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36 वर्ष बाद पुरुषोत्तम मास के बाद शुरू हो रहीं आज से नवरात्र

Fri, 16 Oct 2020 10:57 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2020 10:57 PM IST
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Navratra
वृंदावन। शारदीय नवरात्र द्वितीय अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा शनिवार से शुरू हो रहे हैं। यह नवरात्र इस बार विशेष है। 36 वर्ष बाद पुरुषोत्तम मास के बाद नवरात्र आ रहे हैं। ज्योतिष के माध्यम से भी इस नवरात्र को लेकर ज्योतिषियों का आकलन अलग-अलग हैं।
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सनातन संस्कार धाम से ज्योतिषाचार्य रामविलास चतुर्वेदी बताते हैं कि इस नवरात्र में घट स्थापना का समय प्रात: 7:45 से लेकर 9:15 तक का है।
इसमें देवी के नौ स्वरूपों की विशेष पूजन किया जाता है, जिसमें शक्ति पूजा का विशेष महत्व रखना है। स्वच्छ वस्त्र धारण करके दुर्गा जी का आराधना करें। आलोक गुप्ता बताते हैं कि अश्विन अधिक मास के कारण शारदीय नवरात्र श्राद्ध पक्ष के 29 दिनों बाद शनिवार से शुरू हो रहे हैं। यह नवरात्र इस साल नवरात्र का आरंभ चित्रा नक्षत्र में हो रहा है, जो शुभ नहीं है। देवी भागवत्व रुद्रयामल तंत्र की मान्यता है, नवरात्र का आरंभ चित्रा नक्षत्र में हो तो धन का नाश होता है।
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घट स्थापना का समय...
आलोक गुप्ता बताते हैं कि घट स्थापना का समयप्रात: काल का है। ऐसे में सुबह 7.30 बजे के बाद से ही शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की शुरुआत हो जाएगी। इस साल की नवरात्र कुछ खास योग संयोग लेकर आई है। इसमें चार सर्वार्थसिद्धि योग 17, 19, 23 और 24 अक्टूबर को, सिद्धि महायोग 18 व 24 अक्तूबर को और अमृत योग 17, 21 व 25 अक्टूबर को रहेंगे।
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कात्यायनी मंदिर में तैयारियां शुरू
नवरात्र के लिए वृंदावन के प्रमुख देवी मंदिर कात्यायनी में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। नवरात्र में मंदिर आम भक्तों के लिए खोला जाएगा, लेकिन आम आरती में भक्त शामिल नहीं हो सकेंगे। सिर्फ प्रात: 8.30 बजे से 10.30 बजे तक तथा शाम पांच बजे से सात बजे तक दर्शन होंगे। मंदिर प्रबंधक विजय मिश्रा ने बताया कि इस बार संधि आरती 24 अक्तूबर को पूर्वाह्न 11.25 बजे होगी। निकासी और प्रवेश की अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं।
अज्ञान, अन्याय, अभाव और असंगठन को मारने के लिए ऋषियों ने निर्धारित किए पर्व
वृंदावन। जिला आर्य उप प्रतिनिधि सभा के प्रधान आचार्य बिपिन बिहारी आर्य का कहना है कि जो उत्साह, आनंद और कर्तव्य से जोड़ दे उसे पर्व कहते हैं। किसी भी परिवार, समाज, राष्ट्र के चार शत्रु होते हैं। अजान, अन्याय, अभाव और असंगठन। इन चारों शत्रुओं को मारने के लिए ही चार मुख्य पर्व ऋषियों ने निर्धारित किए। श्रावणी, विजयदशमी, दीपावली और होली। अन्य पर्व लघु हैं, जिनमें शारदीय नवरात्र पर्व है।
आचार्य आर्य का कहना है कि नवरात्र शरीर शोधन का पर्व है। मानव सुलभ दुर्बलता के कारण आहार विहार में भूल हो जाती है इसलिए शरीर में विजातीय पदार्थ एकत्रित हो जाता है उन्हें दूर करने के लिए 9 दिन तक उपवास नवरात्र में रखे जाते हैं। इस दौरान पानी अधिक पिए। फलों का रस सेवन करें तथा ताजी सब्जियों को उबाल के रूप में थोड़ी मात्रा में सेवन करें। खाली पेट रात साजन योग प्राणायाम करें। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सूर्य उदय तक मोन रहें और अपने अंदर दिव्य गुणों की वृद्धि करें।

देवी स्वरूप ईश्वर की उपासना करें। किंतु हमारे भाई-बहन 9 दिन तक दो बतासे, 2 लोंग खाकर व्रत करते हैं इसका दुष्परिणाम यह होता है की पानी की कमी आ जाती है। आंतों में खुश्की होने से मल सूख जाता है। इसके कारण बहन बेटियों में लिकोरिया, बवासीर, युवकों में स्वप्नदोष आदि रोग को जाते हैं। युवक-युवतियों को अधिक समय तक भूखा नहीं रहना चाहिए। जो अधिक आयु के लोग हैं वह उपवास करें तो बहुत अच्छा है।
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