{"_id":"682e216e5e80644b8b016864","slug":"people-suffering-from-water-crisis-in-scorching-heat-mathura-news-c-369-1-mt11010-129929-2025-05-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: भीषण गर्मी में जल संकट से त्रस्त लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: भीषण गर्मी में जल संकट से त्रस्त लोग
विज्ञापन
वृंदावन। इन दिनों लोग गर्मी में जल संकट से जूझ रहे हैं। तापमान में लगातार वृद्धि और भूजल स्तर में गिरावट ने हालात गंभीर बना दिए हैं। शहर के कई इलाकों में नलों से पानी नहीं आ रहा है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कामकाज के लिए भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
वार्ड 70 के लाखा पाड़ा और वार्ड 21 के चैतन्य विहार में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। लाखा पाड़ा और चैतन्य विहार के लोग कई दिनों पानी की तलाश में भटक रहे हैं। स्थानीय निवासी धनंजय बताते हैं कि सुबह उठते ही सबसे पहले पानी की चिंता होती है। नलों में पानी आता भी है तो सिर्फ कुछ मिनट के लिए और दबाव इतना कम होता है कि बाल्टी भरने में घंटों लग जाते हैं।
चैतन्य विहार निवासी नीरज मिश्रा कहते हैं कि नगर निगम बनने के बाद टैक्स तो कई गुना बढ़ गया लेकिन पानी जैसी बुनियादी सुविधा तक नहीं मिल रही। शहर में लगे कई सरकारी हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं। जल संकट के चलते लोग निजी टैंकरों से महंगे दामों पर पानी खरीदने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
यमुना परियोजना पर उठे सवाल
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना रिवरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत यमुना में की गई शीट पाइलिंग ने भूजल रिचार्ज की प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। इसके साथ ही शहर में तेजी से हो रहे अनियोजित निर्माण और अतिक्रमण ने जल स्रोतों को बुरी तरह प्रभावित किया है।
विज्ञापन
वार्ड 70 के लाखा पाड़ा और वार्ड 21 के चैतन्य विहार में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। लाखा पाड़ा और चैतन्य विहार के लोग कई दिनों पानी की तलाश में भटक रहे हैं। स्थानीय निवासी धनंजय बताते हैं कि सुबह उठते ही सबसे पहले पानी की चिंता होती है। नलों में पानी आता भी है तो सिर्फ कुछ मिनट के लिए और दबाव इतना कम होता है कि बाल्टी भरने में घंटों लग जाते हैं।
विज्ञापन
चैतन्य विहार निवासी नीरज मिश्रा कहते हैं कि नगर निगम बनने के बाद टैक्स तो कई गुना बढ़ गया लेकिन पानी जैसी बुनियादी सुविधा तक नहीं मिल रही। शहर में लगे कई सरकारी हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं। जल संकट के चलते लोग निजी टैंकरों से महंगे दामों पर पानी खरीदने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
यमुना परियोजना पर उठे सवाल
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना रिवरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत यमुना में की गई शीट पाइलिंग ने भूजल रिचार्ज की प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। इसके साथ ही शहर में तेजी से हो रहे अनियोजित निर्माण और अतिक्रमण ने जल स्रोतों को बुरी तरह प्रभावित किया है।