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जब हरि माया दूर निवारी...
अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 27 Sep 2016 12:17 AM IST
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रामलीला महोत्सव में हुआ नारद मोहलीला का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
श्रीरामलीला सभा के तत्वावधान में श्रीकृष्ण जन्मस्थान के लीलामंच पर सोमवार को नारद मोहलीला का मंचन हुआ।
नारदजी को विष्णु भगवान में बहुत भक्ति थी। इससे उन्होंने पर्वत पर जाकर तपस्या करने का निर्णय लिया। देवराज इंद्र को लगा उनके तप के प्रभाव से स्वर्ग का आधिपत्य उनके पास से चला जाएगा।
इसलिए कामदेव को नारद की तपस्या भंग करने के लिए भेजा, पर वह असफल रहे। इस पर नारदजी को घमंड आ गया। इस घमंड को समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु ने एक मायानगरी का निर्माण किया। विश्व मोहनी को देखकर नारदजी के मन में उससे विवाह की इच्छा उत्पन्न हुईं।
उन्होंने रूपवान होने के लिए भगवान विष्णु से वर मांगा तो विष्णु ने उन्हें हरि (बंदर) का रूप दे दिया। इसके बाद नारदजी स्वयंवर में जाकर बैठ गए। उधर भगवान विष्णु भी भेष बदलकर स्वयंवर में पहुंचे। गए। विश्वमोहनी ने उनके गले में माला डाल दी। बाद में नारदजी ने अपना चेहरा दर्पण में देखा तो क्रोध में आकर विष्णु भगवान को श्राप दे दिया।
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इसके बाद भगवान विष्णु ने माया को समाप्त किया तो नारद जी को अपनी गलती का अहसास हुआ। कलाकारों ने इस लीला को भावमय रूप में दर्शकों के सामने रखा। इस मौके पर गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, किशन लाल, योगेश कुमार, जुगलकिशोर, उमेश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
रामलीला में आज
रामलीला सभा के प्रचार मंत्री विपुल पारीक के अनुसार 27 सितंबर को शाम पांच बजे आकाशवाणी लीला असकुंडा बाजार पर होगी। रात में श्रीरामजन्मोत्सव और छप्पन भोग लीला जन्मभूमि के लीला मंच पर होगी।
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नारदजी को विष्णु भगवान में बहुत भक्ति थी। इससे उन्होंने पर्वत पर जाकर तपस्या करने का निर्णय लिया। देवराज इंद्र को लगा उनके तप के प्रभाव से स्वर्ग का आधिपत्य उनके पास से चला जाएगा।
इसलिए कामदेव को नारद की तपस्या भंग करने के लिए भेजा, पर वह असफल रहे। इस पर नारदजी को घमंड आ गया। इस घमंड को समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु ने एक मायानगरी का निर्माण किया। विश्व मोहनी को देखकर नारदजी के मन में उससे विवाह की इच्छा उत्पन्न हुईं।
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उन्होंने रूपवान होने के लिए भगवान विष्णु से वर मांगा तो विष्णु ने उन्हें हरि (बंदर) का रूप दे दिया। इसके बाद नारदजी स्वयंवर में जाकर बैठ गए। उधर भगवान विष्णु भी भेष बदलकर स्वयंवर में पहुंचे। गए। विश्वमोहनी ने उनके गले में माला डाल दी। बाद में नारदजी ने अपना चेहरा दर्पण में देखा तो क्रोध में आकर विष्णु भगवान को श्राप दे दिया।
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इसके बाद भगवान विष्णु ने माया को समाप्त किया तो नारद जी को अपनी गलती का अहसास हुआ। कलाकारों ने इस लीला को भावमय रूप में दर्शकों के सामने रखा। इस मौके पर गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, किशन लाल, योगेश कुमार, जुगलकिशोर, उमेश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
रामलीला में आज
रामलीला सभा के प्रचार मंत्री विपुल पारीक के अनुसार 27 सितंबर को शाम पांच बजे आकाशवाणी लीला असकुंडा बाजार पर होगी। रात में श्रीरामजन्मोत्सव और छप्पन भोग लीला जन्मभूमि के लीला मंच पर होगी।