{"_id":"623b2ab32de54405155195e7","slug":"lord-godaramannar-came-out-to-give-darshan-to-the-devotees-mounted-on-sheshji-mathura-news-mtr5149324182","type":"story","status":"publish","title_hn":"शेषजी पर आरुढ हो भक्तों को दर्शन देने निकले भगवान गोदारंमन्नार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शेषजी पर आरुढ हो भक्तों को दर्शन देने निकले भगवान गोदारंमन्नार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वृंदावन (मथुरा)। रंगनाथ मंदिर के ब्रह्मोत्सव में बुधवार की सुबह भगवान गोदारंमन्नार शेषजी पर आरूढ़ होकर भक्तों को दर्शन देने निकले। शाम को भगवान गोदारंगमन्नार के कल्पवृक्ष पर दर्शन पाकर श्रद्धालु अभिभूत हुए।
सुबह रंगनाथ मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य पूजन हुआ। इसके बाद शोभायात्रा निकाली। इसमें श्रद्धालु भगवान गोदारंमन्नार और भगवान रंगनाथ के जयकारे लगाते चल रहे थे। शोभायात्रा के रंगजी का बड़ा बगीचा पहुंचने पर ठाकुरजी ने कुछ देर विश्राम किया और इसके बाद भगवान गोदारंगमन्नार की सवारी मंदिर पहुंची। ब्रह्मोत्सव के बारे में कहा जाता है कि एक बार श्रीब्रह्मा जी ने कांचीपुरम में यज्ञ किया।
यज्ञ से भगवान अर्चारूप में प्रगट हुए, सर्वप्रथम ब्रह्मा जी ने उन्हें प्रतिष्ठित किया और उनका स्वयं उत्सव मनाया। तभी से इस उत्सव को ब्रह्मोत्सव कहा जाता है और सभी दिव्यदेश में यह उत्सव मनाया जाता है। इसी परंपरा का अनुसरण करते हुए श्री रंगनाथ मंदिर में प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण पक्ष में दस दिवसीय यह उत्सव मनाया जाता है। ब्रह्मोत्सव के चतुर्थ दिवस श्रीशेष वाहन की सवारी निकाली गई। रजत निर्मित शेष जी पर प्रभु की सवारी आनंदित करने वाली रही।
विज्ञापन
मंदिर की मुख्य अधिशासी अधिकारी अनघा श्री निवासन ने बताया कि भगवान श्रीय: पति नारायण बैकुंठ लोक में एवं क्षीराब्धि में शेष जी पर विराजते हैं। शेष जी पर भगवान विराजकर दर्शन देते हैं। सायं कालीन बेला में भगवान गोदारंगमन्नार ने कल्पवृक्ष पर आरूढ़ होकर भक्तों को दर्शन दिए।
विज्ञापन
सुबह रंगनाथ मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य पूजन हुआ। इसके बाद शोभायात्रा निकाली। इसमें श्रद्धालु भगवान गोदारंमन्नार और भगवान रंगनाथ के जयकारे लगाते चल रहे थे। शोभायात्रा के रंगजी का बड़ा बगीचा पहुंचने पर ठाकुरजी ने कुछ देर विश्राम किया और इसके बाद भगवान गोदारंगमन्नार की सवारी मंदिर पहुंची। ब्रह्मोत्सव के बारे में कहा जाता है कि एक बार श्रीब्रह्मा जी ने कांचीपुरम में यज्ञ किया।
विज्ञापन
यज्ञ से भगवान अर्चारूप में प्रगट हुए, सर्वप्रथम ब्रह्मा जी ने उन्हें प्रतिष्ठित किया और उनका स्वयं उत्सव मनाया। तभी से इस उत्सव को ब्रह्मोत्सव कहा जाता है और सभी दिव्यदेश में यह उत्सव मनाया जाता है। इसी परंपरा का अनुसरण करते हुए श्री रंगनाथ मंदिर में प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण पक्ष में दस दिवसीय यह उत्सव मनाया जाता है। ब्रह्मोत्सव के चतुर्थ दिवस श्रीशेष वाहन की सवारी निकाली गई। रजत निर्मित शेष जी पर प्रभु की सवारी आनंदित करने वाली रही।
विज्ञापन
मंदिर की मुख्य अधिशासी अधिकारी अनघा श्री निवासन ने बताया कि भगवान श्रीय: पति नारायण बैकुंठ लोक में एवं क्षीराब्धि में शेष जी पर विराजते हैं। शेष जी पर भगवान विराजकर दर्शन देते हैं। सायं कालीन बेला में भगवान गोदारंगमन्नार ने कल्पवृक्ष पर आरूढ़ होकर भक्तों को दर्शन दिए।