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कलाधारी आश्रम में रंगभरनी एकादशी के दिन ठाकुर जी खेलते हैं होली

Wed, 12 Feb 2020 12:03 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 12 Feb 2020 12:03 AM IST
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kaladhari ashram in mathura
कलाधारी मंदिर के ठाकुर लाल जी महाराज जी की झांकी। - फोटो : MATHURA
वृंदावन (मथुरा)। वर के वन में कलाधारी आश्रम में ठाकुर जी महाराज रंगभरनी एकादशी के दिन राधा रानी के साथ होली खेलते हैं। इस दिन उनका केवल लाल फूलों से शृंगार किया जाता और ऐसे ही फूलों से उनके द्वारा भक्तों संग होली भी खेली जाती है। इसे लेकर यहां तैयारियां शुरू हो चुकी है।
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कांची कामकोटि पीठ विष्णु स्वामी संप्रदाय के लगभग 10 एकड़ में फैले कलाधारी आश्रम में अभी से होली की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ब्रजवासी बाबा जयराम दास ने बताया कि टेसू के फूलों का रंग तैयार कर लाल जी ठाकुर के श्री विग्रह द्वारा श्री राधा रानी की 64 कलाओं के साथ होली खेली जाती है।
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रंगभरनी एकादशी को ब्रजवासी यहां पर फूल और गुलाल उड़ाकर अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। यहां करीब दो दर्जन वट वृक्ष, दस से अधिक श्याम तमाल, कदंब, डूगड़ के वृक्ष हैं। वहीं यह पर करील की कुंज बनी हुई हैं। माना जाता है कि ठाकुर जी अपनी प्राण प्रियतमा राधा रानी जी के साथ विश्राम करते हैं। इन सभी वृक्षों को कृष्ण कालीन माना जाता है। यही मानकर लोग इनकी पूजा करते हैं।
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मुस्लिम शासक को खुलवानी पड़ी मंदिर की मोरी
कलाधारी आश्रम में लाल ठाकुर जी का विग्रह बहावलपुर (पाकिस्तान) से आया है। कलाधारी ठाकुर लाल जी महाराज 1947 से पहले वहीं विराजमान थे। इससे पूर्व एक मुस्लिम शासक ने मंदिर की मोरी (मंदिर के पानी निकलने का स्थान) बंद करा दिया।
इसके बाद वह बीमार हो गया। बाद जब उसे आभास हुआ तो उसने उक्त मोरी को फिर से खुलवाया। भगवान कलाधारी के स्नान के जल को प्रसाद स्वरूप पीने की परंपरा है। ब्रजवासी बाबा जयराम दास ने बताया कि मंदिर में भगवान लाल जी के अलावा उनकी लीलाओं के साक्षी बने वृक्षों को भी गुलाल लगाया जाता है।
1947 में जब बहावलपुर में दंगे हुए तो उस समय लाल जी ने बाबा को स्वप्न में दर्शन दिए कि मुझे वृंदावन ले चलो। इस आदेश के बाद ही ठाकुर जी को वृंदावन लाया गया।

विश्राम कुंड की गहराई नहीं मालूम
दस वर्ष पहले विश्राम कुंड की सफाई की गई थी। इस दौरान सफाईकर्मी करीब 100 सीढ़ियों तक ही पहुंच पाए थे। इसकी नीचे बावड़ी (कुएं का स्थान) बनी हुई है। बाबा जयराम दास ने बताया कि प्राकृतिक स्रोत होने के कारण इसका पानी कभी सूखता नहीं है।
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