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UP: वृंदावन में मोहन भागवत बोले- अब भारत बनेगा विश्व गुरु, संतों की राह से बदलेगी दुनिया
Tue, 07 Apr 2026 12:45 PM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 07 Apr 2026 12:45 PM IST
सार
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत संतों की प्रेरणा और आध्यात्मिक मूल्यों के आधार पर विश्व को नई दिशा देगा। उन्होंने जोर दिया कि भारत की परंपरा और संतत्व ही दुनिया को सुखी और सुंदर बनाने का मार्ग दिखाएंगे।
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संघ प्रमुख मोहन भागवत
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पश्चिम एशिया में अशांति की ओर इंगित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि भारत विश्व गुरु बनेगा और विश्व को नई सुखी और सुंदर दुनिया के बनाएगा। इसके लिए संतों से संतत्व से सीख लेकर उनकी प्रेरणा और अध्यात्म के आधार पर भारत विश्व गुरु बनेगा। इसके लिए संघ संतों के साथ मिलकर प्रयास करेगा। यह विचार उन्होंने वृंदावन के वंशीवट क्षेत्र स्थित मलूक पीठ में संत मलूकदास महाराज के 452वें जयंती महोत्सव में व्यक्त किए।
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उन्होंने कहा कि भारत वर्ष सबको प्रकाशित करे, इसकी आवश्यकता है। अपनी आध्यात्मिक परंपरा के आधार पर रीति और नीति ऐसी होनी चाहिए। सत्य के आधार पर जीवन खड़ा होने की आवश्यकता है। इसके लिए संतों के सानिध्य देश को प्राप्त है। संतों के शब्द और शब्द के पीछे के भाव को भी देखते हैं। उसे लेकर ही आगे बढ़ते रहना है। उन्होंने कहा कि मलूक पीठ में 452 वर्ष से संत मलूक दास की परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं। इससे जीवन दर्शन की सीख सभी को लेनी चाहिए। सत्य, करुणा के बिना धर्म नहीं हो सकता। सबको मिलकर रहना चाहिए। करुणा जीवन में तब आती है जब सबका दुख अपना दुख लगता है। देश के 142 करोड़ लोग संतत्व को प्राप्त होगा यह संभव नहीं है, लेकिन सभी का सुचिता पूर्ण जीवन हो इसके लिए प्रयास करना है।
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महंत राजेंद्र दास महाराज के गौहत्या पर पूरी तरह से प्रतिबंध की मांग पर उन्होंने कहा कि समाज को गोभक्त बनाओ गौहत्या अपने आप रुक जाएगी। लोगों को इसके लिए सामर्थ्यवान बनाओ। यह एक साहसी कदम होगा। जब गौ हत्या के विरोध में देश में जनभावना खड़ी हो गई तो सरकार को यह मानना होगा। जिस तरह से श्रीराम मंदिर के लिए भावना सारे देश में दिखी ऐसी ही गाय के लिए भावना दिखनी चाहिए। इसके लिए संघ लोगों में जागृति करनी होगी। गाय के तत्वों को जन-जन तक पहुंचाएंगे। संघ उस दिशा में कार्य करेगा।