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मानबिहारी लाल को ब्रजवासियों से अनूठा प्रेम: रमेश बाबा
ब्यूरो,अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 24 Dec 2015 12:08 AM IST
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मान मंदिर में बुधवार को ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा के सानिध्य में मानबिहारी लाल का 10वां पाटोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इसके अंतर्गत मंदिर में धार्मिक आयोजन, अनुष्ठान हुए। नंदगांव-बरसाना के गोस्वामी समाज ने सामूहिक मंगल गान किया।
संत रमेश बाबा ने कहा कि ब्रजवासियों की प्रेम डोर में बंधे मानबिहारी लाल चोरी होने के बाद भी ब्रज में लौट आए। ठाकुर और ठकुरानी ब्रजवासियों के प्रेम और दुलार को भूल नहीं पाए हैं।
मानमंदिर में पाटोत्सव की लीला बड़ी ही अनोखी है। ब्रह्मांचल पर्वत पर यह 5200 वर्ष पुराना मंदिर स्थित है। 16 नवंबर 2006 को मंदिर से मानबिहारी लाल और मानिनी श्रीराधारानी के श्रीविग्रह को ब्रजयात्रा में आए पदयात्री ने चुरा लिया था।
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मूर्ति चोरी होने के 13 दिन बाद पुलिस की सहायता से चोर को पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश बार्डर से पकड़ लिया गया। 31 दिसंबर मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी वाले दिन कलकत्ता से हवाई जहाज में दोनों श्रीविग्रह को सेवायत सुशील गोस्वामी दोबारा ब्रज में लेकर आए।
उसी दिन से संत रमेश बाबा ने ठाकुर मानबिहारी लाल का पाटोत्सव मनाना शुरू कर दिया। इस मौके पर मंदिर के प्रबंधक राधाकांत शास्त्री, भागवत भूषण रामजी लाल शास्त्री, सचिव सुनील सिंह, नर सिंह दास आदि श्रद्धालु मौजूद थे।
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संत रमेश बाबा ने कहा कि ब्रजवासियों की प्रेम डोर में बंधे मानबिहारी लाल चोरी होने के बाद भी ब्रज में लौट आए। ठाकुर और ठकुरानी ब्रजवासियों के प्रेम और दुलार को भूल नहीं पाए हैं।
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मानमंदिर में पाटोत्सव की लीला बड़ी ही अनोखी है। ब्रह्मांचल पर्वत पर यह 5200 वर्ष पुराना मंदिर स्थित है। 16 नवंबर 2006 को मंदिर से मानबिहारी लाल और मानिनी श्रीराधारानी के श्रीविग्रह को ब्रजयात्रा में आए पदयात्री ने चुरा लिया था।
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मूर्ति चोरी होने के 13 दिन बाद पुलिस की सहायता से चोर को पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश बार्डर से पकड़ लिया गया। 31 दिसंबर मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी वाले दिन कलकत्ता से हवाई जहाज में दोनों श्रीविग्रह को सेवायत सुशील गोस्वामी दोबारा ब्रज में लेकर आए।
उसी दिन से संत रमेश बाबा ने ठाकुर मानबिहारी लाल का पाटोत्सव मनाना शुरू कर दिया। इस मौके पर मंदिर के प्रबंधक राधाकांत शास्त्री, भागवत भूषण रामजी लाल शास्त्री, सचिव सुनील सिंह, नर सिंह दास आदि श्रद्धालु मौजूद थे।