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Mathura News: नववर्ष पर श्रद्धालुओं के स्वागत को तैयार नंदगांव
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नंदगांव। नववर्ष के अवसर पर जहां ब्रज के प्रमुख मंदिरों में अत्यधिक भीड़ के चलते सेवायतों द्वारा श्रद्धालुओं से 5 जनवरी तक संयम बरतने की अपील की जा रही है, वहीं कान्हा की नगरी नंदगांव श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। शांत वातावरण, सुलभ दर्शन और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े स्थलों के कारण नंदगांव इन दिनों श्रद्धालुओं की पहली पसंद बनता जा रहा है।
कस्बे के बीचोंबीच नंदीश्वर पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित नंदबाबा मंदिर दूर से ही भक्तों का मन मोह लेता है। मंदिर में श्रीकृष्ण-बलराम के साथ नंदबाबा, यशोदा मैया, राधारानी तथा कान्हा के सखा धनसुखा–मनसुखा के दर्शन होते हैं। यह धाम नंदगांव की धार्मिक पहचान का केंद्र माना जाता है।
नंदगांव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े अनेक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है। भगवान की प्रथम गोचारण स्थली कदंब टेर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसके समीप स्थित आशेश्वर महादेव मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां भोलेनाथ स्वयं कान्हा के दर्शन की इच्छा लेकर विराजमान हैं। वहीं पावन सरोवर में श्रीकृष्ण द्वारा ग्वालबालों संग गोवंश को जल पिलाने की लीलाओं की स्मृति जुड़ी हुई है।
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इसके अतिरिक्त वृंदादेवी मंदिर, यशोदा मैया के बर्तन, कंस द्वारा भेजे गए राक्षस हाऊ-बिलाऊ के पाषाण रूप, पुष्टिमार्गीय बंटा वारी कुंज, उद्धव-गोपी संवाद स्थल, मोती कुंड, पनिहारी कुंड, नंदबैठक तथा चरण पहाड़ी जैसे अनेक स्थल नंदगांव की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं। नववर्ष पर भीड़ से अलग शांत वातावरण में दर्शन की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए नंदगांव एक प्रमुख और उपयुक्त तीर्थ स्थल के रूप में उभर रहा है।
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कस्बे के बीचोंबीच नंदीश्वर पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित नंदबाबा मंदिर दूर से ही भक्तों का मन मोह लेता है। मंदिर में श्रीकृष्ण-बलराम के साथ नंदबाबा, यशोदा मैया, राधारानी तथा कान्हा के सखा धनसुखा–मनसुखा के दर्शन होते हैं। यह धाम नंदगांव की धार्मिक पहचान का केंद्र माना जाता है।
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नंदगांव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े अनेक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है। भगवान की प्रथम गोचारण स्थली कदंब टेर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसके समीप स्थित आशेश्वर महादेव मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां भोलेनाथ स्वयं कान्हा के दर्शन की इच्छा लेकर विराजमान हैं। वहीं पावन सरोवर में श्रीकृष्ण द्वारा ग्वालबालों संग गोवंश को जल पिलाने की लीलाओं की स्मृति जुड़ी हुई है।
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इसके अतिरिक्त वृंदादेवी मंदिर, यशोदा मैया के बर्तन, कंस द्वारा भेजे गए राक्षस हाऊ-बिलाऊ के पाषाण रूप, पुष्टिमार्गीय बंटा वारी कुंज, उद्धव-गोपी संवाद स्थल, मोती कुंड, पनिहारी कुंड, नंदबैठक तथा चरण पहाड़ी जैसे अनेक स्थल नंदगांव की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं। नववर्ष पर भीड़ से अलग शांत वातावरण में दर्शन की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए नंदगांव एक प्रमुख और उपयुक्त तीर्थ स्थल के रूप में उभर रहा है।