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तीन सदस्यीय टीम ने किया निरीक्षण, सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
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मथुरा। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से वार्ता करती सुप्रीम कोर्ट की टीम।
- फोटो : VRINDAVAN
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मथुरा/वृंदावन। भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीला स्थलियों के बीच सड़क यातायात को सुलभ बनाने के लिए चौड़ीकरण में बाधा बने 1820 पौधों को काटने की अनुमति का मसला अब जल्द सुलझ सकता है। उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय समिति ने मथुरा-वृंदावन और मथुरा-गोवर्धन मार्ग के विस्तारीकरण में आ रहे पेड़ों को काटने संबंधी प्रस्ताव पर बुधवार को मौका मुआयना किया।
धर्म और आस्था की भूमि मथुरा में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और यातायात साधनों के तेजी के साथ हो रहे इजाफा को देखते हुए नए मार्ग और पुराने कुछ महत्वपूर्ण मार्गों के विस्तारीकरण की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें मथुरा से गोवर्धन मार्ग को फोरलेन बनाया जा रहा है। यहां विस्तारीकरण की प्रक्रिया में 1492 पौधे आडे़ आ रहे हैं। इसी प्रकार मथुरा से वृंदावन के बीच सड़क के चौड़ीकरण में 318 पौधों को काटा जाना है।
इसका प्रस्ताव उच्चतम न्यायालय को भेजा गया था। इस पर जनपद आई उच्च न्यायालय के तीन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति ने दोनों मार्गों का मौका मुआयना किया। सड़क विस्तारीकरण में अवरोध बन रहे अनेक पौधों को समिति ने स्थानीय अधिकारियों के साथ देखा। इन दोनों मार्गों के विस्तारीकरण की आवश्यकता को भी समझा।
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समिति के चेयरमैन पीवी जयकृष्णन ने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से वृंदावन मार्ग को लेकर पूछा कि बिना पेड़ों को काटे सड़क निर्माण संभव है या अन्य कोई रास्ता। इस पर पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता सनसवीर सिंह ने बताया कि मथुरा-वृंदावन को जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग है। पेड़ों के कारण बीते लगभग एक वर्ष से सड़क चौड़ीकरण कार्य पूरा नहीं हो सका है।
अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी सनसवीर सिंह ने बताया कि अब न्यायालय में अगली सुनवाई के बाद ही पेड़ों को काटने की अनुमति मिलने की संभावना है। इसी के बाद सड़क चौड़ीकरण का कार्य पूरा हो सकेगा। मथुरा-वृंदावन के विस्तारीकरण पर 31 करोड़ और मथुरा गोवर्धन पर 38 करोड़ की लागत से काम होना है।
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धर्म और आस्था की भूमि मथुरा में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और यातायात साधनों के तेजी के साथ हो रहे इजाफा को देखते हुए नए मार्ग और पुराने कुछ महत्वपूर्ण मार्गों के विस्तारीकरण की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें मथुरा से गोवर्धन मार्ग को फोरलेन बनाया जा रहा है। यहां विस्तारीकरण की प्रक्रिया में 1492 पौधे आडे़ आ रहे हैं। इसी प्रकार मथुरा से वृंदावन के बीच सड़क के चौड़ीकरण में 318 पौधों को काटा जाना है।
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इसका प्रस्ताव उच्चतम न्यायालय को भेजा गया था। इस पर जनपद आई उच्च न्यायालय के तीन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति ने दोनों मार्गों का मौका मुआयना किया। सड़क विस्तारीकरण में अवरोध बन रहे अनेक पौधों को समिति ने स्थानीय अधिकारियों के साथ देखा। इन दोनों मार्गों के विस्तारीकरण की आवश्यकता को भी समझा।
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समिति के चेयरमैन पीवी जयकृष्णन ने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से वृंदावन मार्ग को लेकर पूछा कि बिना पेड़ों को काटे सड़क निर्माण संभव है या अन्य कोई रास्ता। इस पर पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता सनसवीर सिंह ने बताया कि मथुरा-वृंदावन को जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग है। पेड़ों के कारण बीते लगभग एक वर्ष से सड़क चौड़ीकरण कार्य पूरा नहीं हो सका है।
अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी सनसवीर सिंह ने बताया कि अब न्यायालय में अगली सुनवाई के बाद ही पेड़ों को काटने की अनुमति मिलने की संभावना है। इसी के बाद सड़क चौड़ीकरण का कार्य पूरा हो सकेगा। मथुरा-वृंदावन के विस्तारीकरण पर 31 करोड़ और मथुरा गोवर्धन पर 38 करोड़ की लागत से काम होना है।