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बहुत परेशान थे जवाहर बाग कालोनी के लोग
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 28 Jun 2016 12:00 AM IST
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jawahar bagh file photo
जवाहर बाग हिंसा की जांच कर रहे न्यायिक आयोग को जवाहर बाग कालोनी में रहने वाले 80 परिवारों ने भी आपबीती बताई। उन्होंने आयोग को बताया गया कि जवाहर बाग में इतना शोर रहता था कि बच्चों को पढ़ने के लिए बाहर जाना पड़ा था। किसी ने होटल में कमरा लिया तो कोई अपने दोस्त के घर रहकर पढ़ा।
ढाई साल तक जवाहर बाग में कब्जा जमाने वाले रामवृक्ष ने यहां हजारों की भीड़ के लिए तंबुओं का शहर बसा रखा था। यह सब प्रशासन की नजरों के सामने होता रहा। इस भीड़ से सबसे ज्यादा परेशान जवाहर बाग कालोनी में रहने वाले 80 परिवार थे।
यहां होने वाली हर गतिविधि इन्हें नजर आती थी। जवाहर बाग में बनी रसोई का धुआं भी सीधे इनके मकानों तक पहुंचता था। बाग में खड़े लोग इन्हें धमकाते रहते थे। कहते थे कि वह उनके मकानों पर भी कब्जा कर लेंगे। अभद्र भाषा का भी प्रयोग करते थे। अब जब न्यायिक आयोग जांच करने पहुंचा तो इन लोगों ने आपबीती सुनाई। इस संबंध में कुछ शपथपत्र भी दाखिल किए गए हैं।
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उद्यान विभाग वालों ने भी सुनाया दर्द
उद्यान विभाग के अधिकारियों ने भी न्यायिक आयोग के समक्ष पेश होकर अपना बात रखी। इन लोगों का कहना है कि जवाहर बाग जिस ठेकेदार को दिया गया था उसे भी इन लोगों ने भगा दिया था। बाग को भी तहस नहस कर दिया है। पेड़ों को काट लिया गया था। सरकारी क्वार्टर पर भी इन लोगों का कब्जा था। जब खाली कराने की कोशिश की गई तो धमकाया गया। कर्मचारियों के साथ मारपीट तक की गई है।
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ढाई साल तक जवाहर बाग में कब्जा जमाने वाले रामवृक्ष ने यहां हजारों की भीड़ के लिए तंबुओं का शहर बसा रखा था। यह सब प्रशासन की नजरों के सामने होता रहा। इस भीड़ से सबसे ज्यादा परेशान जवाहर बाग कालोनी में रहने वाले 80 परिवार थे।
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यहां होने वाली हर गतिविधि इन्हें नजर आती थी। जवाहर बाग में बनी रसोई का धुआं भी सीधे इनके मकानों तक पहुंचता था। बाग में खड़े लोग इन्हें धमकाते रहते थे। कहते थे कि वह उनके मकानों पर भी कब्जा कर लेंगे। अभद्र भाषा का भी प्रयोग करते थे। अब जब न्यायिक आयोग जांच करने पहुंचा तो इन लोगों ने आपबीती सुनाई। इस संबंध में कुछ शपथपत्र भी दाखिल किए गए हैं।
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उद्यान विभाग वालों ने भी सुनाया दर्द
उद्यान विभाग के अधिकारियों ने भी न्यायिक आयोग के समक्ष पेश होकर अपना बात रखी। इन लोगों का कहना है कि जवाहर बाग जिस ठेकेदार को दिया गया था उसे भी इन लोगों ने भगा दिया था। बाग को भी तहस नहस कर दिया है। पेड़ों को काट लिया गया था। सरकारी क्वार्टर पर भी इन लोगों का कब्जा था। जब खाली कराने की कोशिश की गई तो धमकाया गया। कर्मचारियों के साथ मारपीट तक की गई है।