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महाकुंभ: महामंडलेश्वर बनीं मुस्कान किन्नर, पिंड दान के बाद मां मनु नंद गिरी मिला नया नाम
Mon, 10 Feb 2025 09:32 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Mon, 10 Feb 2025 09:32 PM IST
सार
मां मनु नंद गिरी अलीगढ़ की रहने वाली हैं। पिछले 16-17 वर्षों से वह संतों के सानिध्य में हैं। शुरुआती जीवन से ही दान, पुण्य,भजन,साधना, समाजसेवा में उनकी रुचि रही है।
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मुस्कान किन्नर बनीं महामंडलेश्वर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
प्रयागराज महाकुंभ में रविवार को सुरीर की किन्नर मुस्कान शर्मा को महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई। अंतरराष्ट्रीय जूना किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने उन्हें अपना पिंड दान करने व त्रिवेणी संगम में स्नान के बाद पट्टाभिषेक किया।
मुस्कान ने संन्यासी परंपरा के अनुसार अपना पुराना जीवन त्यागकर संन्यासी जीवन अपनाया। संत, महंत और महामंडलेश्वरों के सानिध्य में संगम तट पर पट्टाभिषेक किया गया। उन्हें महामंडलेश्वर मां मनु नंद गिरी नाम दिया गया।
मां मनु नंद गिरी ने बताया कि मूल रूप से गभाना जनपद अलीगढ़ की रहने वाली हैं। पिछले 16-17 वर्षों से वह संतों के सानिध्य में हैं। शुरुआती जीवन से ही दान, पुण्य,भजन,साधना, समाजसेवा में उनकी रुचि रही है। उन्होंने समाजशास्त्र से परास्नातक किया है। किन्नर होने पर संत समाज के संपर्क में आई। 13 फरवरी के बाद वह सुरीर स्थित अपने निज निवास पर पहुंचेंगी।
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मुस्कान ने संन्यासी परंपरा के अनुसार अपना पुराना जीवन त्यागकर संन्यासी जीवन अपनाया। संत, महंत और महामंडलेश्वरों के सानिध्य में संगम तट पर पट्टाभिषेक किया गया। उन्हें महामंडलेश्वर मां मनु नंद गिरी नाम दिया गया।
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मां मनु नंद गिरी ने बताया कि मूल रूप से गभाना जनपद अलीगढ़ की रहने वाली हैं। पिछले 16-17 वर्षों से वह संतों के सानिध्य में हैं। शुरुआती जीवन से ही दान, पुण्य,भजन,साधना, समाजसेवा में उनकी रुचि रही है। उन्होंने समाजशास्त्र से परास्नातक किया है। किन्नर होने पर संत समाज के संपर्क में आई। 13 फरवरी के बाद वह सुरीर स्थित अपने निज निवास पर पहुंचेंगी।
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