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Mathura News: पिछले साल वाइल्डलाइफ एसओएस ने 1300 जानवरों का किया रेस्क्यू
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फरह। वाइल्डलाइफ एसओएस ने बीते साल में आसपास के क्षेत्रों में लगभग 1,300 जंगली जानवरों को सफलतापूर्वक बचाया। यह उपलब्धि संस्था के निरंतर प्रयासों को रेखांकित करती है, जो विशेष रूप से वन्यजीव बचाव कार्य में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
प्राकृतिक आवासों के सिकुड़ने और मानव अतिक्रमण बढ़ने के कारण, जंगली जानवर भोजन, पानी और आश्रय की तलाश में शहरी क्षेत्रों में जाने को विवश हो रहे हैं। भीषण गर्मी, ठंडी हवाएं अथवा मानसून वन्यजीवों के सामने आने वाली चुनौतियों को और बढ़ा रही हैं। वाइल्डलाइफ एसओएस की हेल्पलाइन पर स्तनधारियों, सृपों और पक्षियों से संबंधित सैकड़ों आपातकालीन कॉल प्राप्त हुए, जिन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता थी।
उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से, वाइल्डलाइफ एसओएस ने पूरे वर्ष 600 से अधिक सरीसृपों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा। इनमें मगरमच्छ, मॉनिटर लिज़र्ड और सांपों की कई प्रजातियां जैसे कि वुल्फ स्नेक, अजगर और कोबरा शामिल थे, जिनमें से कई आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों, व्यावसायिक स्थलों और खेतों के अंदर पाए गए थे।
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इसी प्रकार संस्था ने नीलगाय, हॉग डियर, लकड़बग्घा, तेंदुए का शावक, सांभर हिरण और कई बंदरों सहित 433 स्तनधारी जीवों को भी बचाया। इसके अतिरिक्त, 295 पक्षियों को भी बचाया गया, जिनमें भारतीय मोर, बगुला और चील शामिल थीं। वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी. ने कहा कि मगरमच्छों से लेकर पक्षियों और बड़े स्तनधारियों तक, हर बचाव अभियान हमारी टीम की दक्षता को दर्शाता है।
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प्राकृतिक आवासों के सिकुड़ने और मानव अतिक्रमण बढ़ने के कारण, जंगली जानवर भोजन, पानी और आश्रय की तलाश में शहरी क्षेत्रों में जाने को विवश हो रहे हैं। भीषण गर्मी, ठंडी हवाएं अथवा मानसून वन्यजीवों के सामने आने वाली चुनौतियों को और बढ़ा रही हैं। वाइल्डलाइफ एसओएस की हेल्पलाइन पर स्तनधारियों, सृपों और पक्षियों से संबंधित सैकड़ों आपातकालीन कॉल प्राप्त हुए, जिन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता थी।
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उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से, वाइल्डलाइफ एसओएस ने पूरे वर्ष 600 से अधिक सरीसृपों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा। इनमें मगरमच्छ, मॉनिटर लिज़र्ड और सांपों की कई प्रजातियां जैसे कि वुल्फ स्नेक, अजगर और कोबरा शामिल थे, जिनमें से कई आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों, व्यावसायिक स्थलों और खेतों के अंदर पाए गए थे।
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इसी प्रकार संस्था ने नीलगाय, हॉग डियर, लकड़बग्घा, तेंदुए का शावक, सांभर हिरण और कई बंदरों सहित 433 स्तनधारी जीवों को भी बचाया। इसके अतिरिक्त, 295 पक्षियों को भी बचाया गया, जिनमें भारतीय मोर, बगुला और चील शामिल थीं। वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी. ने कहा कि मगरमच्छों से लेकर पक्षियों और बड़े स्तनधारियों तक, हर बचाव अभियान हमारी टीम की दक्षता को दर्शाता है।