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मथुरा: हाईकोर्ट ने खारिज की रिसीवर की याचिका
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गोवर्धन (मथुरा)। मुकुट मुखारबिंद मंदिर मानसी गंगा के रिसीवर रमाकांत गोस्वामी की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कहा है कि एसआईटी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर और एसडीएम गोवर्धन द्वारा की गई जांच में याचिकाकर्ता के किसी मौलिक अधिकारों तथा किसी भी प्रकार के अधिकार का हनन नहीं होता है।
गौरतलब है कि प्रभुदयाल शर्मा ने मंदिर रिसीवर रमाकांत गोस्वामी के खिलाफ 27 मई 2019 को एसडीएम कार्यालय में शिकायती पत्र देकर वित्तीय अनियमितता, फूलबंगला, खास महल नामक जमीन खरीद-फरोख्त में करोड़ों रुपये घोटाले के आरोप लगाए थे। शिकायती पत्र की जांच में एसडीएम नागेंद्र कुमार सिंह ने रिसीवर पर लगाए गए आरोप सही पाए थे। एसडीएम ने 4 जुलाई 2019 को जांच रिपोर्ट डीएम मथुरा को सौंप दी थी।
एसडीएम जांच के आधार पर करोड़ों रुपये के गबन के आरोप में एसआईटी ने रिसीवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद मंदिर रिसीवर रमाकांत गोस्वामी ने एसआईटी द्वारा दर्ज एफआईआर और एसडीएम जांच रिपोर्ट को अपने मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दे डाली। हाईकोर्ट में दो जजों की बेंच ने 13 जुलाई को सुनवाई के दौरान यह कहते हुए रमाकांत गोस्वामी की याचिका को खारिज कर दिया कि एसडीएम जांच और एसआईटी एफआईआर से आपके किसी भी मौलिक अधिकारों एवं किसी अधिकार का हनन नहीं होता।
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गौरतलब है कि प्रभुदयाल शर्मा ने मंदिर रिसीवर रमाकांत गोस्वामी के खिलाफ 27 मई 2019 को एसडीएम कार्यालय में शिकायती पत्र देकर वित्तीय अनियमितता, फूलबंगला, खास महल नामक जमीन खरीद-फरोख्त में करोड़ों रुपये घोटाले के आरोप लगाए थे। शिकायती पत्र की जांच में एसडीएम नागेंद्र कुमार सिंह ने रिसीवर पर लगाए गए आरोप सही पाए थे। एसडीएम ने 4 जुलाई 2019 को जांच रिपोर्ट डीएम मथुरा को सौंप दी थी।
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एसडीएम जांच के आधार पर करोड़ों रुपये के गबन के आरोप में एसआईटी ने रिसीवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद मंदिर रिसीवर रमाकांत गोस्वामी ने एसआईटी द्वारा दर्ज एफआईआर और एसडीएम जांच रिपोर्ट को अपने मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दे डाली। हाईकोर्ट में दो जजों की बेंच ने 13 जुलाई को सुनवाई के दौरान यह कहते हुए रमाकांत गोस्वामी की याचिका को खारिज कर दिया कि एसडीएम जांच और एसआईटी एफआईआर से आपके किसी भी मौलिक अधिकारों एवं किसी अधिकार का हनन नहीं होता।
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