{"_id":"6187df6990c1a0103f68ca0a","slug":"mathura-chhath-puja-will-be-celebrated-in-braj-from-today-mathura-news-mtr508171498","type":"story","status":"publish","title_hn":"मथुरा: ब्रज में आज से होगी छठ पूजा की धूम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मथुरा: ब्रज में आज से होगी छठ पूजा की धूम
विज्ञापन
यमुना के कोयला घाट का निरीक्षण करते भारतीय संस्कृतिक समाज के पदाधिकारी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। छठ पूजा उत्सव सोमवार से शुरू होने जा रहा है। इसकी तैयारी मथुरा में भी पूर्वांचल के लोगों द्वारा जोरशोर से की जा रही है। जनपद में बड़ी संख्या में पूर्वांचल के लोगों की मौजूदगी होने पर यह उत्सव कई स्थानों पर सामूहिक रूप से धूम धाम के साथ मनाया जाता है।
भारतीय सांस्कृतिक समाज द्वारा इस बार छठ पूजा का आयोजन धूमधाम से किए जाने की तैयारी हो रही हैं। समाज के मीडिया प्रभारी शशी भूषण ने बताया कि कोयला घाट पर छठ पूजा के लिए जगह का निरीक्षण किया गया है। छठ पूजा को भव्य रूप देने के लिए महेश शर्मा, एसएन दुबे, नंद किशोर, भरत महतो, नागेंद्र चौधरी आदि लोगों ने घाट का निरीक्षण किया।
इसके अलावा पूर्वांचल समिति मथुरा ने छठ पूजा का आयोजन एकबार फिर अड्डा घाट, सिविल लाइंस पर करने का निर्णय लिया है। समिति के अध्यक्ष बीके सिंह ने बताया कि इस साल छठ पूजा का चार दिवसीय कार्यक्रम 08 से 11 नवंबर तक मनाया जाएगा। आयोजन की सभी तैयारियां कर ली गई हैं।
विज्ञापन
चार दिवसीय त्योहार
पहले दिन 08 नवंबर को नहाय खाय
दूसरा दिन 09 नवंबर को खरना
तीसरा दिन 10 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य
अंतिम दिन 11 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य
छठपूजा की ये है परंपरा
पूर्वांचल समिति के सचिव श्रीदास प्रजापति ने बताया कि यह पर्व स्वच्छता एवं प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। इसके पहले दिन नहाय खाय के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रती स्वच्छता के साथ पूजा-पाठ करके चने की दाल, घी में बनी घीया की सब्जी और चावल खाते हैं। दूसरे दिन खरना के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन व्रत उपवास के बाद संध्या को पूजनोपरांत गुड़ में बनी खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इसके बाद 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होती है। तीसरे दिन शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन श्रद्धालुओं का संध्या 3 बजे से घाट पर अर्घ्य देना होता हैं। चौथे दिन सुबह 3 बजे से श्रद्धालुओं का घाट पर आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पूजा उत्सव पूरा हो जाता है।
विज्ञापन
भारतीय सांस्कृतिक समाज द्वारा इस बार छठ पूजा का आयोजन धूमधाम से किए जाने की तैयारी हो रही हैं। समाज के मीडिया प्रभारी शशी भूषण ने बताया कि कोयला घाट पर छठ पूजा के लिए जगह का निरीक्षण किया गया है। छठ पूजा को भव्य रूप देने के लिए महेश शर्मा, एसएन दुबे, नंद किशोर, भरत महतो, नागेंद्र चौधरी आदि लोगों ने घाट का निरीक्षण किया।
विज्ञापन
इसके अलावा पूर्वांचल समिति मथुरा ने छठ पूजा का आयोजन एकबार फिर अड्डा घाट, सिविल लाइंस पर करने का निर्णय लिया है। समिति के अध्यक्ष बीके सिंह ने बताया कि इस साल छठ पूजा का चार दिवसीय कार्यक्रम 08 से 11 नवंबर तक मनाया जाएगा। आयोजन की सभी तैयारियां कर ली गई हैं।
विज्ञापन
चार दिवसीय त्योहार
पहले दिन 08 नवंबर को नहाय खाय
दूसरा दिन 09 नवंबर को खरना
तीसरा दिन 10 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य
अंतिम दिन 11 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य
छठपूजा की ये है परंपरा
पूर्वांचल समिति के सचिव श्रीदास प्रजापति ने बताया कि यह पर्व स्वच्छता एवं प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। इसके पहले दिन नहाय खाय के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रती स्वच्छता के साथ पूजा-पाठ करके चने की दाल, घी में बनी घीया की सब्जी और चावल खाते हैं। दूसरे दिन खरना के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन व्रत उपवास के बाद संध्या को पूजनोपरांत गुड़ में बनी खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इसके बाद 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होती है। तीसरे दिन शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन श्रद्धालुओं का संध्या 3 बजे से घाट पर अर्घ्य देना होता हैं। चौथे दिन सुबह 3 बजे से श्रद्धालुओं का घाट पर आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पूजा उत्सव पूरा हो जाता है।