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हर किसी ने ‘लाइव’ देखी सपा की ‘फाइट’
अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 24 Oct 2016 10:55 PM IST
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सपा
- फोटो : अमर उजाला
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या तो जब चुनाव के नतीजे आते हैं तब लोग इस तरह से टीवी से चिपक कर बैठते हैं या फिर सोमवार को सपा की लाइव फाइट देखने को बेकरार दिखे। घर, आफिस, दुकान या फिर फैक्ट्री। टीवी एक मिनट को भी बंद नहीं हुआ। लखनऊ के सपा आफिस पर लगे कैमरों से दिखाया जाने वाला सीधा प्रसारण कोई मिस करने को तैयार ही नहीं हुआ।
लखनऊ में सपा की मीटिंग भले ही सुबह दस बजे से शुरू हुई लेकिन लोगबाग अपना टीवी नौ बजे ही ऑन करके बैठ गए थे। न तो कोई अपना पसंदीदा धारावाहिक देख रहा था न फिल्म। चल रहे थे तो बस न्यूज चैनल। शुरुआत में सपा आफिस के बाहर झगड़ रहे कार्यकर्ता दिखाई दिए तो उसके बाद मीटिंग में नेताओं के बीच विवाद की सूचनाएं आती रहीं। मुख्यमंत्री और शिवपाल सिंह यादव के बीच हुए झगड़े को जब चैनलों ने ब्रेकिंग न्यूज बनाकर दिखाना शुरू किया तो हर कोई खामोश होकर टीवी के सामने आ गया।
अब क्या होगा। लगता है कि अखिलेश नई पार्टी बना लेंगे। मुलायम सिंह सपा की कमान संभालेंगे। पार्टी टूट जाएगी। चुनाव से पहले ही बिखर जाएगी। इस प्रकार के सवाल सारा दिन गूंजते रहे। सपा के नेता भी अपने घरों पर बैठकर सीधा प्रसारण देखते रहे। सबसे ज्यादा बेचैन भी वही नजर आए। कुछ ने कहा भी कि अगर ऐसी मीटिंग ही करनी थी तो घर पर करनी चाहिए थी। पब्लिक को दिखाकर क्या फायदा हुआ।
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सपा जिलाध्यक्ष तुलसीराम शर्मा ने कहा कि बहुत बुरे दौर से पार्टी गुजर रही है। पता नहीं क्या भविष्य होगा पार्टी का। सोमवार को तो सरकारी दफ्तरों में भी बस इसे लेकर ही चर्चा होती रही। अधिकारी भी कोशिश करते रहे कि किसी तरह से टीवी के सामने जमे रहे। जिक्र इन्हीं का नहीं बल्कि हर तरफ यही हाल थे। कोई अखिलेश का पक्ष ले रहा था कोई मुलायम सिंह यादव का।
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लखनऊ में सपा की मीटिंग भले ही सुबह दस बजे से शुरू हुई लेकिन लोगबाग अपना टीवी नौ बजे ही ऑन करके बैठ गए थे। न तो कोई अपना पसंदीदा धारावाहिक देख रहा था न फिल्म। चल रहे थे तो बस न्यूज चैनल। शुरुआत में सपा आफिस के बाहर झगड़ रहे कार्यकर्ता दिखाई दिए तो उसके बाद मीटिंग में नेताओं के बीच विवाद की सूचनाएं आती रहीं। मुख्यमंत्री और शिवपाल सिंह यादव के बीच हुए झगड़े को जब चैनलों ने ब्रेकिंग न्यूज बनाकर दिखाना शुरू किया तो हर कोई खामोश होकर टीवी के सामने आ गया।
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अब क्या होगा। लगता है कि अखिलेश नई पार्टी बना लेंगे। मुलायम सिंह सपा की कमान संभालेंगे। पार्टी टूट जाएगी। चुनाव से पहले ही बिखर जाएगी। इस प्रकार के सवाल सारा दिन गूंजते रहे। सपा के नेता भी अपने घरों पर बैठकर सीधा प्रसारण देखते रहे। सबसे ज्यादा बेचैन भी वही नजर आए। कुछ ने कहा भी कि अगर ऐसी मीटिंग ही करनी थी तो घर पर करनी चाहिए थी। पब्लिक को दिखाकर क्या फायदा हुआ।
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सपा जिलाध्यक्ष तुलसीराम शर्मा ने कहा कि बहुत बुरे दौर से पार्टी गुजर रही है। पता नहीं क्या भविष्य होगा पार्टी का। सोमवार को तो सरकारी दफ्तरों में भी बस इसे लेकर ही चर्चा होती रही। अधिकारी भी कोशिश करते रहे कि किसी तरह से टीवी के सामने जमे रहे। जिक्र इन्हीं का नहीं बल्कि हर तरफ यही हाल थे। कोई अखिलेश का पक्ष ले रहा था कोई मुलायम सिंह यादव का।