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Mathura News: एमवीडीए ने पट्टे की जमीन का बदल दिया मालिकाना हक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 12:50 AM IST
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mvda ne patte ki jameen ka badal diya malikana hak
तरुण प्रताप सिंह
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मथुरा। विकास बाजार की दुकानों को फ्री होल्ड कर दुकानदारों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया में बड़ा दस्तावेजी खेल सामने आया है। खुद पर मालिकाना हक न होने के बाद भी एमवीडीए ने पट्टे (लीज) पर मिली दुकानों को बेच दिया। नगर निगम से 90 साल के लिए मिली विकास बाजार स्थित दुकानों को 11 साल बाद ही बेचना शुरू कर दिया। कुल 36 दुकानों की बिक्री कर उनका मालिकाना हक बदला गया है।

मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण का गठन 1987 में हुआ था। उस समय मथुरा में नगर पालिका शहर की व्यवस्थाओं को देखता था। नगर पालिका की विकास बाजार में दो मंजिला कुल 72 दुकानें हैं। एमवीडीए के गठन के बाद नगर पालिका ने यह दुकानें प्राधिकरण को लीज पर दी थीं। 90 साल के लिए दी गई दुकानों में शर्त रखी गई कि तीन चरणों में ही लीज की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस शर्त के अनुसार दुकानों को पहले चरण में 30 साल की लीज पर दिया गया। शर्त में स्पष्ट था कि मालिकाना हक नगर पालिका का ही रहेगा।
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1987 की मूल लीज के अनुसार एक दुकान 13.50 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की थी और 400 रुपये मासिक किराये पर 30 साल के लिए दी गई थी। लीज में दो बार 30-30 साल नवीनीकरण का विकल्प दिया गया था। वर्ष 2017 में पहला 30 वर्षीय चरण पूरा होना था, लेकिन प्राधिकरण ने 98 से 2004 के बीच 7 दुकानों को फ्री होल्ड कर दिया। इसके बाद पहले चरण की लीज पूरी होने पर दुकानदारों ने 20 अप्रैल और 17 मई 2017 को नवीनीकरण के लिए प्राधिकरण को पत्र दिए।
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प्राधिकरण ने नवीनीकरण के बजाय फ्री होल्ड का रास्ता चुना। 10 फरवरी 2021 के पत्र में 72वीं बोर्ड बैठक के निर्णय का हवाला देते हुए दुकानों को फ्री होल्ड करने के लिए 10.66 लाख रुपये जमा करने को कहा गया। पत्र में दुकान का वर्तमान मूल्य 8,18,921 रुपये और फ्री होल्ड शुल्क 76,720 रुपये समेत अन्य बकाये जोड़े गए थे। बाद में ब्याज समेत 16,03,621 रुपये प्राधिकरण के खाते में जमा किए गए।

वर्ष 2022 से 2026 के बीच दुकानों का विक्रय किया गया। इस तरह ऊपरी मंजिल की सभी 36 दुकानें फ्री होल्ड कर मालिकाना हक बदल दिया गया। इसकी जानकारी होने पर तत्कालीन नगर आयुक्त अनुनय झा ने एमवीडीए को पत्र भेजकर जमीन और स्वामित्व से संबंधित स्थिति पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद उनका तबादला हो गया और मामला आगे नहीं बढ़ा।
इसके बाद प्राधिकरण का रुख बदल गया। 109वीं बोर्ड बैठक और समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स की दुकानें जीर्ण-शीर्ण होने के कारण शेष दुकानों की लीज डीड निष्पादित की जानी है।

यानी एक ही बाजार में पहले फ्री होल्ड के लिए रकम वसूली गई, दुकानों के विक्रय अभिलेख किए गए और अब बची दुकानों के लिए लीज डीड की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

इस मामले में अन्य दुकानदारों ने जब पत्राचार किया तो जवाब दिया कि दुकानों को लीज पर ही दिया जा सकता है, उसके लिए उपनिबंधक कार्यालय से स्टांप लाकर प्रक्रिया पूर्ण होगी। ब्यूरो

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मामले की जांच कराई जाएगी। इसमें देखा जाएगा कि किस आधार पर दुकानों को फ्री होल्ड किया गया है। -आशीष सिंह, सचिव एमवीडीए

यह जो बिक्री हुई है वह गलत है। दुकानें लीज पर थीं। इस दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी। ओजस्वी राज, नगर आयुक्त
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