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Mathura News: अभी तक सिर्फ 19 रजिस्ट्री, 300 से ज्यादा मकान-दुकान लेना अभी बाकी
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श्रीबांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर बनने के बाद ऐसा नजर आएगा मंदिर।
अभी तक सिर्फ 19 रजिस्ट्री, 300 से ज्यादा मकान-दुकान लेना अभी बाकी
-4.74 एकड़ के प्रोजेक्ट के लिए अब तक मिली केवल 2034.78 वर्गमीटर जमीन
तुषार चौहान
वृंदावन। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर परियोजना के लिए संपत्तियों की रजिस्ट्री प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। करीब 4.74 एकड़ में प्रस्तावित परियोजना के लिए प्रशासन अब तक महज 19 संपत्तियों की रजिस्ट्री ही अपने नाम करा सका है। इन रजिस्ट्रियों से 2034.78 वर्गमीटर भूमि मिली है, जबकि कॉरिडोर के लिए अभी 300 से अधिक मकानों और दुकानों की जमीन को हासिल करना बाकी है। ऐसे में लंबे समय से ठहरी प्रक्रिया को गति देने के लिए जिला प्रशासन एक बार फिर प्रभावित लोगों से संवाद शुरू करने की तैयारी में है।
श्रीबांकेबिहारी कॉरिडोर की जद में 183 मकान, 196 दुकानें आ रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि बिना स्थानीय लोगों की सहमति परियोजना को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। इसलिए अब मुआवजा, पुनर्वास और सुविधाओं का पूरा खाका सामने रखकर लोगों को सहमत करने की रणनीति बनाई जा रही है। कॉरिडोर को लेकर शुरुआत से ही गोस्वामी समाज और प्रभावित परिवारों का एक वर्ग विरोध करता रहा है। उनका कहना है कि पुश्तैनी संपत्तियां खत्म होने से ब्रज का मूल स्वरूप और सदियों पुरानी सांस्कृतिक पहचान प्रभावित होगी।
कुछ रजिस्ट्रियों से बढ़ी प्रशासन की उम्मीद
हाल के दिनों में शशिबाबू गौड़, रविभूषण गौड़, सुभाष गौड़ और शरद बिहारी गोस्वामी ने अपनी भूमि की रजिस्ट्री कराई है। प्रशासन इसे सकारात्मक संकेत मान रहा है। रजिस्ट्री के बाद शशिबाबू गौड़ ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी आस्था के कारण लिया। यह सभी लोग पूर्व में कॉरिडोर का विरोध कर रहे थे। इससे पहले 16 जनवरी 2026 को बिहारी पुरा क्षेत्र में 69.26 वर्गमीटर भूमि की पहली रजिस्ट्री हुई थी। यति गोस्वामी, अभिलाष गोस्वामी और अनिकेत गोस्वामी ने अपनी संपत्ति का विक्रय-विलेख निष्पादित किया था। संवाद
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पुनर्वास का भरोसा, पहले आओ-पहले पाओ की नीति
हाई पावर्ड कमेटी के गठन के बाद से रजिस्ट्री के लिए प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। जो लोग पहले अपनी संपत्ति का बैनामा करेंगे, उन्हें दुकान और फ्लैट के आवंटन में प्राथमिकता मिलेगी। प्रभावित परिवारों को बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा देने के साथ रुक्मिणी विहार, सुनरख और राया की हेरिटेज सिटी में आवास उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई हैं। दुकानदारों को दुकान के बदले दुकान देने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद बदला घटनाक्रम
परियोजना की कानूनी स्थिति भी अब तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर निधि से कॉरिडोर निर्माण संबंधी राज्य सरकार के अध्यादेश पर रोक लगाई थी। इसके बाद पूर्व हाईकोर्ट के जज की अध्यक्षता में श्रीबांकेबिहारी मंदिर हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया गया था, जो मंदिर की व्यवस्था, विकास कार्यों और विवादों की निगरानी कर रही है।
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भूमि खरीद पर भी उठ रहे सवाल
कॉरिडोर के लिए हुई भूमि खरीद भी अभी हाल में सुर्खियों में आईं। समाजसेवी दीपक पाराशर और अन्य लोगों ने हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी के सेवायत सदस्यों को ज्ञापन देकर अब तक हुई सभी खरीद की स्वतंत्र जांच की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि संपत्तियों के मूल्यांकन में बड़ा अंतर है। सड़क की चौड़ाई से जुड़े अभिलेखों में विसंगतियां हैं, कुछ विवादित संपत्तियों की खरीद हुई है। इस कार्रवाई की वैधानिकता की भी जांच होनी चाहिए।
कॉरिडोर से वृंदावन का स्वरूप बदलने का दावा
प्रशासनिक अधिकारियों ने कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर क्षेत्र में भीड़ का दबाव कम होगा और श्रद्धालुओं को सुरक्षित व सुगम दर्शन की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही परिक्रमा मार्ग, यमुना रिवर फ्रंट, प्राचीन घाटों के संरक्षण, सिग्नेचर ब्रिज और अन्य जनसुविधाओं का भी विकास किए जाने की तैयारी की जाएगी। यमुना प्राधिकरण करीब 17.5 एकड़ में आधुनिक पार्किंग और टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स विकसित करेगा। वहीं हेरिटेज सिटी से कॉरिडोर तक 1.4 किलोमीटर लंबी नई सड़क बनाई जाएगी।
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कॉरिडोर एक नजर में
-प्रस्तावित क्षेत्रफल - 4.74 एकड़,
-अब तक अधिग्रहीत भूमि : 2034.78 वर्गमीटर
-अब तक हुई रजिस्ट्री - 19
-पहली रजिस्ट्री : 16 जनवरी 2026
-पहली रजिस्ट्री का क्षेत्रफल : 69.26 वर्गमीटर
-प्रभावित मकान : 183
-प्रभावित दुकानें : 196
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-4.74 एकड़ के प्रोजेक्ट के लिए अब तक मिली केवल 2034.78 वर्गमीटर जमीन
तुषार चौहान
वृंदावन। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर परियोजना के लिए संपत्तियों की रजिस्ट्री प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। करीब 4.74 एकड़ में प्रस्तावित परियोजना के लिए प्रशासन अब तक महज 19 संपत्तियों की रजिस्ट्री ही अपने नाम करा सका है। इन रजिस्ट्रियों से 2034.78 वर्गमीटर भूमि मिली है, जबकि कॉरिडोर के लिए अभी 300 से अधिक मकानों और दुकानों की जमीन को हासिल करना बाकी है। ऐसे में लंबे समय से ठहरी प्रक्रिया को गति देने के लिए जिला प्रशासन एक बार फिर प्रभावित लोगों से संवाद शुरू करने की तैयारी में है।
श्रीबांकेबिहारी कॉरिडोर की जद में 183 मकान, 196 दुकानें आ रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि बिना स्थानीय लोगों की सहमति परियोजना को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। इसलिए अब मुआवजा, पुनर्वास और सुविधाओं का पूरा खाका सामने रखकर लोगों को सहमत करने की रणनीति बनाई जा रही है। कॉरिडोर को लेकर शुरुआत से ही गोस्वामी समाज और प्रभावित परिवारों का एक वर्ग विरोध करता रहा है। उनका कहना है कि पुश्तैनी संपत्तियां खत्म होने से ब्रज का मूल स्वरूप और सदियों पुरानी सांस्कृतिक पहचान प्रभावित होगी।
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कुछ रजिस्ट्रियों से बढ़ी प्रशासन की उम्मीद
हाल के दिनों में शशिबाबू गौड़, रविभूषण गौड़, सुभाष गौड़ और शरद बिहारी गोस्वामी ने अपनी भूमि की रजिस्ट्री कराई है। प्रशासन इसे सकारात्मक संकेत मान रहा है। रजिस्ट्री के बाद शशिबाबू गौड़ ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी आस्था के कारण लिया। यह सभी लोग पूर्व में कॉरिडोर का विरोध कर रहे थे। इससे पहले 16 जनवरी 2026 को बिहारी पुरा क्षेत्र में 69.26 वर्गमीटर भूमि की पहली रजिस्ट्री हुई थी। यति गोस्वामी, अभिलाष गोस्वामी और अनिकेत गोस्वामी ने अपनी संपत्ति का विक्रय-विलेख निष्पादित किया था। संवाद
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पुनर्वास का भरोसा, पहले आओ-पहले पाओ की नीति
हाई पावर्ड कमेटी के गठन के बाद से रजिस्ट्री के लिए प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। जो लोग पहले अपनी संपत्ति का बैनामा करेंगे, उन्हें दुकान और फ्लैट के आवंटन में प्राथमिकता मिलेगी। प्रभावित परिवारों को बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा देने के साथ रुक्मिणी विहार, सुनरख और राया की हेरिटेज सिटी में आवास उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई हैं। दुकानदारों को दुकान के बदले दुकान देने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद बदला घटनाक्रम
परियोजना की कानूनी स्थिति भी अब तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर निधि से कॉरिडोर निर्माण संबंधी राज्य सरकार के अध्यादेश पर रोक लगाई थी। इसके बाद पूर्व हाईकोर्ट के जज की अध्यक्षता में श्रीबांकेबिहारी मंदिर हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया गया था, जो मंदिर की व्यवस्था, विकास कार्यों और विवादों की निगरानी कर रही है।
भूमि खरीद पर भी उठ रहे सवाल
कॉरिडोर के लिए हुई भूमि खरीद भी अभी हाल में सुर्खियों में आईं। समाजसेवी दीपक पाराशर और अन्य लोगों ने हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी के सेवायत सदस्यों को ज्ञापन देकर अब तक हुई सभी खरीद की स्वतंत्र जांच की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि संपत्तियों के मूल्यांकन में बड़ा अंतर है। सड़क की चौड़ाई से जुड़े अभिलेखों में विसंगतियां हैं, कुछ विवादित संपत्तियों की खरीद हुई है। इस कार्रवाई की वैधानिकता की भी जांच होनी चाहिए।
कॉरिडोर से वृंदावन का स्वरूप बदलने का दावा
प्रशासनिक अधिकारियों ने कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर क्षेत्र में भीड़ का दबाव कम होगा और श्रद्धालुओं को सुरक्षित व सुगम दर्शन की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही परिक्रमा मार्ग, यमुना रिवर फ्रंट, प्राचीन घाटों के संरक्षण, सिग्नेचर ब्रिज और अन्य जनसुविधाओं का भी विकास किए जाने की तैयारी की जाएगी। यमुना प्राधिकरण करीब 17.5 एकड़ में आधुनिक पार्किंग और टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स विकसित करेगा। वहीं हेरिटेज सिटी से कॉरिडोर तक 1.4 किलोमीटर लंबी नई सड़क बनाई जाएगी।
कॉरिडोर एक नजर में
-प्रस्तावित क्षेत्रफल - 4.74 एकड़,
-अब तक अधिग्रहीत भूमि : 2034.78 वर्गमीटर
-अब तक हुई रजिस्ट्री - 19
-पहली रजिस्ट्री : 16 जनवरी 2026
-पहली रजिस्ट्री का क्षेत्रफल : 69.26 वर्गमीटर
-प्रभावित मकान : 183
-प्रभावित दुकानें : 196