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Mathura: फरह में बोले विहिप नेता चंपत राय- श्रीराम जन्मभूमि मंदिर समाज के जागरण का परिणाम
Fri, 23 Sep 2022 08:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Sep 2022 08:51 PM IST
सार
चंपत राय ने कहा कि आज दुनिया हमारी बात सुनती है क्योंकि हम जागृत हो चुके हैं। श्रीराम मंदिर हमारी नीतियों और जागने का प्रतिफल है।
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विहिप नेता चंपत राय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मथुरा के फरह में श्रीराम जन्मभूमि न्यास के सचिव और विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर को हिंदू समाज के जाग्रत होने का प्रतिफल बताया। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि समाज के जागरण का परिणाम है। अब ऐसा हो कि किसी काम में गुलामी की निशानी न दिखे।
पं. दीनदयाल उपाध्याय की जन्म स्थली में शुक्रवार को आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह और विचार गोष्ठी में विहिप नेता ने कहा कि 30 साल तक लगातार हिंदू समाज को जगाने का काम हुआ। 15 हजार संत, अशोक सिंघल, गुरु महंत अवैद्यनाथ जैसी विभूतियां गुलामी की निशानी को मिटाने में जुटीं थीं। आज दुनिया हमारी बात सुनती है क्योंकि हम जागृत हो चुके हैं। श्रीराम मंदिर हमारी नीतियों और जागने का प्रतिफल है। आज हर चीज पर जागरूकता हो रही है, इससे देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है।
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विहिप नेता ने बताया कि अगले साल दिसंबर में प्राण प्रतिष्ठा का काम होगा, प्रथम तल का काम पूरा होने को है, यह मंदिर अद्भुत होगा। मंदिर रेगिस्तानी इंजीनियरिंग का नमूना भी है। चंपत राय ने कहा कि वह शुरुआत में यहां दो-तीन बार आए थे, इसके बाद आना नहीं हुआ। पंडित दीनदयाल उपाध्याय को उन्होंने संघ कार्यकर्ता के रूप में 55 साल पहले विद्यार्थी जीवन में सुना था, वह देश की समस्याओं पर विचार रखते थे, ऐसा लगता था कि वह भविष्य दृष्टा थे।
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पं. दीनदयाल उपाध्याय की जन्म स्थली में शुक्रवार को आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह और विचार गोष्ठी में विहिप नेता ने कहा कि 30 साल तक लगातार हिंदू समाज को जगाने का काम हुआ। 15 हजार संत, अशोक सिंघल, गुरु महंत अवैद्यनाथ जैसी विभूतियां गुलामी की निशानी को मिटाने में जुटीं थीं। आज दुनिया हमारी बात सुनती है क्योंकि हम जागृत हो चुके हैं। श्रीराम मंदिर हमारी नीतियों और जागने का प्रतिफल है। आज हर चीज पर जागरूकता हो रही है, इससे देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है।
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'राष्ट्र का सम्मान सबसे पहले'
उन्होंने अयोध्या के ढांचे को 500 साल पुराने हिंदुस्तान की निशानी बताते हुए कहा कि कोई कुछ कर दे और हम चुप बैठ जाएं, यह हमारा अपमान है। राष्ट्र का सम्मान पहले है। जन्मभूमि सिद्ध करती है राम मंदिर से करोड़ों लोगों की भावना जुड़ी हैं, अब बन रहा है तो ऐसा बनेगा 1000 साल तक इसे मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ेगी। इंजीनियर मंदिर को बिना लोहे की सामग्री से तैयार करने का काम कर रहे हैं। दो साल में मंदिर की नींव चट्टान की तरह खड़ी हो जाएगी। मंदिर के काम में पत्थर जोड़ने के लिए केवल तांबे का इस्तेमाल हो रहा है।
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विहिप नेता ने बताया कि अगले साल दिसंबर में प्राण प्रतिष्ठा का काम होगा, प्रथम तल का काम पूरा होने को है, यह मंदिर अद्भुत होगा। मंदिर रेगिस्तानी इंजीनियरिंग का नमूना भी है। चंपत राय ने कहा कि वह शुरुआत में यहां दो-तीन बार आए थे, इसके बाद आना नहीं हुआ। पंडित दीनदयाल उपाध्याय को उन्होंने संघ कार्यकर्ता के रूप में 55 साल पहले विद्यार्थी जीवन में सुना था, वह देश की समस्याओं पर विचार रखते थे, ऐसा लगता था कि वह भविष्य दृष्टा थे।