{"_id":"5fd39af38ebc3e410f760832","slug":"medecine-mathura-news-agr4715254191","type":"story","status":"publish","title_hn":"केंद्र की नीतियों के विरोध में हड़ताल पर रहे निजी चिकित्सक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केंद्र की नीतियों के विरोध में हड़ताल पर रहे निजी चिकित्सक
विज्ञापन
मथुरा। जिला अस्पताल में मरीजों की बहुत कम संख्या।
- फोटो : VRINDAVAN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। केंद्र की चिकित्सीय नीतियों के विरोध में शुक्रवार को ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के निर्देश के बाद मथुरा के प्राइवेट चिकित्सक हड़ताल पर रहे। निजी चिकित्सकों ने इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी सेवाएं बंद रखीं। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार निजी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। चिकित्सा केंद्र खुले तो थे लेकिन चिकित्सक मरीज नहीं देख रहे थे। ओपीडी के बाहर हड़ताल का नोटिस भी चस्पा कर रखा था। चिकित्सा केंद्र के स्टाफ द्वारा आने वाले लोगों को हड़ताल की जानकारी दी जाती रही। कुछ मरीज इमरजेंसी में आए, जिसको चिकित्सकों ने देखा और उपचार किया।
ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार को निजी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। ओपीडी बंद होने से मरीजों को बिना दिखाए लौटना पड़ा। इमरजेंसी में चिकित्सकों ने मरीजों का उपचार किया। इधर, आईएमए पदाधिकारियों ने मंथन कर सरकार की चिकित्सकीय नीतियों पर रोष जताया। सिटी हॉस्पिटल हाईवे में एक्सीडेंट एवं अन्य गंभीर पहुंचे, जिनका चिकित्सकों ने उपचार किया। इधर, आईएमए अध्यक्ष डाक्टर अनिल चौहान, सचिव डॉ. मनोज गुप्ता, संयुक्त सचिव डॉ. गौरव भारद्वाज, डॉ. प्रवीन गोयल, डॉ. वर्षा तिवारी, डॉ. एनके भरतिया आदि चिकित्सकों ने आपस में चर्चा की। सरकार की चिकित्सकीय नीतियों पर नाराजगी जाहिर की। एकजुटता रहने की अपील की। मुख्यालय से प्राप्त निर्देशों के बारे में सदस्यों को बताया जाता रहा।
सरकारी अस्पतालों में पहुंचे मरीज
निजी चिकित्सकों की हड़ताल के बाद बीमार हुए लोग सरकारी अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनका उपचार किया। इसका असर सरकारी अस्पतालों पर भी पड़ा। हालांकि शुक्रवार को सरकारी अस्पतालों में भीड़ का दबाव नहीं था, लेकिन ओपीडी हर दिन की तरह शुक्रवार को अधिक रही। जिला अस्पताल में ओपीडी पांच सौ के पार हो गई। वहीं देेहात में भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी लोग दवा लेने के लिए पहुंचे।
विज्ञापन
आईएमए की हड़ताल से नीमा रहा अलग
शुक्रवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की हड़ताल से नेशनल इंटीग्रेशन मेडिकल एसोसिएशन( नीमा) ने अपने को अलग रखा। नीमा से जुड़े आयुर्वेद चिकित्सक शुक्रवार को पूरे दिन अपने नर्सिंग होम और क्लीनिक पर मरीजों को उपचार करते रहे। नीमा के उपाध्यक्ष डॉक्टर भूपेंद्र द्वारा आईएमए की हमने हड़ताल का विरोध किया। हमारे सभी आयुर्वेद चिकित्सकों ने अपने अपने क्लीनिक और नर्सिंग होम में मरीजों का उपचार किया। हालांकि आज मरीज बहुत कम संख्या में पहुंचे।
विज्ञापन
ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार को निजी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। ओपीडी बंद होने से मरीजों को बिना दिखाए लौटना पड़ा। इमरजेंसी में चिकित्सकों ने मरीजों का उपचार किया। इधर, आईएमए पदाधिकारियों ने मंथन कर सरकार की चिकित्सकीय नीतियों पर रोष जताया। सिटी हॉस्पिटल हाईवे में एक्सीडेंट एवं अन्य गंभीर पहुंचे, जिनका चिकित्सकों ने उपचार किया। इधर, आईएमए अध्यक्ष डाक्टर अनिल चौहान, सचिव डॉ. मनोज गुप्ता, संयुक्त सचिव डॉ. गौरव भारद्वाज, डॉ. प्रवीन गोयल, डॉ. वर्षा तिवारी, डॉ. एनके भरतिया आदि चिकित्सकों ने आपस में चर्चा की। सरकार की चिकित्सकीय नीतियों पर नाराजगी जाहिर की। एकजुटता रहने की अपील की। मुख्यालय से प्राप्त निर्देशों के बारे में सदस्यों को बताया जाता रहा।
विज्ञापन
सरकारी अस्पतालों में पहुंचे मरीज
निजी चिकित्सकों की हड़ताल के बाद बीमार हुए लोग सरकारी अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनका उपचार किया। इसका असर सरकारी अस्पतालों पर भी पड़ा। हालांकि शुक्रवार को सरकारी अस्पतालों में भीड़ का दबाव नहीं था, लेकिन ओपीडी हर दिन की तरह शुक्रवार को अधिक रही। जिला अस्पताल में ओपीडी पांच सौ के पार हो गई। वहीं देेहात में भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी लोग दवा लेने के लिए पहुंचे।
विज्ञापन
आईएमए की हड़ताल से नीमा रहा अलग
शुक्रवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की हड़ताल से नेशनल इंटीग्रेशन मेडिकल एसोसिएशन( नीमा) ने अपने को अलग रखा। नीमा से जुड़े आयुर्वेद चिकित्सक शुक्रवार को पूरे दिन अपने नर्सिंग होम और क्लीनिक पर मरीजों को उपचार करते रहे। नीमा के उपाध्यक्ष डॉक्टर भूपेंद्र द्वारा आईएमए की हमने हड़ताल का विरोध किया। हमारे सभी आयुर्वेद चिकित्सकों ने अपने अपने क्लीनिक और नर्सिंग होम में मरीजों का उपचार किया। हालांकि आज मरीज बहुत कम संख्या में पहुंचे।