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जवाहरबाग की साख पर फिर बट्टा, सौंदर्यीकरण में चंद दिन पहले बनी दीवारों में आई दरारें
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मथुरा। चार साल पहले देश भर में सुर्खियां बने जवाहरबाग के सौंदर्यीकरण का कार्य पूरा होने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी निर्माण एजेंसियों की कार्य प्रणाली इसमें बड़ी बाधा बन गई हैं। राजकीय निर्माण निगम के बाद जल निगम द्वारा किए जा रहे कार्य भी निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर सके है। निर्माण के चंद दिनों बाद ही इसकी बाउंड्रीवाल सहित मुख्यद्वार की दीवारों में दरार आ गई हैं। पाथवे पर लगे पत्थर धंसने लगे हैं। ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति भेज दी है।
जवाहर बाग पर कब्जा और फिर यहां कई दर्जन लोगों की मौत की घटना ने करीब चार साल पहले मथुरा को सुर्खियों में ला दिया था। इसे कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई में दो पुलिस अफसरों की भी जान गई थी। प्रदेश सरकार ने इसे पर्यटन की दृष्टि से तैयार करने की योजना बनाई। करीब 15 करोड़ रुपये की योजना पर यहां सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। शुरुआती कार्य राजकीय निर्माण निगम ने किया था।
निर्माण कार्य की घटिया गुणवत्ता पर शासन ने निर्माण एजेंसी के रूप में यह दायित्व जल निगम को दिया। लेकिन, मंगलवार को इसका निरीक्षण करने गए ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नगेंद्र प्रताप को स्थिति बेहद खराब मिली हैं। नवनिर्मित बाउंड्रीवाल में दरार पाई गईं। मुख्य द्वार की दीवार में भी दरार थीं। पाथवे में लगाए गए पत्थर जगह-जगह धंसे मिले।
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पत्थरों का आकार एक जैसा नहीं था, जो देखने में ठीक नहीं लग रहे थे। इन पत्थरों के बीच ज्वाइंट भी खुले पाए गए। विद्युत पोल की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली है। कई स्थानों पर लगाए गए पत्थर जगह छोड़ रहे हैं। पूर्व में दिए गए दिशा- निर्देशों के तहत भी कार्य में सुधार नहीं किया गया। इसकी रिपोर्ट ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने निर्माण एजेंसी जल निगम के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से संस्तुति की है।
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जवाहर बाग पर कब्जा और फिर यहां कई दर्जन लोगों की मौत की घटना ने करीब चार साल पहले मथुरा को सुर्खियों में ला दिया था। इसे कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई में दो पुलिस अफसरों की भी जान गई थी। प्रदेश सरकार ने इसे पर्यटन की दृष्टि से तैयार करने की योजना बनाई। करीब 15 करोड़ रुपये की योजना पर यहां सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। शुरुआती कार्य राजकीय निर्माण निगम ने किया था।
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निर्माण कार्य की घटिया गुणवत्ता पर शासन ने निर्माण एजेंसी के रूप में यह दायित्व जल निगम को दिया। लेकिन, मंगलवार को इसका निरीक्षण करने गए ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नगेंद्र प्रताप को स्थिति बेहद खराब मिली हैं। नवनिर्मित बाउंड्रीवाल में दरार पाई गईं। मुख्य द्वार की दीवार में भी दरार थीं। पाथवे में लगाए गए पत्थर जगह-जगह धंसे मिले।
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पत्थरों का आकार एक जैसा नहीं था, जो देखने में ठीक नहीं लग रहे थे। इन पत्थरों के बीच ज्वाइंट भी खुले पाए गए। विद्युत पोल की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली है। कई स्थानों पर लगाए गए पत्थर जगह छोड़ रहे हैं। पूर्व में दिए गए दिशा- निर्देशों के तहत भी कार्य में सुधार नहीं किया गया। इसकी रिपोर्ट ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने निर्माण एजेंसी जल निगम के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से संस्तुति की है।