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मथुरा: गुरु पूर्णिमा आज, गुरु-शिष्य की परंपरा का होगा निर्वहन
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मथुरा। गुरु और शिष्य की प्राचीन परंपरा का शनिवार को फिर से निर्वहन होगा। हजारों शिष्य गुरु वंदन करेंगे नए शिष्य भी इस दिन गुरु दीक्षा लेंगे। अगर तीर्थ नगरी वृंदावन की बात करें तो 500 से अधिक गुरुओं की गद्दी सज गई हैं। कई आश्रमों में तो गुरु पूजन शुरू भी हो गया है। इधर, शनिवार को गुरु पूर्णिमा पर विभिन्न राज्यों से वृंदावन आने वाले हजारों भक्त अपने-अपने गुरुओं का पूजन-अर्चन करेंगे।
वृंदावन के ज्ञानगुदड़ी, अटल्ला चुंगी, परिक्रमा मार्ग, मोतीझील मार्ग, रमणरेती, वराह घाट, काली दह आदि क्षेत्र में करीब छोटे-बड़े 500 से अधिक आश्रम हैं। इसके साथ मथुरा, गोवर्धन, बरसाना, बलदेव आदि नगरी में 24 जुलाई को मनाए जाने वाले गुरु पूर्णिमा की आश्रमों के साथ-साथ मंदिरों में पूरी हो चुकी हैं। पूर्णिमा पर गुरु पूजन को आने वाले भक्त फल, मिठाई, वस्त्र इत्यादि भेंट करेंगे। वहीं, पूजन के उपरांत नगर के आश्रमों में भक्तों के लिए भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा।
गुरु पूर्णिमा पर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश आदि राज्यों से भारी तादाद में शिष्य अपने-अपने गुरुओं के पूजन को यहां आएंगे। इसके लिए अभी से ही गेस्ट हाउस व होटलों में रुकने के लिए बुकिंग भी होने लगी है।
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आचार्य अवधेश शास्त्री का कहना है कि मनुष्य के जीवन में गुरु का होना जरुरी है। गुरु मनुष्य को संस्कारों से सींचते हुए को संस्कारी बनाता है। जिससे मनुष्य का जीवन निरंतर विपदाओं से परे होते हुए नवीन ऊंचाइयों पर पहुंचता है।
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वृंदावन के ज्ञानगुदड़ी, अटल्ला चुंगी, परिक्रमा मार्ग, मोतीझील मार्ग, रमणरेती, वराह घाट, काली दह आदि क्षेत्र में करीब छोटे-बड़े 500 से अधिक आश्रम हैं। इसके साथ मथुरा, गोवर्धन, बरसाना, बलदेव आदि नगरी में 24 जुलाई को मनाए जाने वाले गुरु पूर्णिमा की आश्रमों के साथ-साथ मंदिरों में पूरी हो चुकी हैं। पूर्णिमा पर गुरु पूजन को आने वाले भक्त फल, मिठाई, वस्त्र इत्यादि भेंट करेंगे। वहीं, पूजन के उपरांत नगर के आश्रमों में भक्तों के लिए भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा।
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गुरु पूर्णिमा पर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश आदि राज्यों से भारी तादाद में शिष्य अपने-अपने गुरुओं के पूजन को यहां आएंगे। इसके लिए अभी से ही गेस्ट हाउस व होटलों में रुकने के लिए बुकिंग भी होने लगी है।
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आचार्य अवधेश शास्त्री का कहना है कि मनुष्य के जीवन में गुरु का होना जरुरी है। गुरु मनुष्य को संस्कारों से सींचते हुए को संस्कारी बनाता है। जिससे मनुष्य का जीवन निरंतर विपदाओं से परे होते हुए नवीन ऊंचाइयों पर पहुंचता है।