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सर्दी बढ़ते ही बदलने लगा ठाकुरजी का खानपान
अमर उजाला वृंदावन
Updated Wed, 07 Dec 2016 12:13 AM IST
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ठाकुर बांकेबिहारी का शयन कक्ष
- फोटो : अमर उजाला
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सर्दी का मौसम आते ही लाड़ले ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को ठंड से बचाने के लिए सेवायतों ने जतन शुरू कर दिए हैं। मौसम के अनुरूप ठाकुरजी को मेवा का भोग दिया जा रहा है। ठाकुरजी को सर्दी न लगे इसके लिए चंदन के टीके और माखन-मिश्री में भी केसर मिलाया जा रहा है।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि ठाकुर बांकेबिहारी महाराज की बाल रूप में सेवा की जाती है। मान्यता है कि ठाकुरजी को भी बालक की तरह ही सर्दी और गर्मी का अहसास होता है। ऐसे में सर्दी के मौसम में उन्हें भोग में बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता आदि निवेदित किए जा रहे हैं।
दूध में भी केसर की मात्रा बढ़ा दी गई है। सनील, बेलवेट और मोटे अश्तदार सिल्क की पोशाक पहनाई जा रही हैं। ठाकुरजी की शयन शैया पर सात तकिया, सनील की हल्की रजाई, पश्मीने की चादर रखी है। सुबह आठ बजे शृंगार भोग में केसर मिश्रित मूंग की दाल का हलवा और माखन मिश्री का भोग लगाया जा रहा है।
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प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि ठाकुरजी को सर्दी से बचाने के लिए दोपहर में राजभोग के दौरान कच्चेे भोजन में दी जाने वाली खीर में भी सूखे मेवे डाले जा रहे हैं। इसके अलावा केसर डला हुआ दूध-भात भी ठाकुरजी को भाता है। बांकेबिहारी को शाम के समय (उत्थापन) चाट का भोग भी दिया जा है। शयन सेेपहले मेवायुक्त और केसर मिश्रित दूध का भोग दिया जा रहा है।
रात में भी भोग का इंतजाम
शयन के बाद ठाकुर बांकेबिहारी के कक्ष में चंादी के कटोरे में मेवायुक्त 8 लड्डू, चार पान के बीड़ा और चांदी के लोटे में गुनगुना पानी रखा जाता है। ताकि रात में यदि ठाकुरजी की आंखें खुल जाएं और उन्हें भूख-प्यास लगे तो वह परेशान न हों। ठाकुर बांकेबिहारी महाराज की वर्ष भर मालिश भी की जाती है। गर्मी में चंदन, गुलाब, खस आदि के इत्र से मालिश होती है वहीं ठंड के मौसम में हिना, केसर के इत्र से ठाकुरजी की मालिश की जा रही है।
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ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि ठाकुर बांकेबिहारी महाराज की बाल रूप में सेवा की जाती है। मान्यता है कि ठाकुरजी को भी बालक की तरह ही सर्दी और गर्मी का अहसास होता है। ऐसे में सर्दी के मौसम में उन्हें भोग में बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता आदि निवेदित किए जा रहे हैं।
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दूध में भी केसर की मात्रा बढ़ा दी गई है। सनील, बेलवेट और मोटे अश्तदार सिल्क की पोशाक पहनाई जा रही हैं। ठाकुरजी की शयन शैया पर सात तकिया, सनील की हल्की रजाई, पश्मीने की चादर रखी है। सुबह आठ बजे शृंगार भोग में केसर मिश्रित मूंग की दाल का हलवा और माखन मिश्री का भोग लगाया जा रहा है।
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प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि ठाकुरजी को सर्दी से बचाने के लिए दोपहर में राजभोग के दौरान कच्चेे भोजन में दी जाने वाली खीर में भी सूखे मेवे डाले जा रहे हैं। इसके अलावा केसर डला हुआ दूध-भात भी ठाकुरजी को भाता है। बांकेबिहारी को शाम के समय (उत्थापन) चाट का भोग भी दिया जा है। शयन सेेपहले मेवायुक्त और केसर मिश्रित दूध का भोग दिया जा रहा है।
रात में भी भोग का इंतजाम
शयन के बाद ठाकुर बांकेबिहारी के कक्ष में चंादी के कटोरे में मेवायुक्त 8 लड्डू, चार पान के बीड़ा और चांदी के लोटे में गुनगुना पानी रखा जाता है। ताकि रात में यदि ठाकुरजी की आंखें खुल जाएं और उन्हें भूख-प्यास लगे तो वह परेशान न हों। ठाकुर बांकेबिहारी महाराज की वर्ष भर मालिश भी की जाती है। गर्मी में चंदन, गुलाब, खस आदि के इत्र से मालिश होती है वहीं ठंड के मौसम में हिना, केसर के इत्र से ठाकुरजी की मालिश की जा रही है।