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मथुरा: 45 मिनट में होगा अब शव का अंतिम संस्कार
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यमुना किनारे नवनिर्मित शवदाहगृह।
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मथुरा। धर्म नगरी मथुरा में शवों का अंतिम संस्कार अब लकड़ी के बजाए विद्युत चलित शवदाहगृह में होगा। तीन घंटे की यह प्रक्रिया महज ४५ मिनट में पूरी हो जाएगी। इसके लिए एक दशक से लंबित विद्युत शवदाहगृह परियोजना जल्द ही पूरी होने जा रही है।
करीब एक दशक पहले यमुना किनारे यमुना कार्य योजना के अंतर्गत विद्युत शवदाहगृह की योजना पर काम शुरू किया गया था। प्रारंभिक अवस्था में एक कक्ष निर्माण के बाद काम रोक दिया गया। इस साल एक बार फिर इस अधूरी योजना पर काम शुरू हुआ।
मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने अब तक ९० प्रतिशत काम पूरा कर दिया है। इसमें बैठने के लिए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग हॉल बनाए गए हैं। चौकीदार के लिए अलग कक्ष है, जबकि कार्यालय कक्ष का भी निर्माण किया है। यहां आने वाले वालों के लिए पार्किंग की भी व्यवस्था की गई है। करीब १६०० वर्ग मीटर में तैयार यह शवदागृह विद्युत और गैस से संयुक्त रूप से संचालित होगा। वर्तमान में दो भट्टी लगाई हैं, जो गैस और विद्युत संचालित होंगी। इनसे ४५ मिनट में शव का अंतिम संस्कार हो जाएगा।
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मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अवर अभियंता सुनील अग्रवाल ने बताया कि उक्त परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। ९० प्रतिशत काम पूरा हो गया है। उपकरण लगाए जा चुके हैं। संभावना है कि इसे दीवाली से पहले शुरू कर दिया जाएगा। इसमें बिजली जाने पर गैस का उपयोग किया जा सकेगा।
श्मशान स्थल संचालन समिति ने देखीं व्यवस्थाएं
मथुरा ध्रुवघाट शमशान स्थल संचालन समिति ने शुक्रवार को यमुना पालीपार स्थित महाराजा अग्रसेन शमशान स्थल पर शौचालय-मूत्रालय व स्नानघर का नवीन निर्माण के साथ विद्युत शवदाह केंद्र को अवलोकन किया।
श्मशान स्थल पर उठावनी के लिए वातानुकूलित हॉल की व्यवस्था को देखा। नवनिर्मित नौ नहाने घर स्थल का जायजा लिया। समिति के प्रबंध मंत्री शशिभानु गर्ग ने बताया कि समिति अध्यक्ष वीरेंद्र अग्रवाल, मंत्री अनिल मित्तल के नेतृत्व में यमुना तट ध्रुवघाट पर विकास प्राधिकरण द्वारा आम लोगों के लिए बनाए जा रहे विद्युत व गैस संचालित शवदाहगृह का निर्माण कार्य अब पूरा होने जा रहा है।
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करीब एक दशक पहले यमुना किनारे यमुना कार्य योजना के अंतर्गत विद्युत शवदाहगृह की योजना पर काम शुरू किया गया था। प्रारंभिक अवस्था में एक कक्ष निर्माण के बाद काम रोक दिया गया। इस साल एक बार फिर इस अधूरी योजना पर काम शुरू हुआ।
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मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने अब तक ९० प्रतिशत काम पूरा कर दिया है। इसमें बैठने के लिए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग हॉल बनाए गए हैं। चौकीदार के लिए अलग कक्ष है, जबकि कार्यालय कक्ष का भी निर्माण किया है। यहां आने वाले वालों के लिए पार्किंग की भी व्यवस्था की गई है। करीब १६०० वर्ग मीटर में तैयार यह शवदागृह विद्युत और गैस से संयुक्त रूप से संचालित होगा। वर्तमान में दो भट्टी लगाई हैं, जो गैस और विद्युत संचालित होंगी। इनसे ४५ मिनट में शव का अंतिम संस्कार हो जाएगा।
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मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अवर अभियंता सुनील अग्रवाल ने बताया कि उक्त परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। ९० प्रतिशत काम पूरा हो गया है। उपकरण लगाए जा चुके हैं। संभावना है कि इसे दीवाली से पहले शुरू कर दिया जाएगा। इसमें बिजली जाने पर गैस का उपयोग किया जा सकेगा।
श्मशान स्थल संचालन समिति ने देखीं व्यवस्थाएं
मथुरा ध्रुवघाट शमशान स्थल संचालन समिति ने शुक्रवार को यमुना पालीपार स्थित महाराजा अग्रसेन शमशान स्थल पर शौचालय-मूत्रालय व स्नानघर का नवीन निर्माण के साथ विद्युत शवदाह केंद्र को अवलोकन किया।
श्मशान स्थल पर उठावनी के लिए वातानुकूलित हॉल की व्यवस्था को देखा। नवनिर्मित नौ नहाने घर स्थल का जायजा लिया। समिति के प्रबंध मंत्री शशिभानु गर्ग ने बताया कि समिति अध्यक्ष वीरेंद्र अग्रवाल, मंत्री अनिल मित्तल के नेतृत्व में यमुना तट ध्रुवघाट पर विकास प्राधिकरण द्वारा आम लोगों के लिए बनाए जा रहे विद्युत व गैस संचालित शवदाहगृह का निर्माण कार्य अब पूरा होने जा रहा है।