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Mathura News: भक्ति, प्रेम और कृष्ण के प्रति समर्पण की जीवंत धरोहर है मीराजी मंदिर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Apr 2025 01:11 AM IST
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Meeraji Mandir is a living legacy of devotion, love and dedication towards Krishna
मथुरा। मीराजी का मंदिर। - फोटो : mathura
वृंदावन। मीरा जी मंदिर न केवल एक ऐतिहासिक स्थल है, बल्कि यह उस प्रेम, समर्पण और भक्ति की प्रतीकस्थली है जो मीराबाई ने अपने आराध्य श्रीकृष्ण गिरधर गोपाल के प्रति दर्शाया। 500 वर्ष पूर्व मीराबाई ने इस स्थान पर 15 वर्षों तक निवास कर संसार की सीमाओं को लांघते हुए अपने आराध्य से एकात्मता का अनुभव किया। मीराजी का प्रेम सांसारिक बंधनों से मुक्त था। उनकी भक्ति की आज भी लोग चर्चाएं करते हैं। उनके प्रेम ने वृंदावन में आराध्य के प्रति अनूठी भक्ति को जाग्रत किया था।
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मीराबाई का कृष्ण से प्रेम एक साधारण भक्त और भगवान का संबंध नहीं था, बल्कि यह वह पवित्र रिश्ता था जिसमें मीरा ने स्वयं को कृष्ण की दासी, प्रेयसी और पत्नी माना। उन्होंने कहा था मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरा ना कोई। यह वाक्य आज भी मंदिर की दीवारों पर नहीं, श्रद्धालुओं के हृदय में अंकित है।
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मीरा जी की प्रेम शक्ति को दर्शाती है उनकी कुटिया
मंदिर में आज भी वह कुटिया सुरक्षित है, जहां मीरा प्रतिदिन श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने बैठकर भजन करती थीं। यह स्थान साधना की शक्ति, नारी भक्ति की स्वतंत्रता और ईश्वर के प्रति निष्ठा का अद्भुत उदाहरण है।
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सालीग्राम की चमत्कारी कथा
सेवायत रुद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि जब मीराबाई के देवर राणा विक्रमादित्य ने उनकी हत्या के इरादे से एक झोपड़ी में सांप रखकर उन्हें उसमें भेज दिया गया। मीरा अपने गिरधर पर पूर्ण विश्वास रखते हुए भीतर गईं पर वहां उन्हें सांप नहीं बल्कि सालीग्राम के स्वरूप में भगवान कृष्ण के दर्शन हुए। कहा जाता है कि जैसे ही मीरा ने उन्हें उठाया तो मीरा के नयनों से निकले अश्रु सालीग्राम पर गिरे तो उस पर श्रीकृष्ण का मुख प्रकट हो गया। आज भी वही दिव्य सालीग्राम इस मंदिर में विराजमान हैं और भक्त उनके दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं।


मंदिर के विग्रह और उत्सव
मंदिर में श्री गिरधर गोपाल, राधा रानी और मीराबाई तीनों एक साथ विराजमान हैं। यह त्रिदेव स्वरूप अनन्य प्रेम, भक्ति और सेवा भाव का अनुपम उदाहरण है। राधा मनोहर जी का उत्सव विग्रह मंदिर की शोभा को और भी बढ़ाता है।हरियाली तीज के दिन झूलन उत्सव में श्री राधा मनोहर को झूला झुलाया जाता है, जबकि देव उठान एकादशी पर तुलसी विवाह का आयोजन श्रद्धा और भव्यता के साथ होता है।

मीरा का जन्मदिन एक आध्यात्मिक उत्सव
शरद पूर्णिमा के दिन मंदिर में मीराबाई का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन वृंदावन में भक्ति की बयार बहती है और संपूर्ण वातावरण पायो जी मैंने राम रतन धन पायो जैसे भजनों से गूंज उठता है।


दिव्य फुव्वारा रहस्यमयी चमत्कार
मंदिर के सेवायत रुद्रप्रताप सिंह ने बताया कि मंदिर में एक फुव्वारा है। इसकी भी खासियत है। यहां पानी की धारा पर बॉल स्वत ही नाचने लगती है। यह आज भी भक्तों के लिए रहस्य और श्रद्धा का विषय बना हुआ है।
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