ऐसे नेताओं को अब नाम बड़े और दर्शन छोटे के रूप में देख रहे हैं।