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दो साल में अनुदान के नौ लाख बटोरे

Wed, 07 Jan 2015 12:08 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथ़ुरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथ़ुरा Updated Wed, 07 Jan 2015 12:08 AM IST
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Nine Million garnered during two-year
बांके बिहारी मानव कल्याणं करोति समिति की अध्यक्ष पत्नी और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कैंप सत्यापन अधिकारी खुद पीडी (प्रेमदत्त) गौतम। नतीजतन दो साल में संस्था का खाता करीब नौ लाख रुपये के सरकारी अनुदान से भर गया।
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यह वही संस्था है, जिसके धौलीप्याऊ  मेें मोतियाबिंद शिविर में आपरेशन कराने वाले 12 मरीज आंखों की रोशनी गवां बैठे हैं। स्वास्थ्य विभाग में नेत्र परीक्षण अधिकारी पद पर तैनात गौतम इसी खेल में सस्पेंड हुआ। इससे परिचित होने के बाद भी मथुरा प्रशासन और सेहत महकमा ताजा मामले में गौतम के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में हिचक रहा है।
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मथुरा के सपा नेता राजेश शर्मा, आरटीआई कार्यकर्ता राजू गौतम और लक्ष्मीनारायण शर्मा ने बीते साल अगस्त में गौतम के इस खेल की शिकायत शासन से की। शासन ने निर्देश पर संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डा. विनोद कुमार ने जांच की तो आरोप सही पाए गए। उनकी संस्तुति पर गौतम को पिछले महीने सस्पेंड कर दिया गया। दो साल में लगे कैंप में बतौर सत्यापन अधिकारी पीडी गौतम ही पहुंचता था।
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सत्यापन के आधार पर समिति ने 2011-12 में 4,71,000 और 2012-13 में 4,21,750 रुपये अनुदान हासिल किया। वोटर लिस्ट के मुताबिक पीडी गौतम और मीरा गौतम पति-पत्नी हैं। संस्था 2010 में पंजीकृत हुई है, जिसमें बेटे अंशुल गौतम सहित नजदीकी रिश्तेदार पदाधिकारी रहे। शिकायतकर्ता राजेश शर्मा का तो यहां तक आरोप है कि गौतम का चश्मे की दुकानों से कमीशन और मरीजाें से भी रुपये वसूलता था।

पीडी गौतम ने अपनी पत्नी द्वारा संचालित संस्था को अनैतिक ढंग से सरकारी अनुदान दिलाया। जांच में साक्ष्यों के आधार पर आरोप सही पाए जाने पर शासन ने सस्पेंड किया।
डा. सत्यमित्र, एडी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य

ऐसे मिलता है अनुदान
मोतियाबिंद आपेरशन के लक्ष्य में स्वास्थ्य विभाग सामाजिक संगठनाें का सहयोग लेता है। इसमें संगठनाें के कैंप में विभाग का अधिकारी मौके पर पहुंच जांच करता है। इसमें मरीजों की संख्या, क्वालीफाइड चिकित्सक, दवा और संसाधनाें की जांच करता है। उसकी संस्तुति पर ही सरकार प्रति मरीज करीब हजार रुपये देती है।

अनुदान में औराें की भी पहुंचता हिस्सा
गलत ढंग से प्राप्त सरकारी अनुदान में स्वास्थ्य विभाग में भी हिस्सेदार थे। यही कारण था कि समिति के प्रत्येक कैंप के सत्यापन को गौतम ही भेजा जाता था जबकि गौतम के खेल से महकमा वाकिफ था।

सीएमओ नहीं जानते, निलंबन क्यों
भले ही गौतम बीते महीने सस्पेंड हुआ हो, लेकिन मथुरा सीएमओ डा. बीएस यादव को इसकी जानकारी नहीं है। इस संवाददाता के गौतम के सस्पेंड होने के आरोपाें के बाबत पूछने पर उन्होंने यह कार्रवाई अपने कार्यकाल से पहले की बताई। जबकि जांच और शासन की ओर से निलंबन आदेश भी उन्हीं के कार्यकाल में आया।


मथुरा के पीड़ित भी एसएन में भर्ती
कैंप में रोशनी गंवाने वाले मथुरा के सात लोग भी आंख में संक्रमण पर एसएन में भर्ती कराए गए हैं। इनमें रिसाल सिंह, रामलली, नेकसिया व भगवान देवी, नगला कल्लू (सभी हबीबपुर) तथा भगवान देवी, रामबेटी, सोमवती (सभी नगला कल्लू) और सलीमन (नगला आलम) शामिल हैं। इसी तकलीफर आगरा के तीन पीड़ित पहले ही यहां भर्ती हैं।
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