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शोभायात्रा से पहले मुड़िया संतों ने कराया मुंडन
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मथुरा। गोवर्धन में मुड़िया पूर्णिमा शोभायात्रा से पूर्व मुंडन कराते संत।
- फोटो : MATHURA
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गोवर्धन (मथुरा)। मुड़िया पूर्णिमा मेला निरस्त होने के बाद गुरु-शिष्य परंपरा में शुक्रवार को मुड़िया संतों ने मुंडन कराया। 5 जुलाई को पुरानी परंपरा में दो शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। शोभायात्रा की सशर्त अनुमति मिलने के बाद मुड़िया पूर्णिमा के उपलक्ष्य में पूज्यपाद सनातन गोस्वामी की याद में रविवार की सुबह 9 बजे चकलेश्वर के राधा-श्याम सुंदर मंदिर से शोभायात्रा निकाली जाएगी।
सायं 5 बजे से चकलेश्वर चैतन्य महाप्रभु मंदिर से महंत गोपाल दास के निर्देशन में पालकी के साथ शोभायात्रा निकाली जाएगी। अनुयायियों ने शोभायात्रा को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। चैतन्य महाप्रभु मंदिर के महंत गोपाल बाबा ने बताया कि कोरोना के चलते भक्तों से गोवर्धन न आने का अनुरोध किया है। शोभायात्रा में कम संख्या में साधु-संत शामिल होंगे।
रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी राधाकुंड-श्याम कुंड से निशान व चिन्ह आएंगे। महंत केशव दास ने बताया कि मंदिर में अधिवास संकीर्तन शुरू हो गया है। विशंभर दास, मदन मोहन दास, दीनकृष्ण दास, सुधा सिंधु दास आदि थे। इधर, बता दें कि पूरे देश में मनाए जाने वाला गुरु पूर्णिमा पर्व गोवर्धन धाम में मुड़िया पूर्णिमा मेला के नाम से मनाया जाता है।
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यहां सनातन गोस्वामी के गोलोकधाम पधारने पर उनके शिष्यों ने शोभायात्रा निकाल कर मानसी गंगा की परिक्रमा लगाई थी। साथ ही उनके श्रद्धालुओं ने सिर मुड़ा कर और मानसी गंगा में स्नान कर विमान निकाला। उसी समय से मुड़िया नाम से यह मेला प्रसिद्ध हुआ।
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सायं 5 बजे से चकलेश्वर चैतन्य महाप्रभु मंदिर से महंत गोपाल दास के निर्देशन में पालकी के साथ शोभायात्रा निकाली जाएगी। अनुयायियों ने शोभायात्रा को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। चैतन्य महाप्रभु मंदिर के महंत गोपाल बाबा ने बताया कि कोरोना के चलते भक्तों से गोवर्धन न आने का अनुरोध किया है। शोभायात्रा में कम संख्या में साधु-संत शामिल होंगे।
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रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी राधाकुंड-श्याम कुंड से निशान व चिन्ह आएंगे। महंत केशव दास ने बताया कि मंदिर में अधिवास संकीर्तन शुरू हो गया है। विशंभर दास, मदन मोहन दास, दीनकृष्ण दास, सुधा सिंधु दास आदि थे। इधर, बता दें कि पूरे देश में मनाए जाने वाला गुरु पूर्णिमा पर्व गोवर्धन धाम में मुड़िया पूर्णिमा मेला के नाम से मनाया जाता है।
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यहां सनातन गोस्वामी के गोलोकधाम पधारने पर उनके शिष्यों ने शोभायात्रा निकाल कर मानसी गंगा की परिक्रमा लगाई थी। साथ ही उनके श्रद्धालुओं ने सिर मुड़ा कर और मानसी गंगा में स्नान कर विमान निकाला। उसी समय से मुड़िया नाम से यह मेला प्रसिद्ध हुआ।