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मथुरा के संग्रहालय में है इतिहास का खजाना
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 18 May 2015 12:25 AM IST
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राजकीय संग्रहालय कुषाण, गुप्त और मौर्य काल की बेजोड़ कला का भंडार है। इस संग्रहालय को महात्मा बुद्ध की प्रथम प्रतिमा रखने का गौरव भी हासिल है। यहां कई मूर्तियां समूचे विश्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती हैं। 18 मई को विश्व संग्रहालय दिवस के मौके पर आइए हम भी इतिहास के इस खजाने का अवलोकन करें।
संग्रहालय में कुषाण काल के राजा कनिष्क सहित इस काल की कई अनमोल मूर्तियां मौजूद हैं। जो उस समय के राजाओं के पहनावे के साथ ही शस्त्र, अस्त्र आदि का परिचय देती हैं। राजा कनिष्क ने मांट स्थित टीला इटोकरी में अपने कुल की स्थापना की थी। यहीं से सन 1912 में राजा कनिष्क, उनके पिता की मूर्तियां खोदाई में निकलीं जो राजकीय संग्रहालय में मौजूद हैं। इसके अलावा कटरा बुद्ध की प्रथम प्रतिमा भी इसी संग्रहालय में मौजूद है। जो बौद्ध अनुयायियों के लिए विशेष आस्था का केंद्र हैं। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान मथुरा में की गई खोदाई में दुर्लभ कलाकृति, संस्कृति से सुसज्जित मूर्तियां निकलीं। इनमें कालखंड बुद्ध, महावीर, मौर्या, शुंगकाल, शक, उत्तर शुंगवंश, कुषाण काल, गुप्त काल, पूर्व और उत्तर मध्य काल की मूर्तियां हैं।
इंगलैंड में सजी हैं मथुरा की मूर्तियां
मथुरा। मथुरा कला की बेजोड़ मूर्तियां इंगलैंड के संग्रहालय में सजी हैं। अंग्रेेज शासन में इस कला की बेशकीमती मूर्तियों को अंग्रेज अपने साथ ले गए थे। इन मूर्तियों के लिए इंगलैंड के संग्रहालय में अलग गैलरी सजाई गई है।
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1983 से हुई विश्व संग्रहालय दिवस की शुरुआत
संग्रहालयों की विशेषता और उनके महत्व को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 1983 में 18 मई को विश्व संग्रहालय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इसका उद्देश्य आम जनता में संग्रहालयों के प्रति जागरूकता लाना और संग्रहालयों में जाकर अपने इतिहास को जानने के प्रति जिज्ञासा पैदा करना है।
मथुरा की कला की विशेषताएं
-लाल चित्तीदार पत्थर का प्रयोग
-मध्यदेशीय कला का अनुसरण एवं विकास
-प्राचीन यक्ष शैली का अन्य देवी-देवताओं में समन्वय
-प्रतीकों का मानवाकृतियों में रूपांतरण
-विदेशी तत्वों का सामंजस्य
-नूतन कला विधाओं का विकास
-राजपुरुषों की मूर्तियों का निर्माण
-स्त्री आकृति के अंकन में लावण्य और आकर्षण
ये है राजकीय संग्रहालय का संग्रह
-पत्थर की मूर्तिया...............................5058
-मिरील्ड मूर्तियां................................2797
-कांस्य की मूर्तियां..............................350
-बर्तन............................................292
-प्राचीन पेंटिंग्स................................415
आभूषण..........................................32
सौंख टील से निकली मूर्तियां व सिक्के..12000
कल लगाई जाएगी प्रदर्शनी
राजकीय संग्रहालय के सहायक निदेशक डा. एसपी सिंह ने बताया कि विश्व संग्रहालय दिवस के उपलक्ष्य में 19 मई को संग्रहालय में हमारे देश के गौरव महान विभूतियों के छायाचित्र की एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। ये प्रदर्शनी 22 मई तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी।
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संग्रहालय में कुषाण काल के राजा कनिष्क सहित इस काल की कई अनमोल मूर्तियां मौजूद हैं। जो उस समय के राजाओं के पहनावे के साथ ही शस्त्र, अस्त्र आदि का परिचय देती हैं। राजा कनिष्क ने मांट स्थित टीला इटोकरी में अपने कुल की स्थापना की थी। यहीं से सन 1912 में राजा कनिष्क, उनके पिता की मूर्तियां खोदाई में निकलीं जो राजकीय संग्रहालय में मौजूद हैं। इसके अलावा कटरा बुद्ध की प्रथम प्रतिमा भी इसी संग्रहालय में मौजूद है। जो बौद्ध अनुयायियों के लिए विशेष आस्था का केंद्र हैं। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान मथुरा में की गई खोदाई में दुर्लभ कलाकृति, संस्कृति से सुसज्जित मूर्तियां निकलीं। इनमें कालखंड बुद्ध, महावीर, मौर्या, शुंगकाल, शक, उत्तर शुंगवंश, कुषाण काल, गुप्त काल, पूर्व और उत्तर मध्य काल की मूर्तियां हैं।
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इंगलैंड में सजी हैं मथुरा की मूर्तियां
मथुरा। मथुरा कला की बेजोड़ मूर्तियां इंगलैंड के संग्रहालय में सजी हैं। अंग्रेेज शासन में इस कला की बेशकीमती मूर्तियों को अंग्रेज अपने साथ ले गए थे। इन मूर्तियों के लिए इंगलैंड के संग्रहालय में अलग गैलरी सजाई गई है।
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1983 से हुई विश्व संग्रहालय दिवस की शुरुआत
संग्रहालयों की विशेषता और उनके महत्व को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 1983 में 18 मई को विश्व संग्रहालय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इसका उद्देश्य आम जनता में संग्रहालयों के प्रति जागरूकता लाना और संग्रहालयों में जाकर अपने इतिहास को जानने के प्रति जिज्ञासा पैदा करना है।
मथुरा की कला की विशेषताएं
-लाल चित्तीदार पत्थर का प्रयोग
-मध्यदेशीय कला का अनुसरण एवं विकास
-प्राचीन यक्ष शैली का अन्य देवी-देवताओं में समन्वय
-प्रतीकों का मानवाकृतियों में रूपांतरण
-विदेशी तत्वों का सामंजस्य
-नूतन कला विधाओं का विकास
-राजपुरुषों की मूर्तियों का निर्माण
-स्त्री आकृति के अंकन में लावण्य और आकर्षण
ये है राजकीय संग्रहालय का संग्रह
-पत्थर की मूर्तिया...............................5058
-मिरील्ड मूर्तियां................................2797
-कांस्य की मूर्तियां..............................350
-बर्तन............................................292
-प्राचीन पेंटिंग्स................................415
आभूषण..........................................32
सौंख टील से निकली मूर्तियां व सिक्के..12000
कल लगाई जाएगी प्रदर्शनी
राजकीय संग्रहालय के सहायक निदेशक डा. एसपी सिंह ने बताया कि विश्व संग्रहालय दिवस के उपलक्ष्य में 19 मई को संग्रहालय में हमारे देश के गौरव महान विभूतियों के छायाचित्र की एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। ये प्रदर्शनी 22 मई तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी।