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गोवर्धन परिक्रमा क्षेत्र होगा नो कंस्ट्रक्शन जोन

मनीष शर्मा Updated Wed, 05 Aug 2015 11:31 PM IST
NGT has ordered for no construction zone in goverdhan parikrama marg
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने गिरिराजजी के सप्तकोसीय परिक्रमा क्षेत्र को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया है। साथ ही परिक्रमा मार्ग में वाहनों का प्रयोग भी प्रतिबंधित रहेगा। ब्रज की विरासतों के संरक्षण के लिए एनजीटी का यह कदम महत्वपूर्ण है। इसके के लिए गाइडलाइन जारी कर दी गई हैं, जिसमें श्राइन बोर्ड की तर्ज पर एक स्वतंत्र संगठन का गठन करने की सिफारिश भी शामिल है। अमर उजाला की ‘मुद्दा ब्रज विरासत का’ गोवर्धन गोष्ठी में ब्रजवासियों की ओर से यह मांग उठाई गई थी।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान की याचिका पर गोवर्धन परिक्रमा मार्ग की स्थिति का पता लगाने के लिए कमीशन भेजा था। कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर अधिकरण ने 17 बिंदुओं की गाइड लाइन शासन को जारी की हैं। इसमें परिक्रमा मार्ग में वाहनों पर प्रतिबंधित, सर्विस रोड का निर्माण, रिंग रोड बनाने, उपयुक्त पार्किंग और संपूर्ण परिक्रमा मार्ग को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित करना शामिल हैं। एनजीटी ने इसकी सिफारिश राज्य सरकार से की है।

बता दें कि गोवर्धन की सप्तकोसीय परिक्रमा की प्रतिदिन हजारों और पूर्णमासी आदि विशेष अवसरों पर लाखों श्रद्धालु परिक्रमा करने आते हैं। परिक्रमा मार्ग के विकास के नाम पर राज्य सरकार ने यहां विभिन्न योजनाएं क्रियान्वित की हैं। सरकार के इन प्रयासों को गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान ने एनजीटी में चुनौती दी थी। इसमेें सुनियोजित विकास, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण की मांग की गई थी। संस्थान की याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एक कमीशन भेजकर जांच कराई।

20 मार्च 2015 को कमीशन में निरीक्षण के लिए वादी संस्थान के वरिष्ठ अधिवक्ता एमसी मेहता, आईआईटी कानपुर के रिटायर्ड प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञान स्वरूप, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक निदेशक यूएन सिंह, बोर्ड के क्षेत्रीय आफीसर आरके सिंह ने लोनिवि के एई सुनील प्रकाश और ईओ नगर पंचायत रजनीश शर्मा के साथ परिक्रमा मार्ग का निरीक्षण किया। इसके बाद कमीशन ने 17 बिंदुओं पर रिपोर्ट टिब्यूनल में पेश की। एनजीटी ने इन सिफारिशों को स्वीकार करते हुए सरकार से योजना बनाने को कहा गया है।

इसमें गोवर्धन परिक्रमा मार्ग के लिए श्राइन बोर्ड की तरह ही एक स्वतंत्र संगठन बनाने की सिफारिश की है, जो इस धार्मिक स्थान के बेहतर प्रबंधन के लिए योजना बनाएगा और पवित्र स्थल की मर्यादा, सांस्कृतिक विरासत, कुंड आदि के संरक्षण के लिए कार्य करेगा। अमर उजाला की ब्रज की विरासतों के संरक्षण के लिए आयोजित ‘मुद्दा ब्रज विरासत का’ गोवर्धन गोष्ठी में संतों और गोवर्धन के प्रमुख मंदिरों के प्रबंधकों ने इसकी मांग उठाई थी। गोष्ठी में मौजूद एमवीडीए उपाध्यक्ष और तत्कालीन जिलाधिकारी ने इसका आश्वासन भी दिया था। अब एनजीटी के निर्देश के बाद यह पहल साकार होती दिख रही है।  


ट्रिव्यूनल के आदेश पर खुश
एनजीटी के आदेश को दूरगामी और न्यायप्रद बताते हुए गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान के संतों ने खुशी जताई है। संरक्षक आनंद बाबा ने कहा कि अब परिक्रमा मार्ग का पर्यावरण के अनुकूल विकास होगा। आनंद बाबा ने बताया कि वर्ष 2008 में संत शरणानंद महाराज ने परिक्रमा मार्ग के सौंदर्यीकरण के लिए टेरी नामक संस्था से सर्वे करवाया था। तब भी सर्वे में यह बिंदु तय हुए थे। खुशी व्यक्त करने वालों में किशन महाराज, युक्तानंद महाराज, भूरा बाबा, हरिबोल बाबा, प्रीतम आदि थे।



गाइड लाइन के प्रमुख बिंदु

- परिक्रमा मार्ग को नो कंस्ट्रक्शन जोन बनाया जाए
- श्राइन बोर्ड की तर्ज पर एक स्वतंत्र संगठन का गठन
- परिक्रमा मार्ग के किनारे बने मकानों के पीछे 10 मीटर चौड़ा सर्विस रोड, बाहरी तरफ रिंग रोड
- परिक्रमा मार्ग सहित सर्विस रोड पर स्वास्थ्य, फायर सर्विस के वाहनों को छोड़कर अन्य प्रतिबंधित
- इंटरसेप्टर्स का निर्माण कर सीवेज को एसटीपी में बदला जाए, निवासियों को मिलें कनेक्शन
- परिक्रमा मार्ग पर प्रदूषण और गंदगी फैलाने वाले निवासियों पर कड़ी कार्रवाई
- परिक्रमा मार्ग से 200 मीटर दूरी पर वाहनों के लिए पार्किंग
- जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाकर नक्शे के आधार पर वन विभाग करे डिमार्केशन

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