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अब बायोमेट्रिक हाजिरी के बाद ही मिलेगी छात्रों को छात्रवृत्ति
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मथुरा। न छात्र न कागजात और न ही विद्यालय लेकिन प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति। छात्रवृत्ति घोटाले में पाई गईं इन अनियमितताओं से सबक लेकर सरकार ने इन्हें रोकने की योजना तैयार कर ली है। अब वह प्रत्येक छात्र की बायोमेट्रिक हाजिरी लगवाएगी। यह बायोमेट्रिक हाजिरी विद्यालय मेें ही लगेगी लेकिन इसका रिकॉर्ड समाज कल्याण विभाग में जमा होगा। इस रिकॉर्ड को सत्यापित करने के बाद ही छात्रों का डाटा शासन को भेजा जाएगा। बायोमेट्रिक हाजिरी संबंधी शासनादेश की जानकारी लगते ही विद्यालय संचालक पसीने-पसीने हो गए हैं।
छात्रवृत्ति के नाम पर सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले प्राइवेट विद्यालय संचालकों के लिए बुरी खबर है। उनके द्वारा की जा रही धोखाधड़ी को काफी हद तक रोकने के लिए सरकार ने फार्मूला तैयार कर लिया है। इस फार्मूला के तहत प्रत्येक छात्र की बायोमेट्रिक हाजिरी लगेगी। यह बायोमेट्रिक हाजिरी विद्यालय स्तर पर ही ली जाएगी। प्रत्येक दिन की हाजिरी के आधार पर ही समाज कल्याण विभाग में छात्र की उपस्थिति मान्य होगी और इसी के आधार पर विभाग द्वारा छात्र का नाम छात्रवृत्ति के लिए अग्रसरित किया जाएगा।
बायोमेट्रिक हाजिरी का साक्ष्य विद्यालय संचालकों को समाज कल्याण विभाग को देना होगा। कार्यकारी समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र नाथ प्रसाद सिंह ने बताया कि दो दिन पूर्व शासन से इस संबंध मेें आदेश आया है। अब अगले सत्र की छात्रवृत्ति बायोमेट्रिक हाजिरी के बाद ही मिलेगी। इस संबंध में विद्यालय संचालकों को बैठक कर जानकारी दी जाएगी।
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आज मंत्री देखेंगे छात्रवृत्ति घोटाले की फाइलें
नई सरकार के गठन होने के बाद पहली बार समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण शुक्रवार को पड़ोसी जनपद आगरा आ रहे हैं। आगरा आने की खबर से मथुरा के अधिकारी और बाबुओें मेें अफरातफरी मच गई है। आगरा में वह एक बैठक लेंगे, जिसमेें मथुरा के समाज कल्याण विभाग के अधिकारी व बाबू भी शामिल होंगे।
करीब २२० करोड़ रुपये का हो चुका है घोटाला
वित्तीय वर्ष २०१९-२० में मथुरा के विद्यालयों में करीब २२० करोड़ रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला हुआ था। जिले में ७० विद्यालयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा कानपुर कर रही है। आए दिन आरोपी विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों को धमकाते रहते हैं। जांच के दौरान यहां तैनात रहे समाज कल्याण अधिकारी भी निलंबित हो चुके हैं और वर्तमान व पूर्व के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज हो चुकी है।
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छात्रवृत्ति के नाम पर सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले प्राइवेट विद्यालय संचालकों के लिए बुरी खबर है। उनके द्वारा की जा रही धोखाधड़ी को काफी हद तक रोकने के लिए सरकार ने फार्मूला तैयार कर लिया है। इस फार्मूला के तहत प्रत्येक छात्र की बायोमेट्रिक हाजिरी लगेगी। यह बायोमेट्रिक हाजिरी विद्यालय स्तर पर ही ली जाएगी। प्रत्येक दिन की हाजिरी के आधार पर ही समाज कल्याण विभाग में छात्र की उपस्थिति मान्य होगी और इसी के आधार पर विभाग द्वारा छात्र का नाम छात्रवृत्ति के लिए अग्रसरित किया जाएगा।
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बायोमेट्रिक हाजिरी का साक्ष्य विद्यालय संचालकों को समाज कल्याण विभाग को देना होगा। कार्यकारी समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र नाथ प्रसाद सिंह ने बताया कि दो दिन पूर्व शासन से इस संबंध मेें आदेश आया है। अब अगले सत्र की छात्रवृत्ति बायोमेट्रिक हाजिरी के बाद ही मिलेगी। इस संबंध में विद्यालय संचालकों को बैठक कर जानकारी दी जाएगी।
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आज मंत्री देखेंगे छात्रवृत्ति घोटाले की फाइलें
नई सरकार के गठन होने के बाद पहली बार समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण शुक्रवार को पड़ोसी जनपद आगरा आ रहे हैं। आगरा आने की खबर से मथुरा के अधिकारी और बाबुओें मेें अफरातफरी मच गई है। आगरा में वह एक बैठक लेंगे, जिसमेें मथुरा के समाज कल्याण विभाग के अधिकारी व बाबू भी शामिल होंगे।
करीब २२० करोड़ रुपये का हो चुका है घोटाला
वित्तीय वर्ष २०१९-२० में मथुरा के विद्यालयों में करीब २२० करोड़ रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला हुआ था। जिले में ७० विद्यालयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा कानपुर कर रही है। आए दिन आरोपी विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों को धमकाते रहते हैं। जांच के दौरान यहां तैनात रहे समाज कल्याण अधिकारी भी निलंबित हो चुके हैं और वर्तमान व पूर्व के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज हो चुकी है।