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Mathura News: चालान से बचने के लिए फुटपाथ से खरीद रहे हेलमेट
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मथुरा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 1 जून 2021 को भारतीय मानक संस्थान (आईएसआई) मार्का वाले हेलमेट के प्रयोग करने का आदेश जारी किया। बिना आईएसआई मार्का वाले हेलमेट के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया। बावजूद इसके बिना आईएसआई मार्का वाले हेलमेट की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है।
फुटपाथों पर 100 से लेकर 250 रुपये तक का हेलमेट आसानी से मिल जाता है। जबकि आईएसआई मार्का वाले हेलमेट की कीमत इससे ज्यादा है। लोग पुलिस चालान से बचने के लिए कम कीमत का हेलमेट खरीद लेते हैं और दुर्घटना में यही हेलमेट उनकी जान बचाने में नाकाम साबित होता है।
बात यदि मथुरा जिले की करें तो जनवरी से अप्रैल तक 50 लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हुई। इसमें से 30 दोपहिया वाहन चालक थे और उन्होंने हेलमेट लगा रखे थे। बावजूद उनके सिर में गंभीर चोट लगी और मौत हुई। पुलिस जांच में पता चला कि दोपहिया वाहन सवार ने सस्ता हेलमेट पहन रखा था। दुर्घटना के समय हेलमेट को उसके सिर की रक्षा करनी चाहिए थी, लेकिन हेलमेट पिचक गया या टूट गया। इसके कारण दोपहिया वाहन चालक के सिर में चोट लगी और उसकी मौत हुई।
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बीआईएस के मानक पूरे करने के बाद मिलता है आईएसआई का मार्का
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के नियमों को पूरा करने वाली कंपनी को (आईएसआई) भारतीय मानक संस्थान का मार्का मिलता है। भारत में आईएसआई मार्का वाले सामान को सबसे अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
चालान से भी नहीं बचा पाएगा बिना आईएसआई वाला हेलमेट
एसपी ट्रैफिक मनोज कुमार यादव ने बताया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नए नियमों के अनुसार यदि दोपहिया वाहन चालक ने बिना आईएसआई मार्का वाला हेलमेट पहन रखा है तो पुलिस उसका चालान करेगी। बिना हेलमेट के वाहन चलाने पर एक हजार रुपये का चालान पुलिस द्वारा किया जाता है।
हेलमेट खरीदते समय रखें ध्यान
हेलमेट खरीदते समय सबसे पहले ध्यान दें कि हेलमेट पर आईएसआई मार्का लगा है या नहीं। हेलमेट बनाने वाली कुछ कंपनी हेलमेट पर आईएसआई मार्का लगा देती हैं। नकली आईएसआई चिह्नों पर मानक सात अंकों की पंजीकरण संख्या नहीं होती है। आईएसआई मार्का के शीर्ष पर एक आईएस संख्या होती जो वास्तविक उत्पाद के लिए भारतीय मानक की मात्रा को दिखाती है। भारत में आईएसआई के साथ ही डॉट, ईसीई, स्नेल जैसी कई देशी-विदेशी सर्टिफिकेशन संस्थाएं हैं जो मजबूती के मामले में हेलमेट को कई स्तर पर जांचती है।
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फुटपाथों पर 100 से लेकर 250 रुपये तक का हेलमेट आसानी से मिल जाता है। जबकि आईएसआई मार्का वाले हेलमेट की कीमत इससे ज्यादा है। लोग पुलिस चालान से बचने के लिए कम कीमत का हेलमेट खरीद लेते हैं और दुर्घटना में यही हेलमेट उनकी जान बचाने में नाकाम साबित होता है।
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बात यदि मथुरा जिले की करें तो जनवरी से अप्रैल तक 50 लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हुई। इसमें से 30 दोपहिया वाहन चालक थे और उन्होंने हेलमेट लगा रखे थे। बावजूद उनके सिर में गंभीर चोट लगी और मौत हुई। पुलिस जांच में पता चला कि दोपहिया वाहन सवार ने सस्ता हेलमेट पहन रखा था। दुर्घटना के समय हेलमेट को उसके सिर की रक्षा करनी चाहिए थी, लेकिन हेलमेट पिचक गया या टूट गया। इसके कारण दोपहिया वाहन चालक के सिर में चोट लगी और उसकी मौत हुई।
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बीआईएस के मानक पूरे करने के बाद मिलता है आईएसआई का मार्का
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के नियमों को पूरा करने वाली कंपनी को (आईएसआई) भारतीय मानक संस्थान का मार्का मिलता है। भारत में आईएसआई मार्का वाले सामान को सबसे अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
चालान से भी नहीं बचा पाएगा बिना आईएसआई वाला हेलमेट
एसपी ट्रैफिक मनोज कुमार यादव ने बताया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नए नियमों के अनुसार यदि दोपहिया वाहन चालक ने बिना आईएसआई मार्का वाला हेलमेट पहन रखा है तो पुलिस उसका चालान करेगी। बिना हेलमेट के वाहन चलाने पर एक हजार रुपये का चालान पुलिस द्वारा किया जाता है।
हेलमेट खरीदते समय रखें ध्यान
हेलमेट खरीदते समय सबसे पहले ध्यान दें कि हेलमेट पर आईएसआई मार्का लगा है या नहीं। हेलमेट बनाने वाली कुछ कंपनी हेलमेट पर आईएसआई मार्का लगा देती हैं। नकली आईएसआई चिह्नों पर मानक सात अंकों की पंजीकरण संख्या नहीं होती है। आईएसआई मार्का के शीर्ष पर एक आईएस संख्या होती जो वास्तविक उत्पाद के लिए भारतीय मानक की मात्रा को दिखाती है। भारत में आईएसआई के साथ ही डॉट, ईसीई, स्नेल जैसी कई देशी-विदेशी सर्टिफिकेशन संस्थाएं हैं जो मजबूती के मामले में हेलमेट को कई स्तर पर जांचती है।